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सहसवान : खूब लड़ी भाजपा पर सपा ने अपना गढ़ बचा लिया
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सपा- ब्रजेश यादव। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। दूसरे दलों की लाख कोशिश के बाद भी सहसवान का गढ़ सपा ने बचा ही लिया। शुरू में भाजपा ने जिस तरह तेजी पकड़ी, उससे सपा का पत्ता साफ लग रहा था। खुद सपा प्रत्याशी ब्रजेश यादव उठकर मंडी से बाहर चले गए। बाद में सपा के पक्ष में आंकड़ों का ग्राफ बढ़ने के साथ वह लौट आए। उन्होंने जीत का श्रेय जनता को दिया। वहीं हाजी बिट्टन व डीके भारद्वाज ने अपनी हार की वजह मुस्लिम वोटों का सपा के प्रति झुकाव बताया।
सहसवान सीट का इतिहास रहा है कि वहां कभी कमल नहीं खिला। भाजपा काफी कोशिश करके हार गई। इस बार भी भाजपा ने डीके भारद्वाज के रूप में ब्राह्मण चेहरा यहां उतारा था। इसके साथ ही सपा के मौजूदा विधायक ओमकार सिंह के बेटे ब्रजेश यादव मैदान में थे। सहसवान इस बार जिले की सियासत का मुख्य केंद्र इसलिए भी रहा कि पूर्व विधायक डीपी यादव ने भी अपने बेटे कुणाल को रापद से उतारा था और बिल्सी के पूर्व विधायक हाजी बिट्टन यहां बसपा से मैदान में थे।
बृहस्पतिवार को यहां चुनावी आंकड़े भी सर्वाधिक ऊपर नीचे होते रहे। सुबह बसपा ने यहां बढ़त ली तो दोपहर से शाम तक भाजपा प्रत्याशी बढ़त बनाए रहे। ऐसे में दोपहर बारह बजे ब्रजेश यादव मतगणना केंद्र से बाहर निकल गए। उनका चेहरा भी सुस्त सा था, हालांकि आत्मविश्वास से कहा कि जीत उनकी ही होगी। शाम से बाजी पलटती चली गई। भूड़ इलाके के वोट खुले तो ब्रजेश ने बाजी मार ली। शाम को ब्रजेश फिर मतगणना स्थल पर आ गए। शाम छह बजे करीब पहले हाजी बिट्टन और फिर डीके भारद्धाज मतगणना केंद्र से बाहर निकले। नंबर तीन पर रहे डीके भारद्वाज ने कहा कि उन्हें जनता ने इतने वोट दिए, उनके लिए यही काफी है। वहीं दूसरे नंबर पर रहे हाजी बिट्टन उर्फ मुसर्रत अली ने स्वीकार किया कि मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में लामबंद होने से उन्हें नुकसान हुआ, वर्ना उनकी जीत तय थी। संवाद
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सहसवान सीट का इतिहास रहा है कि वहां कभी कमल नहीं खिला। भाजपा काफी कोशिश करके हार गई। इस बार भी भाजपा ने डीके भारद्वाज के रूप में ब्राह्मण चेहरा यहां उतारा था। इसके साथ ही सपा के मौजूदा विधायक ओमकार सिंह के बेटे ब्रजेश यादव मैदान में थे। सहसवान इस बार जिले की सियासत का मुख्य केंद्र इसलिए भी रहा कि पूर्व विधायक डीपी यादव ने भी अपने बेटे कुणाल को रापद से उतारा था और बिल्सी के पूर्व विधायक हाजी बिट्टन यहां बसपा से मैदान में थे।
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बृहस्पतिवार को यहां चुनावी आंकड़े भी सर्वाधिक ऊपर नीचे होते रहे। सुबह बसपा ने यहां बढ़त ली तो दोपहर से शाम तक भाजपा प्रत्याशी बढ़त बनाए रहे। ऐसे में दोपहर बारह बजे ब्रजेश यादव मतगणना केंद्र से बाहर निकल गए। उनका चेहरा भी सुस्त सा था, हालांकि आत्मविश्वास से कहा कि जीत उनकी ही होगी। शाम से बाजी पलटती चली गई। भूड़ इलाके के वोट खुले तो ब्रजेश ने बाजी मार ली। शाम को ब्रजेश फिर मतगणना स्थल पर आ गए। शाम छह बजे करीब पहले हाजी बिट्टन और फिर डीके भारद्धाज मतगणना केंद्र से बाहर निकले। नंबर तीन पर रहे डीके भारद्वाज ने कहा कि उन्हें जनता ने इतने वोट दिए, उनके लिए यही काफी है। वहीं दूसरे नंबर पर रहे हाजी बिट्टन उर्फ मुसर्रत अली ने स्वीकार किया कि मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में लामबंद होने से उन्हें नुकसान हुआ, वर्ना उनकी जीत तय थी। संवाद
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