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भाजपा और सपा : जीत के जितने बड़े दावे, उतनी ही बड़ी चुनौती

Sat, 30 Mar 2024 12:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2024 12:22 AM IST
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BJP and SP: The bigger the claims of victory, the bigger the challenge
बदायूं। लोकसभा क्षेत्र में सपा और भाजपा की ओर से जीत के जितने बड़े दावे किए जा रहे हैं, उनके उम्मीदवारों के लिए उतनी ही बड़ी चुनौतियां हैं। संगठन के पदाधिकारी वाकिफ हैं और रणनीति बनाने में जुट गए हैं। बदली रणनीति पर अमल नजर आने लगा है।
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अबकी बार का चुनाव अहम है। दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवार नए हैं। पिछली बार सपा से धर्मेंद्र यादव थे और भाजपा से संघमित्रा मौर्य। अबकी बार सपा ने शिवपाल सिंह यादव और भाजपा ने दुर्विजय सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। दोनों ने लोकसभा का चुनाव पहले कभी नहीं लड़ा। दुर्विजय सिंह संगठन के महारथी हैं और शिवपाल सिंह यादव सूबे की सियासत का बड़ा चेहरा हैं। भाजपा को जीत दोहराने और सपा को खोया गौरव पाने की बेचैनी है। इस सीट पर दोनों दलों के प्रदेश नेतृत्व का खास ध्यान है। सपा को यादव-मुस्लिम गठजोड़ के मतों में बंटवारा रोकने व भाजपा के लिए सहसवान और गुन्नौर विधानसभा सीट में यादव मतों में हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर चुनौती है। पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव और जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव समेत कई नेता भाजपा की ओर से लगाए गए हैं।
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सपा : शिवपाल सिंह यादव के लिए यादव और मुस्लिम के गठजोड़ की मजबूती है, पर राज्यसभा के हालिया चुनाव में बिसौली के सपा विधायक आशुतोष मौर्य की क्रॉस वोटिंग के बाद बदायूं लोकसभा क्षेत्र के चुनाव में चुनौती सामने आई है। सपा संगठन के एक जिम्मेदार पदाधिकारी का कहना है कि इसलिए खुद शिवपाल सिंह यादव और उनके पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव बिसौली पर फोकस कर रहे हैं।
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गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र में मत प्रतिशत जनाधार बढ़ाने की रणनीति भी बनाई गई है, क्योंकि अजीत कुमार सिंह राजू के भाजपा में चले जाने और 2017 में गुन्नौर से भाजपा विधायक चुने जाने के बाद सपा को यहां कम मत मिले थे। पर 2022 के विधानसभा चुनाव में राजू हार गए और सपा के रामखिलाड़ी यादव जीत गए थे। इसलिए अब सपा मजबूती मान रही है। साथ ही मुस्लिम मतों का बंटवारा रोकने के लिए सपा के स्थानीय संगठन ने कद्दावर मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं से भी संपर्क साधा है।

भाजपा : मौर्य-शाक्य मतों के साथ हिंदुत्व के आधार पर मतों के ध्रुवीकरण और मोदी की गारंटी को जीत का आधार मानने वाली भाजपा, यादव मतों में सेंध की रणनीति पर अमल करेगी। जिला संगठन लंबे समय से इसकी तैयारी में लगा था। इसलिए यादव जाति के ब्लॉक प्रमुखों और संगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा चुकी है। सदर सीट पर मत प्रतिशत बढ़ाकर यादव बहुल गुन्नौर और सहसवान का घाटा पाटने की रणनीति बनाई गई है।
गुन्नौर में अजीत कुमार सिंह राजू, जो विधायक और राज्यमंत्री भी रह चुके हैं, के माध्यम से यादव मतों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर है। सहसवान क्षेत्र में ब्लॉक प्रमुख कृति सिंह यादव और गजेंद्र यादव को लगाया गया है। संगठन के जिलाध्यक्ष से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वैसे तो चुनौती कोई नहीं है, लेकिन हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। ताकि भारी बहुमत से जीत हो सके।



बसपा उम्मीदवार पर दोनों दलों की निगाह
बदायूं लोकसभा क्षेत्र में इंडिया गठबंधन से सपा के शिवपाल सिंह यादव और भाजपा से दुर्विजय सिंह की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद अगर किसी दल का असरदार दखल हो सकता है तो वह है बसपा। बसपा उम्मीदवार पर दोनों प्रमुख दलों के नेतृत्व की निगाह भी टिकी है क्योंकि जातिगत समीकरण बदल सकते हैं। अगर मुस्लिम उम्मीदवार आता है तो सपा के लिए चुनौती होगी और शाक्य या मौर्य बिरादरी के दावेदार को मैदान में उतारा गया तो भाजपा के आधार मतों में बंटवाने की चुनौती सामने आ सकती है। इसलिए दोनों दल उम्मीदवार आने पर अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव कर सकते हैं।
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