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Budaun News: 24 साल बाद दोषियों को मिली सजा तो पीड़ित परिवार में दौड़ी खुशी की लहर
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न्यायालय के आदेश के बाद दोषियों को जेल ले जाती पुलिस। स्रोत-वीडियोग्रैब
- फोटो : mathura
बदायूं। 12 साल पैरवी के बाद दीपेश के पिता की मौत हो गई। 2012 के बाद चाचा, भाई, बहन और मां ने कोर्ट में पैरवी शुरू की। 24 साल के बाद बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रेखा शर्मा ने 10 लोगों को आजीवन कारावास व एक को दस साल की सजा सुनाई है। सजा होने के बाद पीड़ित परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं सजा सुनते ही आरोपियों के चेहरे की रंगत उड़ गई। उनके परिवार के लोग बिलख उठे। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है।
थाना फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव सिसरिका निवासी दीपेश अपहरण कांड में पिता ग्रीश चंद्र शर्मा ने नौ दिसंबर सन् 2000 को बेटे की गुमशुदगी बिसौली थाने में दर्ज कराई थी। एक माह चार दिन के बाद दीपेश को बदायूं के मोहल्ला शिवपुरम के एक मकान से पुलिस ने बरामद किया था। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था।
आरोपी ने 18 लोगों के नाम अपहरण में शामिल होना बताए, जिसके बाद पुलिस ने अपहरण कर फिरौती मांगने की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी थी। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी कि आरोपियों ने दीपेश के घर पर डकैती की घटना को अंजाम दे डाला। इसके बाद पुलिस ने डकैती की धारा बढ़ाकर 17 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
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12 साल तक दीपेश के पिता ने पैरवी की 2012 में पिता ग्रीश चंद्र शर्मा की मौत हो गई। इसके बाद चाचा दिनेश शर्मा व मुनेश शर्मा ने पैरवी शुरू की, लेकिन दोनों चाचा पुलिस में तैनात होने की वजह से ज्यादा ध्यान नहीं दे सके। इसके बाद दीपेश की बहन व भाई ने पैरवी शुरू की।
मां कमलेश देवी भी लगातार तारीख पर आती रहीं। 24 साल के इंतजार के बाद बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रेखा शर्मा ने 10 लोगों को आजीवन कारावास व एक को दस साल की सजा सुनाई है। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है।
यह थे आरोपी
पप्पू उर्फ जाहिद, पूरन, महेश, शाहिद, राकेश कुमार पाठक, आनंद, सुभाष, सर्वेंद्र, प्रवेश, कुंवर पाल उर्फ कुंवर सिंह, पप्पू, अमरपाल, नन्हें पाठक, राधेश्याम व परमानंद, बाहर मियां, दलीप व नूर मोहम्मद आदि शामिल थे।
इनकी दौराने सुनवाई हुई मौत
आरोपी प्रवेश, राकेश पाठक, शाहिद और राधेश्याम व दिलीप की दौराने कोर्ट की सुनवाई मौत हो गई। इसके बाद पत्रावली समाप्त करा दी गई थी। वहीं एक आरोपी सर्वेंद्र की अदालत न आने की वजह से पत्रावली अलग कर दी गई।
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थाना फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव सिसरिका निवासी दीपेश अपहरण कांड में पिता ग्रीश चंद्र शर्मा ने नौ दिसंबर सन् 2000 को बेटे की गुमशुदगी बिसौली थाने में दर्ज कराई थी। एक माह चार दिन के बाद दीपेश को बदायूं के मोहल्ला शिवपुरम के एक मकान से पुलिस ने बरामद किया था। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था।
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आरोपी ने 18 लोगों के नाम अपहरण में शामिल होना बताए, जिसके बाद पुलिस ने अपहरण कर फिरौती मांगने की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी थी। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी कि आरोपियों ने दीपेश के घर पर डकैती की घटना को अंजाम दे डाला। इसके बाद पुलिस ने डकैती की धारा बढ़ाकर 17 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
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12 साल तक दीपेश के पिता ने पैरवी की 2012 में पिता ग्रीश चंद्र शर्मा की मौत हो गई। इसके बाद चाचा दिनेश शर्मा व मुनेश शर्मा ने पैरवी शुरू की, लेकिन दोनों चाचा पुलिस में तैनात होने की वजह से ज्यादा ध्यान नहीं दे सके। इसके बाद दीपेश की बहन व भाई ने पैरवी शुरू की।
मां कमलेश देवी भी लगातार तारीख पर आती रहीं। 24 साल के इंतजार के बाद बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रेखा शर्मा ने 10 लोगों को आजीवन कारावास व एक को दस साल की सजा सुनाई है। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है।
यह थे आरोपी
पप्पू उर्फ जाहिद, पूरन, महेश, शाहिद, राकेश कुमार पाठक, आनंद, सुभाष, सर्वेंद्र, प्रवेश, कुंवर पाल उर्फ कुंवर सिंह, पप्पू, अमरपाल, नन्हें पाठक, राधेश्याम व परमानंद, बाहर मियां, दलीप व नूर मोहम्मद आदि शामिल थे।
इनकी दौराने सुनवाई हुई मौत
आरोपी प्रवेश, राकेश पाठक, शाहिद और राधेश्याम व दिलीप की दौराने कोर्ट की सुनवाई मौत हो गई। इसके बाद पत्रावली समाप्त करा दी गई थी। वहीं एक आरोपी सर्वेंद्र की अदालत न आने की वजह से पत्रावली अलग कर दी गई।

न्यायालय के आदेश के बाद दोषियों को जेल ले जाती पुलिस। स्रोत-वीडियोग्रैब- फोटो : mathura