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बिजलीकृत 320 गांवों का होगा सत्यापन
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:24 PM IST
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जिले में 1704 गांवों को पं. दीन दयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत बिजलीकृत कराया जाना है। इसमें अभी काम बहुत पिछड़ा हुआ है। इसके लिए जिम्मेदार बंगलौर की संस्था पेस पॉवर की एमडी पद्मजा ने बदायूं का दौरा किया। जिलाधिकारी सीपी त्रिपाठी के साथ काम की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बिजलीकरण के काम में चलरही शिथिलता पर नाराजगी जताई और कंपनी को काम की निगरानी का सही प्रबंधन करने को कहा। वहीं उन्होंने सभी 320 उन गंावों की सूची भी तलब की जिन गांवों को कंपनी बिजलीकृत घोषित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि वह प्रशासनिक टीम से इनका सत्यापन कराएंगे।
पेस पॉवर की एमडी के अलावा डीएम की बैठक में एसई मधुप श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन अशोक श्रीवास्तव, एक्सईएन अतुल अग्रवाल, डीडीओ संतोष कुमार शामिल रहे। यहां समीक्षा में पाया गया कि जिले में पं. दीन दयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत1704 गांवों का बिजलीकरण होना था। इसमें 155 गांवो का बिजलीकरण विभाग के पास था। विभाग ने अपना काम पूरा कर लिया है। पेस पॉवर को बाकी गांवों का बिजलीकरण करना था। इसमें केवल 320 गांवो का ही बिजलीकरण हो सका है। डीएम ने पेस पॉवर की एमडी से कहा कि वह निगरानी के लिए स्थानीय लोगों को सहयोगी बनाएं और उनसे प्रगति की सही जानकारी लेती रहें। निगरानी का विशेष प्रबंधन की काम प्रगति पर ला सकता है। तहसील स्तर पर बने निगरानी तंत्र पर उन्होंने उंगलियां भी उठाईं। काम की गति कम होने का एक बड़ा कारण यह भी बताया। इसके अलावा कार्ययोजना बनाकर काम किए जाने की भी सलाह दी।
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पेस पॉवर की एमडी के अलावा डीएम की बैठक में एसई मधुप श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन अशोक श्रीवास्तव, एक्सईएन अतुल अग्रवाल, डीडीओ संतोष कुमार शामिल रहे। यहां समीक्षा में पाया गया कि जिले में पं. दीन दयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत1704 गांवों का बिजलीकरण होना था। इसमें 155 गांवो का बिजलीकरण विभाग के पास था। विभाग ने अपना काम पूरा कर लिया है। पेस पॉवर को बाकी गांवों का बिजलीकरण करना था। इसमें केवल 320 गांवो का ही बिजलीकरण हो सका है। डीएम ने पेस पॉवर की एमडी से कहा कि वह निगरानी के लिए स्थानीय लोगों को सहयोगी बनाएं और उनसे प्रगति की सही जानकारी लेती रहें। निगरानी का विशेष प्रबंधन की काम प्रगति पर ला सकता है। तहसील स्तर पर बने निगरानी तंत्र पर उन्होंने उंगलियां भी उठाईं। काम की गति कम होने का एक बड़ा कारण यह भी बताया। इसके अलावा कार्ययोजना बनाकर काम किए जाने की भी सलाह दी।
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