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मौसम ने बदला रंग तो सरसों हुई बदरंग
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उझानी (बदायूं)। पिछले कई दिनों में बार-बार बदल रहे मौसम के बाद सोमवार रात तेज हवा के साथ बारिश और मंगलवार दोपहर बाद हल्की बूंदाबांदी ने सरसों उत्पादकों के चेहरे की रौनक ही उड़ा डाली। करीब 60 फीसदी रकबे में सरसों अभी पकने की स्थिति में है लेकिन हवा के झोंके के साथ बारिश में फसल जमीन पर गिर गई। सबसे ज्यादा खराब स्थिति खेतों में कटी पड़ी फसल को लेकर है। उसे मौसम साफ होने के साथ धूप नहीं मिली तो दानों को सड़ने से रोका नहीं जा सकता।
सरसों उत्पादकों के लिए आफत साबित हो रहे मौसम के बदले मिजाज ने सोमवार रात किसानों को चैन की सांस नहीं लेने दी। किसान भले ही घरों में थे लेकिन उनका मन खेतों में ही डोलता रहा। रात में करीब नौ बजे से ही बारिश शुरू हो गई। साथ में तेज हवा के झोंके भी चले। मंगलवार सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो फसल को प्रभावित देख उनका हलक सूख गया। किसान महावीर सिंह ने बताया कि रात में बारिश और हवा की वजह से सरसों की फसल का करीब 30 फीसदी हिस्सा जमीन पर बिछ चुका है। हालांकि 40 फीसदी रकबे में कटाई का काम पूरा हो चुका है लेकिन उसमें 20 फीसदी फसल की अभी गहाई भी पूरी नहीं हो पाई है। जो फसल खेतों में कटी पड़ी है, उसके बुरे दिन शुरू हो गए हैं। जानकारों की मानें तो अगर एक-दो दिन ऐसा ही माहौल रहा तो उत्पादकों को काफी नुकसान होगा। फलियों के अंदर ही सरसों के दाने सड़ जाएंगे। बारिश से शिमला मिर्च के दगीले होने की आशंका बढ़ गई है। आलू को भी नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। आलू के खेतों में बारिश का पानी भरा तो वह भी चपेट में आ जाएगा। पछेती झुलसा का खतरा तो पहले से ही बना हुआ है। आलू अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक तो पहले से ही पछेती झुलसा का अलर्ट जारी कर चुके हैं।
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सिर्फ गेहूं को ही होगा फायदा
उझानी। बारिश के साथ नमी बढ़ जाने से गेहूं के लिए अच्छी खबर है। बताते हैं कि गेहूं को जो तापमान चाहिए, वह बारिश के साथ ही मिलने लगा है। बारिश की बूंदों से गेहूं की पत्तियों पर आया कार्बन भी काफी हद तक गायब हो चुका है। कृषि वैज्ञानिकों से लेकर प्रगतिशील किसान भी गेहूं से अच्छी पैदावार की संभावना व्यक्त कर चुके हैं।
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फिलहाल सरसों को नुकसान हुआ है। नुकसान का आंकलन कर पाना इस समय संभव नहीं है लेकिन अनुमान है कि बारिश में तेज हवा के दौरान गिरी सरसों की फसल से उत्पादन प्रभावित जरूर होगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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सरसों उत्पादकों के लिए आफत साबित हो रहे मौसम के बदले मिजाज ने सोमवार रात किसानों को चैन की सांस नहीं लेने दी। किसान भले ही घरों में थे लेकिन उनका मन खेतों में ही डोलता रहा। रात में करीब नौ बजे से ही बारिश शुरू हो गई। साथ में तेज हवा के झोंके भी चले। मंगलवार सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो फसल को प्रभावित देख उनका हलक सूख गया। किसान महावीर सिंह ने बताया कि रात में बारिश और हवा की वजह से सरसों की फसल का करीब 30 फीसदी हिस्सा जमीन पर बिछ चुका है। हालांकि 40 फीसदी रकबे में कटाई का काम पूरा हो चुका है लेकिन उसमें 20 फीसदी फसल की अभी गहाई भी पूरी नहीं हो पाई है। जो फसल खेतों में कटी पड़ी है, उसके बुरे दिन शुरू हो गए हैं। जानकारों की मानें तो अगर एक-दो दिन ऐसा ही माहौल रहा तो उत्पादकों को काफी नुकसान होगा। फलियों के अंदर ही सरसों के दाने सड़ जाएंगे। बारिश से शिमला मिर्च के दगीले होने की आशंका बढ़ गई है। आलू को भी नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। आलू के खेतों में बारिश का पानी भरा तो वह भी चपेट में आ जाएगा। पछेती झुलसा का खतरा तो पहले से ही बना हुआ है। आलू अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक तो पहले से ही पछेती झुलसा का अलर्ट जारी कर चुके हैं।
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सिर्फ गेहूं को ही होगा फायदा
उझानी। बारिश के साथ नमी बढ़ जाने से गेहूं के लिए अच्छी खबर है। बताते हैं कि गेहूं को जो तापमान चाहिए, वह बारिश के साथ ही मिलने लगा है। बारिश की बूंदों से गेहूं की पत्तियों पर आया कार्बन भी काफी हद तक गायब हो चुका है। कृषि वैज्ञानिकों से लेकर प्रगतिशील किसान भी गेहूं से अच्छी पैदावार की संभावना व्यक्त कर चुके हैं।
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फिलहाल सरसों को नुकसान हुआ है। नुकसान का आंकलन कर पाना इस समय संभव नहीं है लेकिन अनुमान है कि बारिश में तेज हवा के दौरान गिरी सरसों की फसल से उत्पादन प्रभावित जरूर होगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक