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घटनाक्रम : छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का मामला
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बदायूं। 23 अप्रैल 2008 : छात्रा का सहेली के घर नोट्स लेने जाते वक्त अपहरण।
29 अप्रैल 2008 : पिता की तहरीर पर गुमशुदगी।
एक मई 2008 : पिता ने दोबारा शिकायत की।
चार मई 2008 : पिता के बयान पर गुमशुदगी का मामला तेजेंद्र सागर व मीनू शर्मा के खिलाफ अपहरण में तरमीम
17 मई 2008 : बिल्सी पुलिस ने छात्रा को मुजफ्फरनगर रेलवे से बरामद करना बताया।
22 मई 2008 : लिंक ऑफीसर जुडीशियल मजिस्ट्रेट रेशमा प्रवीण ने धारा 164 सीआरपीसी के तहत छात्रा के कलम बंद बयान दर्ज किए और उसे नारी निकेतन बरेली भेजा गया।
09 जून 2008 : पिता के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने संज्ञान लिया और छात्रा को नारी निकेतन से छोड़ने का आदेश दिया। इससे छात्रा अपनी इच्छा से मामा के साथ ननिहाल बरेली चली गई।
03 अक्तूबर 2008 : न्यायालय ने एफआर सं.-15/2008 में छात्रा के पिता को नोटिस भेजा।
25 अक्तूबर 2008 : सीबीसीआईडी ने मामले में एफआर लगाई।
28 नवंबर 2008 : छात्रा के पिता ने न्यायालय में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
06 फरवरी 2009 : एसीजेएम द्वितीय राजवीर सिंह ने सीबीसीआईडी की एफआर निरस्त करते हुए प्रोटेस्ट परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
18 मार्च 2009 : कोर्ट ने छात्रा का बयान दर्ज किया। इसमें छात्रा ने तत्कालीन विधायक योगेंद्र सागर, तेजेंद्र सागर और मीनू पर लखनऊ, दिल्ली ले जाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया।
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18 अगस्त 2009: सीजेएम द्वितीय राजवीर सिंह ने तीनों आरोपियों तत्कालीन विधायक योगेंद्र सागर, तेजेंद्र व मीनू को कोर्ट में तलब करने का आदेश दिया।
21 अक्तूबर 2009 : हाईकोर्ट इलाहाबाद ने तेजेंद्र सागर की रिट याचिका खारिज की।
19 जनवरी 2010 : तीनों आरोपियों तत्कालीन बिल्सी विधायक योगेंद्र सागर, तेजेंद्र सागर और मीनू के वारंट जारी।
14 जून 2010 : छात्रा के अधिवक्ता ने गैर जमानती वारंट तामील एसएसपी से कराये जाने का प्रार्थना पत्र दिया लेकिन पुलिस ने बिना तामील वारंट वापस कर दिए। लिखा कि दबिशें दी गईं आरोपी नहीं मिले थे।
30 जून 2010 : योगेंद्र सागर ने गैर जमानती वारंट के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहां रिवीजन दायर की। उसे न्यायाधीश अनिल कुमार अग्रवाल ने खारिज कर दिया।
12 जुलाई 2010 : एसीजेएम अखिलेश कुमार ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 82 सीआरपीसी के तहत उद्घोषणा जारी की, कहा-तीनों आरोपी फरार हैं। एसएसपी नोटिस चस्पा कराएं।
30 जुलाई 2010 : उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति अशोक कुमार रूपनवाल ने योगेंद्र सागर के खिलाफ गैर जमानती वारंट की कार्रवाई स्टे कर दी।
25 अगस्त 2010 : आरोपी तेजेंद्र सागर और मीनू शर्मा के खिलाफ कुर्की व गैर जमानती वारंट जारी किए।
04 सितंबर 2010 : आरोपी मीनू शर्मा पुलिस ने गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जमानत प्रार्थना पत्र खारिजकर उसे जेल भेजा गया।
16 जुलाई 2014 : अपर सत्र न्यायाधीश रीता कौशिक ने अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी तेजेंद्र सागर और मीनू को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई।
30 अक्तूबर 2021 : तीसरे आरोपी पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। संवाद
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29 अप्रैल 2008 : पिता की तहरीर पर गुमशुदगी।
एक मई 2008 : पिता ने दोबारा शिकायत की।
चार मई 2008 : पिता के बयान पर गुमशुदगी का मामला तेजेंद्र सागर व मीनू शर्मा के खिलाफ अपहरण में तरमीम
17 मई 2008 : बिल्सी पुलिस ने छात्रा को मुजफ्फरनगर रेलवे से बरामद करना बताया।
22 मई 2008 : लिंक ऑफीसर जुडीशियल मजिस्ट्रेट रेशमा प्रवीण ने धारा 164 सीआरपीसी के तहत छात्रा के कलम बंद बयान दर्ज किए और उसे नारी निकेतन बरेली भेजा गया।
09 जून 2008 : पिता के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने संज्ञान लिया और छात्रा को नारी निकेतन से छोड़ने का आदेश दिया। इससे छात्रा अपनी इच्छा से मामा के साथ ननिहाल बरेली चली गई।
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03 अक्तूबर 2008 : न्यायालय ने एफआर सं.-15/2008 में छात्रा के पिता को नोटिस भेजा।
25 अक्तूबर 2008 : सीबीसीआईडी ने मामले में एफआर लगाई।
28 नवंबर 2008 : छात्रा के पिता ने न्यायालय में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
06 फरवरी 2009 : एसीजेएम द्वितीय राजवीर सिंह ने सीबीसीआईडी की एफआर निरस्त करते हुए प्रोटेस्ट परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
18 मार्च 2009 : कोर्ट ने छात्रा का बयान दर्ज किया। इसमें छात्रा ने तत्कालीन विधायक योगेंद्र सागर, तेजेंद्र सागर और मीनू पर लखनऊ, दिल्ली ले जाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया।
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18 अगस्त 2009: सीजेएम द्वितीय राजवीर सिंह ने तीनों आरोपियों तत्कालीन विधायक योगेंद्र सागर, तेजेंद्र व मीनू को कोर्ट में तलब करने का आदेश दिया।
21 अक्तूबर 2009 : हाईकोर्ट इलाहाबाद ने तेजेंद्र सागर की रिट याचिका खारिज की।
19 जनवरी 2010 : तीनों आरोपियों तत्कालीन बिल्सी विधायक योगेंद्र सागर, तेजेंद्र सागर और मीनू के वारंट जारी।
14 जून 2010 : छात्रा के अधिवक्ता ने गैर जमानती वारंट तामील एसएसपी से कराये जाने का प्रार्थना पत्र दिया लेकिन पुलिस ने बिना तामील वारंट वापस कर दिए। लिखा कि दबिशें दी गईं आरोपी नहीं मिले थे।
30 जून 2010 : योगेंद्र सागर ने गैर जमानती वारंट के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहां रिवीजन दायर की। उसे न्यायाधीश अनिल कुमार अग्रवाल ने खारिज कर दिया।
12 जुलाई 2010 : एसीजेएम अखिलेश कुमार ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 82 सीआरपीसी के तहत उद्घोषणा जारी की, कहा-तीनों आरोपी फरार हैं। एसएसपी नोटिस चस्पा कराएं।
30 जुलाई 2010 : उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति अशोक कुमार रूपनवाल ने योगेंद्र सागर के खिलाफ गैर जमानती वारंट की कार्रवाई स्टे कर दी।
25 अगस्त 2010 : आरोपी तेजेंद्र सागर और मीनू शर्मा के खिलाफ कुर्की व गैर जमानती वारंट जारी किए।
04 सितंबर 2010 : आरोपी मीनू शर्मा पुलिस ने गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जमानत प्रार्थना पत्र खारिजकर उसे जेल भेजा गया।
16 जुलाई 2014 : अपर सत्र न्यायाधीश रीता कौशिक ने अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी तेजेंद्र सागर और मीनू को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई।
30 अक्तूबर 2021 : तीसरे आरोपी पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। संवाद