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Budaun News: दस माह में विधिक सहायता पाकर 214 बंदियों को मिला रिहाई का अवसर
Sun, 16 Nov 2025 12:49 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sun, 16 Nov 2025 12:49 AM IST
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बदायूं। आर्थिक रूप से कमजोर और कोर्ट में पैरवी नहीं होने के कारण जेल में बंद बंदियों को विधिक सहायता के जरिए रिहाई मिल रही है। विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणली की टीम ने जेल जाकर बंदियों से संपर्क किया और कोर्ट में पैरवी की। इस विधिक सहायता से पिछले दस माह में 214 बंदियों को जेल से आजादी मिली है।
किसी व्यक्ति की एक साल से जमानत नहीं हुई थी तो कोई छह महीने से जेल में बंद था। इन पर मारपीट, दुष्कर्म, चोरी समेत अन्य तरह के आरोप थे। इन सभी बंदियों को विधिक सहायता प्रदान की गई है। चुक्कनी पुत्र छोटे को हजरतपुर व सारिफ को अलापुर पुलिस ने अलग-अलग धाराओं के मुकदमें दर्ज किए।
कोर्ट में पेश करने के बाद यह आरोपी जेल भेज दिए गए थे। आर्थिक रूप से कमजोर होनी की वजह से चुक्कनी और सारिफ कोर्ट में पैरवी नहीं कर पा रहे थे। इन्होंने विविध सहायता के लिए आवेदन किया। इसके बाद चुक्कनी की आठ माह बाद जमानत मिली। जबकि सारिफ को छह माह बाद जमानत मिल सकी है।
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विधिक सहायता रक्षा प्रणाली के सदस्य व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिव कुमारी समय- समय पर जिला जेल में जाकर जानकारी लेती रहती हैं। बंदियों की हालत और पैरवी के बारे जानकारी हासिल कर उन्हें विधि सहायता के बारे में बताती हैं। पैरवी या आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से जेल में रहना रहा है तो आप विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं जो बंदी सहमत होते हैं एक फॉर्म पर अपने हस्ताक्षर कन देते हैं फिर टीम जेल अधीक्षक को फॉर्म सौंप देती है।
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ऐसे ले सकते हैं सहायता
आर्थिक रूप से कमजोर व पैरवी न होने के कारण जिला कारागार में बंद बंदी विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली की टीम से सहायता ले सकते हैं। इसके लिए टीम से फोन नंबरः 05832-267110 तथा टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा कोर्ट परिसर में जिला विधिक सहायता केंद्र पहुंचकर भी टीम से संपर्क किया जा सकता है।
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इन लोगों को मिली विधिक सहायता
मूसाझाग थाने के गुरमोहम्मद इदरीशी, वजीरगंज थाने के नासिर,, सिविल लाइंस थाने के मंजीत, कुंवरगांव थाने के मदनलाल, उसावां थाने के नाजिम समेत 214 बंदियों को 10 माह में विधिक सहायता मिली है।
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कोट,
बंदियों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। इसलिए वह विधिक सहायता लेते हैं। कोर्ट से किसी आरोपी पर जुर्माना लगा दिया जाता है तो एनजीओ व डीएम की सहायता से मदद ली जाती है।
-देवेंद्र बाबू, डीएलएसए कार्यालय बदायूं
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किसी व्यक्ति की एक साल से जमानत नहीं हुई थी तो कोई छह महीने से जेल में बंद था। इन पर मारपीट, दुष्कर्म, चोरी समेत अन्य तरह के आरोप थे। इन सभी बंदियों को विधिक सहायता प्रदान की गई है। चुक्कनी पुत्र छोटे को हजरतपुर व सारिफ को अलापुर पुलिस ने अलग-अलग धाराओं के मुकदमें दर्ज किए।
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कोर्ट में पेश करने के बाद यह आरोपी जेल भेज दिए गए थे। आर्थिक रूप से कमजोर होनी की वजह से चुक्कनी और सारिफ कोर्ट में पैरवी नहीं कर पा रहे थे। इन्होंने विविध सहायता के लिए आवेदन किया। इसके बाद चुक्कनी की आठ माह बाद जमानत मिली। जबकि सारिफ को छह माह बाद जमानत मिल सकी है।
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विधिक सहायता रक्षा प्रणाली के सदस्य व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिव कुमारी समय- समय पर जिला जेल में जाकर जानकारी लेती रहती हैं। बंदियों की हालत और पैरवी के बारे जानकारी हासिल कर उन्हें विधि सहायता के बारे में बताती हैं। पैरवी या आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से जेल में रहना रहा है तो आप विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं जो बंदी सहमत होते हैं एक फॉर्म पर अपने हस्ताक्षर कन देते हैं फिर टीम जेल अधीक्षक को फॉर्म सौंप देती है।
ऐसे ले सकते हैं सहायता
आर्थिक रूप से कमजोर व पैरवी न होने के कारण जिला कारागार में बंद बंदी विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली की टीम से सहायता ले सकते हैं। इसके लिए टीम से फोन नंबरः 05832-267110 तथा टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा कोर्ट परिसर में जिला विधिक सहायता केंद्र पहुंचकर भी टीम से संपर्क किया जा सकता है।
इन लोगों को मिली विधिक सहायता
मूसाझाग थाने के गुरमोहम्मद इदरीशी, वजीरगंज थाने के नासिर,, सिविल लाइंस थाने के मंजीत, कुंवरगांव थाने के मदनलाल, उसावां थाने के नाजिम समेत 214 बंदियों को 10 माह में विधिक सहायता मिली है।
कोट,
बंदियों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। इसलिए वह विधिक सहायता लेते हैं। कोर्ट से किसी आरोपी पर जुर्माना लगा दिया जाता है तो एनजीओ व डीएम की सहायता से मदद ली जाती है।
-देवेंद्र बाबू, डीएलएसए कार्यालय बदायूं