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प्रतिभा ने ‘जुनून’ से हासिल किया मुकाम
badaun
Updated Sun, 22 Feb 2015 11:31 PM IST
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प्रतिभा जब कक्षा आठ में आईं तो उनके भाई ने एक दिन बोला कि तुम आईएएस बनोगी। इस पर उन्होंने जानना चाहा था कि भाई यह आईएएस क्या होता है और इसके लिए क्या करते हैं? उस समय भाई ने जो भी जानकारी दी, प्रतिभा ने आईएएस की परीक्षा पास करने को अपना लक्ष्य बना लिया। वर्तमान में प्रतिभा पाल राजगढ़ (मध्य प्रदेश) में एसडीएम पद पर कार्यरत हैं।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बदायूं से 10वीं और 12वीं के बाद ग्रेजुएशन के दौरान प्रतिभा ने जी-तोड़ मेहनत शुरू कर दी थी। प्रतिभा बताती हैं कि वह अच्छी शिक्षा डिजर्व करतीं थीं लेकिन नहीं मिल सकी। उस वक्त स्टडी मैटेरियल के कंटेंट एकत्र करने के लिए भी अब के मुकाबले ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। उस वक्त बाहर जाना और रहकर पढ़ना आसान नहीं था। पैरेंटल सपोर्ट खूब था। बवजूद इसके कई विषम परिस्थितियां आईं। कई बार सोचा ड्रॉप कर दूं पर जुनून को कम नहीं कर पाई। यही वजह है कि आज इस मुकाम तक पहुंच सकी हूं।
प्रतिभा बताती हैं कि आज भी जिले में गर्ल्स एजूकेशन पर फोकस नहीं किया जाता है। नतीजा, लड़कियां शिक्षा में पिछड़ जाती हैं और उनके मन में उमड़े कुछ करने के ख्वाब टूट जाते हैं। ऐसे अवसाद से वह भी कई बार जूझीं लेकिन कभी हावी नहीं होने दिया। तमाम ऐसे मोड़ आए जब आईएएस बनने का सपना बिखरता नजर आता था। इसके लिए जब-तब खुद को समझाना पड़ा।
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उनका कहना है कि आईएएस बनने के पीछे उनकी समाज और देश से जुड़कर कुछ करने की ललक थी। इसके लिए उन्होंने साइंस विषय की पढ़ाई छोड़कर आर्ट्स विषय को लिया। प्रतिभा की सलाह है कि गर्ल्स मल्टी डायरेक्शन कॅरियर पर माइंड डायवर्ट न करें बल्कि टारगेट सेट करते हुए शिक्षा ग्रहण करें।
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राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बदायूं से 10वीं और 12वीं के बाद ग्रेजुएशन के दौरान प्रतिभा ने जी-तोड़ मेहनत शुरू कर दी थी। प्रतिभा बताती हैं कि वह अच्छी शिक्षा डिजर्व करतीं थीं लेकिन नहीं मिल सकी। उस वक्त स्टडी मैटेरियल के कंटेंट एकत्र करने के लिए भी अब के मुकाबले ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। उस वक्त बाहर जाना और रहकर पढ़ना आसान नहीं था। पैरेंटल सपोर्ट खूब था। बवजूद इसके कई विषम परिस्थितियां आईं। कई बार सोचा ड्रॉप कर दूं पर जुनून को कम नहीं कर पाई। यही वजह है कि आज इस मुकाम तक पहुंच सकी हूं।
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प्रतिभा बताती हैं कि आज भी जिले में गर्ल्स एजूकेशन पर फोकस नहीं किया जाता है। नतीजा, लड़कियां शिक्षा में पिछड़ जाती हैं और उनके मन में उमड़े कुछ करने के ख्वाब टूट जाते हैं। ऐसे अवसाद से वह भी कई बार जूझीं लेकिन कभी हावी नहीं होने दिया। तमाम ऐसे मोड़ आए जब आईएएस बनने का सपना बिखरता नजर आता था। इसके लिए जब-तब खुद को समझाना पड़ा।
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उनका कहना है कि आईएएस बनने के पीछे उनकी समाज और देश से जुड़कर कुछ करने की ललक थी। इसके लिए उन्होंने साइंस विषय की पढ़ाई छोड़कर आर्ट्स विषय को लिया। प्रतिभा की सलाह है कि गर्ल्स मल्टी डायरेक्शन कॅरियर पर माइंड डायवर्ट न करें बल्कि टारगेट सेट करते हुए शिक्षा ग्रहण करें।