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Budaun News: नहीं पहुंची एंबुलेंस, ई-रिक्शा में चारपाई बांधकर घायल को लिटाकर पहुंचे अस्पताल

Sun, 10 May 2026 11:37 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2026 11:37 PM IST
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Ambulance Fails to Arrive; Injured Patient Taken to Hospital on a Cot Strapped to an E-Rickshaw
ई-रिक्शा पर चारपाई बांधकर मरीज को इलाज कराने के लिए ले जाते हुएं। स्रोत वीडियो ग्रेब
उसहैत। जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक और तस्वीर रविवार को उसहैत क्षेत्र में सामने आई। अक्टुइयां गांव में बीती रात छत से गिरकर घायल हुए युवक को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाने के लिए लिए बार-बार कॉल करने के बावजूद करीब तीन घंटे तक कोई वाहन नहीं पहुंचा। आखिरकार मजबूर परिजन ने ई-रिक्शा में चारपाई बांधी और युवक को उस पर लिटाकर उसहैत के निजी अस्पताल पहुंचे। वहां खर्चा ज्यादा बताए जाने पर वे उसे वापस घर ले गए।
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उसावां क्षेत्र के गांव सौंधेमई निवासी महेश (35 साल) पानीपत में मजदूरी करते हैं। वह इन दिनों अक्टुइयां गांव में अपनी बहन के घर आए हुए थे। परिजनों के मुताबिक रात को वह छत पर सोए थे। तड़के तीन बजे वह उठकर पानी पीने के लिए जाने लगे। नींद में होने के कारण महेश छत से गिर गए। गिरने की आवाज सुनकर परिजन जाग गए और महेश के पास पहुंचे। बुरी तरह चीखते महेश के पैर की हड्डी टूटने का अनुमान लगाते हुए परिजन ने जिला अस्पताल ले जाने के लिए 108 नंबर की एंबुलेंस सेवा पर कॉल की।
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आरोप है कि सूचना देने के बाद दो-तीन बार और कॉल की, मगर एंबुलेंस नहीं पहुंची। आर्थिक तंगी के चलते परिजन निजी वाहन का भी इंतजाम नहीं कर सके। मजबूरन उन्होंने गांव के ही श्यामलाल का ई-रिक्शा किराये पर बुलाया। उस पर चारपाई बांधकर महेश को उस पर लिटाया गया। उसी से वे करीब 12 किमी का सफर तय करके उसहैत पहुंचे।
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उसहैत के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (न्यू पीएचसी) में एक्स-रे न होने और सुबह को स्टाफ भी न होने की जानकारी परिजनों को पहले से थी। इसलिए वे महेश को निजी चिकित्सक के यहां ले गए। वहां डॉक्टर ने पैर की हड्डी टूटना बताया। जो खर्चा बताया गया, उसे जानने के बाद परिजन महेश को घर वापस ले गए। तय किया कि बाद में जिला अस्पताल ले जाएंगे।








जांच के बाद कार्रवाई का किया दावा



एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर इस्लाम सैफी ने बताया कि उसहैत क्षेत्र में तीन एंबुलेंस संचालित हैं। अगर किसी कारण से तीनों एंबुलेंस व्यस्त होती हैं तो नजदीक में जो भी एंबुलेंस होती है, वह मरीज को सहायता प्रदान करती है। सैफी ने बताया कि महेश के लिए एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंच पाई, इसकी जांच कराई जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दावा कि सामान्य स्थिति में 20 मिनट के भीतर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती है।







यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया है। इसे दिखवाते हैं आखिरकार क्या वजह रही जो एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। - डॉ. श्रीमोहन झा, सीएमओ, बदायूं
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