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जरूरत के समय बेहद काम आती है बचत
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वजीरगंज। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत मंगलवार को एवीएस पब्लिक स्कूल में ‘घर की वित्त मंत्री भी हैं महिलाएं, खर्च पर रखें नियंत्रण’ विषय पर आर्थिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं और छात्राओं को खर्चों पर नियंत्रण करने और बचत करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। छात्राओं ने नाटकों द्वारा सभी को यह समझाने का प्रयास किया गया कि अगर हम छोटी-छोटी बचत करते हैं तो वह जरूरत के समय पर बहुत काम आती हैं।
मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक रूबल सक्सेना ने कहा कि बढ़ती महंगाई, जिम्मेदारियों और बढ़ते ख़र्चों के बीच बचत कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। व्यक्ति की आमदनी इतनी तेजी से नहीं बढ़ती, जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही है, लेकिन यदि थोड़ी-सी समझदारी से काम लेकर अपने ख़र्चों को प्लान किया जाए, तो बहुत हद तक उन पर नियंत्रण पाकर बचत कर सकते हैं। घर ख़र्च के लिए डायरी मेंटेन करें, जिसमें हर छोटे से छोटा ख़र्च भी लिखें, इससे फिजूल ख़र्चों का पता चल जाएगा, जिसे अगले महीने सुधारा जा सकेगा।
ब्लॉक प्रमुख सुमिता वार्ष्णेय ने कहा कि बचत के लिए सबसे पहले अपनी आमदनी के अनुसार बजट बनाएं। इसमें निश्चित करें कि अपने कपड़े, यात्रा, राशन एवं मनोरंजन पर आप कितने पैसे ख़र्च करेंगे और उसका पालन करें। पुराने समय में लिफ़ाफा तरीक़ा इस्तेमाल किया जाता था। हर महीने अलग-अलग लिफाफों में रकम रखकर बिजली बिल, बच्चों की फीस, राशन, शादी एवं इमरजेंसी ख़र्च लिखा जाता था। इमर्जेंसी ख़र्च की रकम दवाइयों, अचानक आई आपत्तियों या रिश्तेदारों व घरेलू शादी-समारोह के काम आती थी। यह तरीके भी बचत के मामले में काफी कारगर सिद्ध होते हैं। प्रधानाचार्या लीना गुप्ता ने कहा कि सभी को बचत का महत्व समझना चाहिए, क्योंकि छोटी-छोटी बचत अक्सर हमारे बहुत काम आती है। इस अवसर पर शशि बाला, बृजेश वार्ष्णेय, गगन उपाध्याय, गौरव वार्ष्णेय, मनु मौर्य आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन झिलमिल वार्ष्णेय ने किया।
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मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक रूबल सक्सेना ने कहा कि बढ़ती महंगाई, जिम्मेदारियों और बढ़ते ख़र्चों के बीच बचत कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। व्यक्ति की आमदनी इतनी तेजी से नहीं बढ़ती, जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही है, लेकिन यदि थोड़ी-सी समझदारी से काम लेकर अपने ख़र्चों को प्लान किया जाए, तो बहुत हद तक उन पर नियंत्रण पाकर बचत कर सकते हैं। घर ख़र्च के लिए डायरी मेंटेन करें, जिसमें हर छोटे से छोटा ख़र्च भी लिखें, इससे फिजूल ख़र्चों का पता चल जाएगा, जिसे अगले महीने सुधारा जा सकेगा।
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ब्लॉक प्रमुख सुमिता वार्ष्णेय ने कहा कि बचत के लिए सबसे पहले अपनी आमदनी के अनुसार बजट बनाएं। इसमें निश्चित करें कि अपने कपड़े, यात्रा, राशन एवं मनोरंजन पर आप कितने पैसे ख़र्च करेंगे और उसका पालन करें। पुराने समय में लिफ़ाफा तरीक़ा इस्तेमाल किया जाता था। हर महीने अलग-अलग लिफाफों में रकम रखकर बिजली बिल, बच्चों की फीस, राशन, शादी एवं इमरजेंसी ख़र्च लिखा जाता था। इमर्जेंसी ख़र्च की रकम दवाइयों, अचानक आई आपत्तियों या रिश्तेदारों व घरेलू शादी-समारोह के काम आती थी। यह तरीके भी बचत के मामले में काफी कारगर सिद्ध होते हैं। प्रधानाचार्या लीना गुप्ता ने कहा कि सभी को बचत का महत्व समझना चाहिए, क्योंकि छोटी-छोटी बचत अक्सर हमारे बहुत काम आती है। इस अवसर पर शशि बाला, बृजेश वार्ष्णेय, गगन उपाध्याय, गौरव वार्ष्णेय, मनु मौर्य आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन झिलमिल वार्ष्णेय ने किया।
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