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महेश गुप्ता ने बदला बदायूं सीट का इतिहास, लगातार दूसरी बार जीत
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महेश गुप्ता। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। सदर सीट पर नगर विकास राज्यमंत्री महेश चंद्र गुप्ता ने जीत हासिल करके इतिहास को बदलने का काम किया है। बदायूं में लगातार दूसरी बार विधायक बनने वाले वह पहले नेता हैं। उन्होंने इसे जनता की जीत बताया। वैसे बसपा के कैडर वोट में सेंध लगाने के साथ ही नरम हिंदुत्व की उनकी छवि जीत की वजह मानी जा रही है।
बदायूं सदर विधानसभा सीट का पुराना इतिहास रहा है कि यहां एक ही विधायक लगातार दूसरा चुनाव कभी नहीं जीता। महेश गुप्ता 2017 में यहां से विधायक बनने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में प्रदेश के नगर विकास राज्यमंत्री भी बने। इस बार भी पार्टी ने उनकी छवि व काम पर भरोसा करके टिकट दिया तो उन्होंने जीजान से प्रचार किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता के साथ उन्होंने बड़ा काम बसपा कैडर को तोड़ने का किया। शीर्ष नेतृत्व स्तर से पर्याप्त सक्रियता न देखकर बसपा कैडर के कई बड़े नेता भाजपा के पाले में आ गए। इससे बसपा के वोटरों को बड़ा संदेश गया। बताते हैं कि बसपा का काफी वोट भाजपा को मिला जिससे महेश गुप्ता की जीत का रास्ता बना। बसपा प्रत्याशी राजेश कुमार सिंह का बुरी तरह पिछड़ना भी इसी वजह से हुआ कि बसपा के एक खास वर्ग के अलावा दूसरे जाति वर्ग ने उनका साथ नहीं दिया। कई मुस्लिम मोहल्लों में भी महेश गुप्ता का स्वागत कर वोट देने का जो वादा किया, उसे निभाया।
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मुंबई के उद्योगपति हाजी रईस पहले ही दांव में चित्त
सिरसौली गांव के मूल निवासी हाजी रईस कई वर्षों से मुंबई में जाकर बस गए थे। वहां वह बड़े उद्योगपति के तौर पर चर्चित हैं। इस बार सपा का टिकट आबिद रजा और काजी रिजवान की लड़ाई में झटककर उनकी झोली में आ गिरा। जिले से पहला चुनाव लड़ने वाले हाजी रईस ने काफी मशक्कत की। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी उनकी जीत के लिए काफी जोर लगाया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी बदायूं आकर हाजी रईस के समर्थन में सभा की। रईस को काफी वोट भी मिले पर वह जीत में नहीं बदल सके। तभी सपा प्रत्याशी हाजी रईस मतगणना स्थल से बाहर निकले तो कहा कि हमें इतनी बड़ी तादाद में वोट मिले, जनता ने इतना प्यार दिया यही काफी है। संवाद
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बदायूं सदर विधानसभा सीट का पुराना इतिहास रहा है कि यहां एक ही विधायक लगातार दूसरा चुनाव कभी नहीं जीता। महेश गुप्ता 2017 में यहां से विधायक बनने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में प्रदेश के नगर विकास राज्यमंत्री भी बने। इस बार भी पार्टी ने उनकी छवि व काम पर भरोसा करके टिकट दिया तो उन्होंने जीजान से प्रचार किया।
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भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता के साथ उन्होंने बड़ा काम बसपा कैडर को तोड़ने का किया। शीर्ष नेतृत्व स्तर से पर्याप्त सक्रियता न देखकर बसपा कैडर के कई बड़े नेता भाजपा के पाले में आ गए। इससे बसपा के वोटरों को बड़ा संदेश गया। बताते हैं कि बसपा का काफी वोट भाजपा को मिला जिससे महेश गुप्ता की जीत का रास्ता बना। बसपा प्रत्याशी राजेश कुमार सिंह का बुरी तरह पिछड़ना भी इसी वजह से हुआ कि बसपा के एक खास वर्ग के अलावा दूसरे जाति वर्ग ने उनका साथ नहीं दिया। कई मुस्लिम मोहल्लों में भी महेश गुप्ता का स्वागत कर वोट देने का जो वादा किया, उसे निभाया।
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मुंबई के उद्योगपति हाजी रईस पहले ही दांव में चित्त
सिरसौली गांव के मूल निवासी हाजी रईस कई वर्षों से मुंबई में जाकर बस गए थे। वहां वह बड़े उद्योगपति के तौर पर चर्चित हैं। इस बार सपा का टिकट आबिद रजा और काजी रिजवान की लड़ाई में झटककर उनकी झोली में आ गिरा। जिले से पहला चुनाव लड़ने वाले हाजी रईस ने काफी मशक्कत की। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी उनकी जीत के लिए काफी जोर लगाया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी बदायूं आकर हाजी रईस के समर्थन में सभा की। रईस को काफी वोट भी मिले पर वह जीत में नहीं बदल सके। तभी सपा प्रत्याशी हाजी रईस मतगणना स्थल से बाहर निकले तो कहा कि हमें इतनी बड़ी तादाद में वोट मिले, जनता ने इतना प्यार दिया यही काफी है। संवाद