{"_id":"5a9fdd2f4f1c1bef7b8bb125","slug":"61520426287-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देहात के सरकारी अस्पतालों में एआरवी का गोलमाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देहात के सरकारी अस्पतालों में एआरवी का गोलमाल
Updated Wed, 07 Mar 2018 06:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो - 1
देहात के सरकारी अस्पतालों में एआरवी का गोलमाल
चार रुपये के चार पर्चों में 250 रुपये की वैक्सीन का खेल करते हैं धंधेबाज
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) वितरण के नाम पर गोलमाल किया जा रहा है। सीएमओ के यहां से भेजने के बावजूद सीएचसी और पीएचसी में वैक्सीन नहीं लगाई जाती है। नतीजा यह है कि देहात से कुत्ता काटे के मरीज बड़ी संख्या में जिला अस्पताल वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।
महीने भर पहले ही जिला अस्पताल में वैक्सीन मंगाई गई थी। लगभग उन्हीं दिनों में सीएमओ की डिमांड पर जिले भर की सीएचसी और पीएचसी के लिए वैक्सीन आई थी। जिला अस्पताल में अभी करीब दो सौ वायल बची हैं, जो तीन-चार दिन में खत्म होनी तय है। वहीं सीएमओ के अधीन ड्रग स्टोर में भी वैक्सीन लगभग खत्म होने के कगार पर है। जिला अस्पताल की वैक्सीन खर्च होने का तार्किक कारण समझ आता है। यहां जिले भर के लोग कुत्ता काटे की वैक्सीन लगवाने आते हैं। सीएचसी व पीएचसी पर पहले तो लोग वैक्सीनेशन को पहुंचते मुश्किल से पहुंचते हैं। अगर पहुंच भी जाते हैं तो सीएचसी और पीएचसी वाले वैक्सीन न होना बताकर मरीज को टरका देते हैं। ऐसे में वैक्सीन का खेल किस स्तर पर खेला जा रहा है, यह सोचने का विषय है।
एक वायल में चार लोगों को वैक्सीन लगती है। सूत्र बताते हैं कि कर्मचारियों की साठगांठ से सीएचसी-पीएचसी में एक-एक रुपये के चार पर्चे बनाकर रजिस्टर में चढ़ा दिए जाते हैं। फर्जी नामों से बने इन पर्चों के जरिए सरकारी खरीद से मरीजों को मुफ्त लगाने को आई वैक्सीन बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति वायल बेच दी जाती है। देहात में यह खेल होने की चुगली जिला अस्पताल के एआरवी कक्ष का रिकार्ड भी कर रहा है। जिला अस्पताल में 75 फीसदी मरीज एआरवी लगवाने के लिए ग्रामीण इलाकों से आते हैं। इनमें से अधिकतर को यह भी पता नहीं होता है कि उनके नजदीकी सरकारी अस्पताल में एआरवी उपलब्ध है। वहीं कुछ लोग बताते हैं कि वह संबंधित अस्पताल गए थे पर वहां से यह कहकर लौटा दिया गया कि कुत्ता काटे का इंजेक्शन जिला अस्पताल में लगता है।
विज्ञापन
--
रोज पचास वायल से ज्यादा की खपत
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 50 वायल एआरवी की खपत होती है। एक वायल में चार लोगों के हिसाब से करीब दो सौ लोगों को वैक्सीन लगाई जाती है। होली के बाद से यह आंकड़ा और बढ़ गया है। सोमवार को अस्पताल खुला तो 80 वायल वैक्सीन स्टोर से निकली। इसके बाद से 60 से 70 वायल रोज निकाली जा रही हैं।
--
सात हजार वायल का आर्डर पेंडिंग
जैम पोर्टल पर नामित केवल दो कंपनियां ही इन दिनों देश भर में एआरवी की सप्लाई कर रही हैं जिसकी वजह से सीमित संख्या में ही सप्लाई मिल पाती है। जिला अस्पताल से महाराष्ट्र की चिरान बहरीन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दो फरवरी के लिए 1050 वायल का ऑर्डर भेजा गया है। वहीं भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड को 19 जनवरी को 1920 वायल के ऑर्डर के सापेक्ष केवल एक हजार वायल की ही सप्लाई मिल पाई है। इस लिहाज से जिला अस्पताल की ओर से करीब दो हजार वायल का ऑर्डर पेंडिंग पड़ा है। वहीं सीएमओ के मेडिसिन स्टोर से करीब पांच हजार वायल का ऑर्डर कुछ समय पहले भेजा गया है। समस्या यह भी है कि अक्सर एआरवी मंगाने के ऑर्डर 45 दिन बाद बिना सप्लाई के ही कैंसिल हो जाते हैं।
----
यह है व्यवस्था
नियमानुसार जिले की 16 सीएचसी और तीन पीएचसी को एक दफा में एआरवी की पांच-पांच वायल दी जाती हैं। इनके खत्म होने पर किसी भी कार्य दिवस में दोबारा ली जा सकती हैं।
---------------
एआरवी पर्याप्त मात्रा में है। सभी एमओआईसी को खत्म होने के दो दिन पहले ही एआरवी रिसीव करने के निर्देश हैं। वैक्सीन न लगाने की शिकायत अब तक मेरे पास नहीं आई है। इसमें कोई लापरवाही करता है तो संबंधति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
विज्ञापन
देहात के सरकारी अस्पतालों में एआरवी का गोलमाल
चार रुपये के चार पर्चों में 250 रुपये की वैक्सीन का खेल करते हैं धंधेबाज
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) वितरण के नाम पर गोलमाल किया जा रहा है। सीएमओ के यहां से भेजने के बावजूद सीएचसी और पीएचसी में वैक्सीन नहीं लगाई जाती है। नतीजा यह है कि देहात से कुत्ता काटे के मरीज बड़ी संख्या में जिला अस्पताल वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।
महीने भर पहले ही जिला अस्पताल में वैक्सीन मंगाई गई थी। लगभग उन्हीं दिनों में सीएमओ की डिमांड पर जिले भर की सीएचसी और पीएचसी के लिए वैक्सीन आई थी। जिला अस्पताल में अभी करीब दो सौ वायल बची हैं, जो तीन-चार दिन में खत्म होनी तय है। वहीं सीएमओ के अधीन ड्रग स्टोर में भी वैक्सीन लगभग खत्म होने के कगार पर है। जिला अस्पताल की वैक्सीन खर्च होने का तार्किक कारण समझ आता है। यहां जिले भर के लोग कुत्ता काटे की वैक्सीन लगवाने आते हैं। सीएचसी व पीएचसी पर पहले तो लोग वैक्सीनेशन को पहुंचते मुश्किल से पहुंचते हैं। अगर पहुंच भी जाते हैं तो सीएचसी और पीएचसी वाले वैक्सीन न होना बताकर मरीज को टरका देते हैं। ऐसे में वैक्सीन का खेल किस स्तर पर खेला जा रहा है, यह सोचने का विषय है।
विज्ञापन
एक वायल में चार लोगों को वैक्सीन लगती है। सूत्र बताते हैं कि कर्मचारियों की साठगांठ से सीएचसी-पीएचसी में एक-एक रुपये के चार पर्चे बनाकर रजिस्टर में चढ़ा दिए जाते हैं। फर्जी नामों से बने इन पर्चों के जरिए सरकारी खरीद से मरीजों को मुफ्त लगाने को आई वैक्सीन बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति वायल बेच दी जाती है। देहात में यह खेल होने की चुगली जिला अस्पताल के एआरवी कक्ष का रिकार्ड भी कर रहा है। जिला अस्पताल में 75 फीसदी मरीज एआरवी लगवाने के लिए ग्रामीण इलाकों से आते हैं। इनमें से अधिकतर को यह भी पता नहीं होता है कि उनके नजदीकी सरकारी अस्पताल में एआरवी उपलब्ध है। वहीं कुछ लोग बताते हैं कि वह संबंधित अस्पताल गए थे पर वहां से यह कहकर लौटा दिया गया कि कुत्ता काटे का इंजेक्शन जिला अस्पताल में लगता है।
विज्ञापन
--
रोज पचास वायल से ज्यादा की खपत
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 50 वायल एआरवी की खपत होती है। एक वायल में चार लोगों के हिसाब से करीब दो सौ लोगों को वैक्सीन लगाई जाती है। होली के बाद से यह आंकड़ा और बढ़ गया है। सोमवार को अस्पताल खुला तो 80 वायल वैक्सीन स्टोर से निकली। इसके बाद से 60 से 70 वायल रोज निकाली जा रही हैं।
--
सात हजार वायल का आर्डर पेंडिंग
जैम पोर्टल पर नामित केवल दो कंपनियां ही इन दिनों देश भर में एआरवी की सप्लाई कर रही हैं जिसकी वजह से सीमित संख्या में ही सप्लाई मिल पाती है। जिला अस्पताल से महाराष्ट्र की चिरान बहरीन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दो फरवरी के लिए 1050 वायल का ऑर्डर भेजा गया है। वहीं भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड को 19 जनवरी को 1920 वायल के ऑर्डर के सापेक्ष केवल एक हजार वायल की ही सप्लाई मिल पाई है। इस लिहाज से जिला अस्पताल की ओर से करीब दो हजार वायल का ऑर्डर पेंडिंग पड़ा है। वहीं सीएमओ के मेडिसिन स्टोर से करीब पांच हजार वायल का ऑर्डर कुछ समय पहले भेजा गया है। समस्या यह भी है कि अक्सर एआरवी मंगाने के ऑर्डर 45 दिन बाद बिना सप्लाई के ही कैंसिल हो जाते हैं।
----
यह है व्यवस्था
नियमानुसार जिले की 16 सीएचसी और तीन पीएचसी को एक दफा में एआरवी की पांच-पांच वायल दी जाती हैं। इनके खत्म होने पर किसी भी कार्य दिवस में दोबारा ली जा सकती हैं।
---------------
एआरवी पर्याप्त मात्रा में है। सभी एमओआईसी को खत्म होने के दो दिन पहले ही एआरवी रिसीव करने के निर्देश हैं। वैक्सीन न लगाने की शिकायत अब तक मेरे पास नहीं आई है। इसमें कोई लापरवाही करता है तो संबंधति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ