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खुद को अनाथ महसूस कर रहे बाबा हरदेव सिंह के अनुयायी

Sun, 15 May 2016 12:15 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Sun, 15 May 2016 12:15 AM IST
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Baba Hardev Singh's followers themselves are feeling orphaned
baba
 निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह के निधन से जिले भर में उनके अनुयायी खुद को अनाथ महसूस कर रहे हैं। शहर के किनारे फर्रुखाबाद रोड स्थित संत निरंकारी मंडल भवन में इकट्ठा हुए अनुयायी  उदास नजर आए। साथ ही सोमवार को बाबा हरदेव अवतारिणिका संपूर्ण पाठ का आयोजन सुबह 10 बजे से करने का निर्णय लिया गया। 
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सत्संग भवन में मिले वृद्ध अनुयायी जैनेंद्र सक्सेना ने कहा कि बाबा की कृपा उन लोगों पर सदा रही, जिसे वह नहीं भूल सकते। वह मानवता का पाठ पढ़ाकर इंसान को इंसान के करीब लाना चाहते थे। पुष्पेंद्र कुमार बोले, भाईचारा बढ़ाने का जो जज्बा और आपसी प्रेम बाबा जी ने उन्हें सिखाया, वह सदैव जिंदा रहेगा। निरंकारी राकेश ने बताया कि वह किसी धर्म विशेष को नहीं मानते थे, वह तो मानवतावादी दृष्टिकोण रखते थे। राकेश निरंकारी कहते हैं कि वह बाबाजी के साथ बहुत रहे हैं और बाबाजी का आशीर्वाद उनके साथ हमेशा रहेगा। उनके द्वारा सिखाए गए सत्कर्म हमेशा जिंदा रहेंगे। 
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बदायूं से 25 साल पुराना नाता था बाबा हरदेव सिंह का 
- पहली बार 1991 और अंतिम बार 2015 में आए थे 

अमर उजाला ब्यूरो 
बदायूं। बाबा हरदेव सिंह का बदायूं से 25 साल पुराना नाता था। वह यहां के लोगों से 36 सालों से भी अधिक समय से जुड़े हैं। 
बाबा हरदेव के शिष्य रामपाल जी महाराज ने फर्रुखाबाद रोड पर सभी के सहयोग से संत निरंकारी मंडल भवन की स्थापना की थी तब से जिले में लगातार उनका सत्संग होता रहा। अनुयायियों के अनुरोध पर पहली बार वर्ष 1991 में वह बदायूं आए थे। तब उनका सत्संग गन्ना दफ्तर में हुआ था। जिले के अनुयायियों के साथ लगाव बढ़ा तो वह 15 मई 2001, उसके बाद 22 अप्रैल 2012 और आखिरी बार पांच अप्रैल, 2015 को जिले में आए थे। अंतिम बार जिले में वह शाहजहांपुर से लौटते वक्त रुके थे। यहां पर अपने अनुयायियों के साथ सत्संग कर उन्हें इंसानियत का पाठ भी पढ़ाया था।
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