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500 के नोट से नहीं मिली दवा, महिला की मौत
ब्यूरो/बदायूं
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:34 PM IST
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500 के नोट से नहीं मिली दवा, महिला की मौत
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मेडिकल संचालक ने 500 का नोट नहीं लिया। इससे दवा मिलने में देरी हो गई और एक महिला की जान चली गई। मृतका नईमा के पति शाहिद का कहना है कि वह कई मेडिकल स्टोर्स पर गया। काफी मिन्नते करने के बाद एक मेडिकल संचालक ने 500 रुपये का नोट लेकर उसे दवा दे दी। दवा लेकर जब वह अस्पताल पहुंचा तब तक उसकी पत्नी दम तोड़ चुकी थी।
कुंवरगांव थाने के गांव यूसुफनगर निवासी शाहिद हुसैन की पत्नी नईमा (30) ने सोमवार को घर पर ही बच्चे को जन्म दिया था। इस बच्चे की मौत हो गई। मंगलवार को नईमा की तबियत भी बिगड़ गई। इस पर शाहिद ने उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। शाहिद का कहना है कि बुधवार तड़के नईमा को खून की उल्टियां होने लगीं। इसके बाद तड़के चार बजे डॉक्टर ने नईमा को देखा। कुछ दवाइयां पर्चे पर लिखकर इन्हें बाजार से लाने को कहा। उसके पास 500-500 रुपये के नोट थे। वह एक मेडिकल स्टोर पर गया। मेडिकल स्टोर स्वामी ने 500 रुपये का नोट लेने से इंकार कर दिया।
शाहिद का कहना है कि इसके बाद उसने कई मेडिकल स्टोर के चक्कर लगाए। एक मेडिकल स्टोर संचालक ने 500 रुपये का नोट लेकर उसे दवा दे दी। दवा मिलने में काफी देर हो चुकी थी। जब तक वह दवा लेकर अस्पताल पहुंचा नईमा की मौत हो चुकी थी। इसके बाद वह शव गांव ले गया। बुधवार देर शाम नईमा को दफन कर दिया गया। शाहिद के पांच साल की एक बेटी नगमा है।
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दरियादिली: रुपये निकालने को लाइन में नहीं लगने दिया
कुंवरगांव। नईमा के शव को दफन करने के लिए भी शाहिद के पास नगदी नहीं थी। उसके पास 500-500 के चार नोट थे। दोपहर को जब वह कस्बा स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा पर पहुंचा तो यहां लंबी कतारें लगी हुई थीं। अगर शाहिद लाइन में लगकर बैंक से रुपये निकालता तो उसको कम से कम तीन से चार घंटे का वक्त लगता।
लाइन में लगे लोगों को जब इस बारे में पता लगा तो उन्होंने दरियादिली दिखाते हुए शाहिद को बिना लाइन के बैंक में भेज दिया। शाहिद ने यहां बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी परेशानी के बारे में बताया तो उन्होंने भी तुरंत की औपचारिकताओं को पूरा कराने के बाद शाहिद को 10 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद शाहिद गांव पहुंचा। शाम को उसने नईमा के शव को कब्रिस्तान में दफन कर दिया। दवा मिलने में देरी से नईमा की मौत हो लेकर गांव में चर्चाओं का बाजार गरम रहा। ग्रामीण इस मसले पर आपस में बात करते हुए नजर आए।
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कुंवरगांव थाने के गांव यूसुफनगर निवासी शाहिद हुसैन की पत्नी नईमा (30) ने सोमवार को घर पर ही बच्चे को जन्म दिया था। इस बच्चे की मौत हो गई। मंगलवार को नईमा की तबियत भी बिगड़ गई। इस पर शाहिद ने उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। शाहिद का कहना है कि बुधवार तड़के नईमा को खून की उल्टियां होने लगीं। इसके बाद तड़के चार बजे डॉक्टर ने नईमा को देखा। कुछ दवाइयां पर्चे पर लिखकर इन्हें बाजार से लाने को कहा। उसके पास 500-500 रुपये के नोट थे। वह एक मेडिकल स्टोर पर गया। मेडिकल स्टोर स्वामी ने 500 रुपये का नोट लेने से इंकार कर दिया।
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शाहिद का कहना है कि इसके बाद उसने कई मेडिकल स्टोर के चक्कर लगाए। एक मेडिकल स्टोर संचालक ने 500 रुपये का नोट लेकर उसे दवा दे दी। दवा मिलने में काफी देर हो चुकी थी। जब तक वह दवा लेकर अस्पताल पहुंचा नईमा की मौत हो चुकी थी। इसके बाद वह शव गांव ले गया। बुधवार देर शाम नईमा को दफन कर दिया गया। शाहिद के पांच साल की एक बेटी नगमा है।
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दरियादिली: रुपये निकालने को लाइन में नहीं लगने दिया
कुंवरगांव। नईमा के शव को दफन करने के लिए भी शाहिद के पास नगदी नहीं थी। उसके पास 500-500 के चार नोट थे। दोपहर को जब वह कस्बा स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा पर पहुंचा तो यहां लंबी कतारें लगी हुई थीं। अगर शाहिद लाइन में लगकर बैंक से रुपये निकालता तो उसको कम से कम तीन से चार घंटे का वक्त लगता।
लाइन में लगे लोगों को जब इस बारे में पता लगा तो उन्होंने दरियादिली दिखाते हुए शाहिद को बिना लाइन के बैंक में भेज दिया। शाहिद ने यहां बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी परेशानी के बारे में बताया तो उन्होंने भी तुरंत की औपचारिकताओं को पूरा कराने के बाद शाहिद को 10 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद शाहिद गांव पहुंचा। शाम को उसने नईमा के शव को कब्रिस्तान में दफन कर दिया। दवा मिलने में देरी से नईमा की मौत हो लेकर गांव में चर्चाओं का बाजार गरम रहा। ग्रामीण इस मसले पर आपस में बात करते हुए नजर आए।