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एआरवी के अभाव में इलाज को भटक रहे है मरीज
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बिल्सी। क्षेत्र में इन दिनों कुत्ते-बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है। पिछले कुछ माह में दर्जनों लोगों को यह अपना शिकार बना चुके हैं। ऐसी स्थिति में नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बंदर और कुत्ते के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन को नहीं लगाया जा रहा हैं। अस्पताल में पिछले लगभग तीन सप्ताह से वैक्सीन खत्म होने की बात कही जा रही है। बावजूद इसके विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
कुत्ते या बंदर के काटने पर लोग अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें दवा नहीं मिलती है। ऐसी स्थिति में कुत्ते और बंदर द्वारा काटे गए मरीजों को जिला अस्पताल या प्राइवेट क्लीनिकों पर इंजेक्शन के लिए भटकना पड़ता है। क्षेत्र के अधिकतर लोग समस्या होने पर सरकारी अस्पताल में ही पहुंचते हैं लेकिन इन लोगों को वहां यह सुविधा नहीं मिल पाती है। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा कई बार स्टोर रूम में दवाओं व इंजेक्शन की कमी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को बताया भी गया है, लेकिन दवा की आपूर्ति विभाग की तरफ से नहीं हो पा रही है। सीएचसी पर तैनात फार्मेसिस्ट पंकज कुमार ने बताया कि केंद्र पर पिछले तीन सप्ताह से अधिक दिनों से एआरवी नहीं आई है, जिसको लेकर मांग पत्र लगातार मुख्यालय स्थित स्टोर को भेजा जा रहा है लेकिन अभी तक वैक्सीन प्राप्त नहीं हुई है।
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कुत्ते या बंदर के काटने पर लोग अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें दवा नहीं मिलती है। ऐसी स्थिति में कुत्ते और बंदर द्वारा काटे गए मरीजों को जिला अस्पताल या प्राइवेट क्लीनिकों पर इंजेक्शन के लिए भटकना पड़ता है। क्षेत्र के अधिकतर लोग समस्या होने पर सरकारी अस्पताल में ही पहुंचते हैं लेकिन इन लोगों को वहां यह सुविधा नहीं मिल पाती है। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा कई बार स्टोर रूम में दवाओं व इंजेक्शन की कमी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को बताया भी गया है, लेकिन दवा की आपूर्ति विभाग की तरफ से नहीं हो पा रही है। सीएचसी पर तैनात फार्मेसिस्ट पंकज कुमार ने बताया कि केंद्र पर पिछले तीन सप्ताह से अधिक दिनों से एआरवी नहीं आई है, जिसको लेकर मांग पत्र लगातार मुख्यालय स्थित स्टोर को भेजा जा रहा है लेकिन अभी तक वैक्सीन प्राप्त नहीं हुई है।
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