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‘गेल’ के खिलाफ भाकियू ने खोला मोर्चा
बदायूं
Updated Wed, 14 Jan 2015 08:15 PM IST
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गेल’ अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए गैस पाइप लाइन के सहारे ऑप्टिकल
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फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाने जा रही है। नूरपुर पिनौनी में किसानों ने इसका
विरोध करते हुए मुआवजे की मांग की है। ‘गेल’ मुआवजे के मामले में पहले के
अपने अधिकारों के तहत मुआवजा देना चाहती है। इससे नाराज किसानों ने गेल का
काम बंद करा दिया है। भारतीय किसान यूनियन भी किसानोें के साथ आ गई है
जिससे किसान अपने को मजबूत समझने लगे हैं।
बीस साल पहले गेल ने गैस पाइप लाइन से इफ्को से दादरी नेशनल थर्मल पॉवर को जोड़ा था। उस समय गेल और किसानों से जो अनुबंध हुआ था। उस पूर्व अर्जित अपने अधिकार बताते हुए गेल एक फसल का 100 प्रतिशत मुआवजा देने को तैयार है। किसान अन्य जिलों की भांति चार फसलों का पूरा मुआवजा और पेड़ों का मुआवजा भी मांग रहे हैं। इस मांग को लेकर किसानों ने गेल द्वारा केबल डालने का काम बंद करा दिया है।
वहीं गेल के अधिकारियों का कहना है कि जब 20 साल पहले गैस पाइप लाइन बिछाई गई थी तो यह तय हुआ था कि पाइप लाइन के ऊपर कोई पेड़ नहीं लगाया जाएगा। किसानों ने फिर भी पेड़ लगा दिए। पेड़ गलत ढंग से लगे हैं तो इसका मुआवजा कैसा। किसान इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अब भाकियू भी किसानों के साथ मोर्चा संभाल चुकी है।
हालात यह हैं कि गेल के कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। परिणाम स्वरूप विवाद के समाधान के लिए गेल के इंजीनियर सुरेश तिवारी किसानों और भाकियू से बात करने आ रहे हैं। गेल के जीएम पार्थ जाल भी इस प्रक रण को लेकर गंभीर हैं।
प्रशासन के संपर्क में आना चाहता है गेल
अपने पूर्व अधिकारों को लेकर गेल के अधिकारियों को भरोसा था कि जिस प्रकार जिले में करनपुर तक उनका कोई विरोध नहीं हुआ। उसी तरह आगे का काम भी निर्विवाद हो जाएगा। लेकिन नूरपुर पिनौनी में आकर उनका काम लटक गया है। किसान आगे का काम नहीं करने दे रहे हैं। इस कारण गेल के अधिकारी जिले के अधिकारियों के संपर्क में आकर मामला निपटाना चाहते हैं।
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गेल द्वारा पाइप लाइन के सहारे केबल बिछाए जाने का काम लटका हुआ है। किसान विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। इंजीनियर सुरेश तिवारी बात करने आने वाले हैं। जीएम पार्थ जाल को भी इस संबंध में जानकारी हो चुकी है।
- शैलेंद्र मिश्रा, सर्किल इंचार्ज, पटवारी गेल
बीस साल पहले गेल ने गैस पाइप लाइन से इफ्को से दादरी नेशनल थर्मल पॉवर को जोड़ा था। उस समय गेल और किसानों से जो अनुबंध हुआ था। उस पूर्व अर्जित अपने अधिकार बताते हुए गेल एक फसल का 100 प्रतिशत मुआवजा देने को तैयार है। किसान अन्य जिलों की भांति चार फसलों का पूरा मुआवजा और पेड़ों का मुआवजा भी मांग रहे हैं। इस मांग को लेकर किसानों ने गेल द्वारा केबल डालने का काम बंद करा दिया है।
वहीं गेल के अधिकारियों का कहना है कि जब 20 साल पहले गैस पाइप लाइन बिछाई गई थी तो यह तय हुआ था कि पाइप लाइन के ऊपर कोई पेड़ नहीं लगाया जाएगा। किसानों ने फिर भी पेड़ लगा दिए। पेड़ गलत ढंग से लगे हैं तो इसका मुआवजा कैसा। किसान इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अब भाकियू भी किसानों के साथ मोर्चा संभाल चुकी है।
हालात यह हैं कि गेल के कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। परिणाम स्वरूप विवाद के समाधान के लिए गेल के इंजीनियर सुरेश तिवारी किसानों और भाकियू से बात करने आ रहे हैं। गेल के जीएम पार्थ जाल भी इस प्रक रण को लेकर गंभीर हैं।
प्रशासन के संपर्क में आना चाहता है गेल
अपने पूर्व अधिकारों को लेकर गेल के अधिकारियों को भरोसा था कि जिस प्रकार जिले में करनपुर तक उनका कोई विरोध नहीं हुआ। उसी तरह आगे का काम भी निर्विवाद हो जाएगा। लेकिन नूरपुर पिनौनी में आकर उनका काम लटक गया है। किसान आगे का काम नहीं करने दे रहे हैं। इस कारण गेल के अधिकारी जिले के अधिकारियों के संपर्क में आकर मामला निपटाना चाहते हैं।
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गेल द्वारा पाइप लाइन के सहारे केबल बिछाए जाने का काम लटका हुआ है। किसान विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। इंजीनियर सुरेश तिवारी बात करने आने वाले हैं। जीएम पार्थ जाल को भी इस संबंध में जानकारी हो चुकी है।
- शैलेंद्र मिश्रा, सर्किल इंचार्ज, पटवारी गेल