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दिव्यांग चक्कर काट रहें, डॉक्टर बांट रहें आश्वासन
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:51 PM IST
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दिव्यांग
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। जिले के दूरदराज क्षेत्रों से जिला अस्पताल आने वाले दिव्यांगो के प्रमाण-पत्र नहीं बन पा रहे हैं। वह दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं तो डॉक्टर उन्हें आश्वासन बांट रहे हैं। दिव्यांगो का कहना है कि सप्ताह में सिर्फ गुरुवार के दिन दिव्यांग प्रमाण पत्र बनते हैं। उस दिन भी डॉक्टर गायब रहते हैं ऐसे में उनकी दिव्यांगता की जांच नहीं हो पाती। प्रमाण-पत्र के अभाव में यात्रा करने में दिक्कत आती हैं। इसके अलावा भी कई सुविधाएं नहीं मिल पातीं। अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो पाती है।
45 वर्षीय राजेश बताते हैं कि उनके भाई का एक साल पहले सड़क हादसे में दायां हाथ कट गया था, वह भाई के साथ जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं पर प्रमाण-पत्र नहीं बन रहा, डॉक्टर और कर्मचारी उनकी सुनते नहीं हैं। पिछले कई दिनों से अस्पताल के चक्कर लगा रहे सुरेश ने बताया कि, उसके पहचान के बहुत से दिव्यांग दलालों के जरिए आसानी से प्रमाण-पत्र बनवा चुके हैं।
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जैसी रिश्वत वैसा काम
आरोप है कि जिला अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रिश्वत का खुला खेल चलता है। यही वजह है कि लंबे समय से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे दूरदराज से आने वाले दिव्यांगों का प्रमाण पत्र रुपयों के अभाव में नहीं बन पाता। पीड़ितों का आरोप है कि रुपये देने पर ही सुनवाई हो पाती है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा का कहना है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमेटी प्रमाण पत्र जारी करती है। ऐसे में रिश्वत लेने का सवाल ही नहीं उठता। अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह मेरे कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।
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45 वर्षीय राजेश बताते हैं कि उनके भाई का एक साल पहले सड़क हादसे में दायां हाथ कट गया था, वह भाई के साथ जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं पर प्रमाण-पत्र नहीं बन रहा, डॉक्टर और कर्मचारी उनकी सुनते नहीं हैं। पिछले कई दिनों से अस्पताल के चक्कर लगा रहे सुरेश ने बताया कि, उसके पहचान के बहुत से दिव्यांग दलालों के जरिए आसानी से प्रमाण-पत्र बनवा चुके हैं।
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जैसी रिश्वत वैसा काम
आरोप है कि जिला अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रिश्वत का खुला खेल चलता है। यही वजह है कि लंबे समय से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे दूरदराज से आने वाले दिव्यांगों का प्रमाण पत्र रुपयों के अभाव में नहीं बन पाता। पीड़ितों का आरोप है कि रुपये देने पर ही सुनवाई हो पाती है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा का कहना है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमेटी प्रमाण पत्र जारी करती है। ऐसे में रिश्वत लेने का सवाल ही नहीं उठता। अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह मेरे कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।
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