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अपने ही निकले दगाबाज, गिराया कैप्टन का जहाज
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दातागंज के सपा प्रत्याशी के आवास पर चुनावी मंथन करते पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव। संवाद
- फोटो : BADAUN
दातागंज (बदायूं)। दातागंज विधानसभा चुनाव हारने की सपा प्रत्याशी कैप्टन अर्जुन सिंह को सबसे बड़ी वजह ये रही कि उन्हें अपनों के भितरघात का सामना करना पड़ा। इस सीट से सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव अपने बेटे को चुनाव लड़ाना चाहते थे लेकिन पार्टी को ये मंजूर नहीं था। पार्टी ने कैप्टन अर्जुन सिंह को टिकट दिया। जिलाध्यक्ष की नाराजगी और उनके समर्थकों में मायूसी से उन्हें काफी नुकसान हुआ। इसका परिणाम ये रहा कि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
शुक्रवार को सपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव चुनावी मंथन करने दातागंज के सपा प्रत्याशी रहे कैप्टन अर्जुन सिंह के आवास पहुंचे। उस दौरान सपा नेता मोहम्मद इशाक, दलवीर सिंह यादव, सुखपाल सिंह यादव, सुरेंद्र फौजी, मोहम्मद रऊफ और घनेंद्र पाल सिंह भी मौजूद थे। चुनाव हारने पर चर्चा हुई तो तमाम सपा कार्यकर्ताओं ने इसका ठीकरा सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव पर फोड़ दिया।
कैप्टन अर्जुन सिंह के पिता नरेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जब प्रेमपाल सिंह यादव के बेटे को को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने हमारा साथ नहीं दिया। चुनाव हराने के लिए उन्होंने अपने सगे भतीजे सुभाष यादव को राष्ट्रीय परिवर्तन दल से मैदान में खड़ा कर दिया। जबकि क्षेत्र के सभी लोग जानते थे कि दातागंज सीट पर सपा और भाजपा की टक्कर है। कैप्टन अर्जुन सिंह की काफी अच्छी पकड़ थी। क्षेत्र की जनता भी चाहती थी कि वह चुनाव जीतें लेकिन जिलाध्यक्ष टिकट न मिलने की खीझ निकाल रहे थे। जब उनके भतीजे को क्षेत्र से वोट मिलते दिखाई नहीं दिए तो उन्होंने भाजपा का समर्थन करना शुरू कर दिया। एक-एक व्यक्ति का उन्होंने भाजपा को वोट दिलवाया। यही वजह रही कि दातागंज से सपा चुनाव हारी। इस मंथन के दौरान तमाम कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष के पद से प्रेमपाल सिंह यादव को हटाने की मांग की। इस पर पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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अपने गांव तक के वोट भाजपा को डलवाए
नरेश प्रताप सिंह के मुताबिक सपा जिलाध्यक्ष ने अपने गांव कलौरा तक के वोट भाजपा को डलवाए। कलौरा गांव यादव बाहुल्य है। यहां हर चुनाव में एक हजार से ज्यादा वोट सपा को पड़ता है लेकिन इस चुनाव में केवल 674 ही वोट पड़े जबकि 374 वोट भाजपा को गए।
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आरोप कोई कुछ भी लगा सकता है। मैं इन बातों पर विश्वास नहीं करता। मेरे बेटे को पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वह चुनाव नहीं लड़ा। मैंने पूरे मन से पार्टी प्रत्याशियों को लड़ाया है।
- प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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शुक्रवार को सपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव चुनावी मंथन करने दातागंज के सपा प्रत्याशी रहे कैप्टन अर्जुन सिंह के आवास पहुंचे। उस दौरान सपा नेता मोहम्मद इशाक, दलवीर सिंह यादव, सुखपाल सिंह यादव, सुरेंद्र फौजी, मोहम्मद रऊफ और घनेंद्र पाल सिंह भी मौजूद थे। चुनाव हारने पर चर्चा हुई तो तमाम सपा कार्यकर्ताओं ने इसका ठीकरा सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव पर फोड़ दिया।
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कैप्टन अर्जुन सिंह के पिता नरेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जब प्रेमपाल सिंह यादव के बेटे को को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने हमारा साथ नहीं दिया। चुनाव हराने के लिए उन्होंने अपने सगे भतीजे सुभाष यादव को राष्ट्रीय परिवर्तन दल से मैदान में खड़ा कर दिया। जबकि क्षेत्र के सभी लोग जानते थे कि दातागंज सीट पर सपा और भाजपा की टक्कर है। कैप्टन अर्जुन सिंह की काफी अच्छी पकड़ थी। क्षेत्र की जनता भी चाहती थी कि वह चुनाव जीतें लेकिन जिलाध्यक्ष टिकट न मिलने की खीझ निकाल रहे थे। जब उनके भतीजे को क्षेत्र से वोट मिलते दिखाई नहीं दिए तो उन्होंने भाजपा का समर्थन करना शुरू कर दिया। एक-एक व्यक्ति का उन्होंने भाजपा को वोट दिलवाया। यही वजह रही कि दातागंज से सपा चुनाव हारी। इस मंथन के दौरान तमाम कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष के पद से प्रेमपाल सिंह यादव को हटाने की मांग की। इस पर पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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अपने गांव तक के वोट भाजपा को डलवाए
नरेश प्रताप सिंह के मुताबिक सपा जिलाध्यक्ष ने अपने गांव कलौरा तक के वोट भाजपा को डलवाए। कलौरा गांव यादव बाहुल्य है। यहां हर चुनाव में एक हजार से ज्यादा वोट सपा को पड़ता है लेकिन इस चुनाव में केवल 674 ही वोट पड़े जबकि 374 वोट भाजपा को गए।
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आरोप कोई कुछ भी लगा सकता है। मैं इन बातों पर विश्वास नहीं करता। मेरे बेटे को पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वह चुनाव नहीं लड़ा। मैंने पूरे मन से पार्टी प्रत्याशियों को लड़ाया है।
- प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष