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महज आठ दिन ही टिके ‘पैबंद’, अब सड़क पर फैली कंकरीट
Updated Sun, 09 Dec 2018 06:15 PM IST
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फोटो- 09 बीडीएनयूजेएचपीएच-02
महज आठ दिन ही टिके ‘पैबंद’, अब सड़क पर फैली कंकरीट
बसोमा के बंद पड़े रेल फाटक रोड पर पीडब्ल्यूडी ने कराई थी मरम्मत
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। पंजाबी कॉलोनी के लिंक रोड को जोड़ने वाले बंद पड़े बसोमा रेल फाटक की सड़क पर आठ दिन पहले मरम्मत के नाम पर लगे पैबंद धोखेबाज निकले। बजरी से कोलतार गायब तो कही बजरी फैल जाने से गड्ढे नजर आने लगे हैं। मरम्मत के नाम पर औपचारिकता पूरी कर दिए जाने से राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है।
पीडब्ल्यूडी ने आठ दिन पहले ही बसोमा रोड के गड्ढे भरने का काम पूरा किया था। करीब चार दिन तक चले मरम्मत के काम के दौरान पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने देखरेख भी की थी। उन सभी स्थानों को गड्ढा मुक्त कर दिया गया था जहां-जहां सड़क उखड़ी थी। हालांकि जिन स्थानों पर चार-छह मीटर की दूूरी पर पेस्टिंग की, वह तो कुछ हद तक सुरक्षित है लेकिन छोटे गड्ढो को भरने के बाद उसके ऊपर डाला गया कोलतार मिश्रित बजरी के पैबंद नहीं टिक पाए। मरम्मत के दौरान चश्मदीद नागरिकों में हरीओम और प्रेमपाल की माने तो पीडब्ल्यूडी कर्मियों ने पेस्टिंग करते समय गड्ढों की सफाई भी नहीं की। यहां तक कि धूल-मिट्टी को भी बाहर नहीं निकाला गया। इलाके के लोगों का यहां तक कहना है कि पीडब्ल्यूडी को ऐसा ही करना था तो सड़क की मरम्मत ही नहीं कराई जाती।
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रोड पर नहीं गुजरते हैं भारी वाहन उझानी। लिंक रोड मोड़ से बसोमा के बंद रेल फाटक तक जाने वाली सड़क पर किसानों के ट्रैक्टर और ई-रिक्शा ही गुजरते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही तो ब्राडगेज लाइन के अस्तित्व में आने के बाद से ही बंद है। पहले बसोमा तक वाहन जाते थे लेकिन फाटक बंद हो जाने के बाद इसका इस्तेमाल मार्निंग वॉक के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में होने लग गया। सड़क के पैबंद ई-रिक्शा और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से उखड़ गए, यह पीडब्ल्यूडी के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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महज आठ दिन ही टिके ‘पैबंद’, अब सड़क पर फैली कंकरीट
बसोमा के बंद पड़े रेल फाटक रोड पर पीडब्ल्यूडी ने कराई थी मरम्मत
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। पंजाबी कॉलोनी के लिंक रोड को जोड़ने वाले बंद पड़े बसोमा रेल फाटक की सड़क पर आठ दिन पहले मरम्मत के नाम पर लगे पैबंद धोखेबाज निकले। बजरी से कोलतार गायब तो कही बजरी फैल जाने से गड्ढे नजर आने लगे हैं। मरम्मत के नाम पर औपचारिकता पूरी कर दिए जाने से राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है।
पीडब्ल्यूडी ने आठ दिन पहले ही बसोमा रोड के गड्ढे भरने का काम पूरा किया था। करीब चार दिन तक चले मरम्मत के काम के दौरान पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने देखरेख भी की थी। उन सभी स्थानों को गड्ढा मुक्त कर दिया गया था जहां-जहां सड़क उखड़ी थी। हालांकि जिन स्थानों पर चार-छह मीटर की दूूरी पर पेस्टिंग की, वह तो कुछ हद तक सुरक्षित है लेकिन छोटे गड्ढो को भरने के बाद उसके ऊपर डाला गया कोलतार मिश्रित बजरी के पैबंद नहीं टिक पाए। मरम्मत के दौरान चश्मदीद नागरिकों में हरीओम और प्रेमपाल की माने तो पीडब्ल्यूडी कर्मियों ने पेस्टिंग करते समय गड्ढों की सफाई भी नहीं की। यहां तक कि धूल-मिट्टी को भी बाहर नहीं निकाला गया। इलाके के लोगों का यहां तक कहना है कि पीडब्ल्यूडी को ऐसा ही करना था तो सड़क की मरम्मत ही नहीं कराई जाती।
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रोड पर नहीं गुजरते हैं भारी वाहन उझानी। लिंक रोड मोड़ से बसोमा के बंद रेल फाटक तक जाने वाली सड़क पर किसानों के ट्रैक्टर और ई-रिक्शा ही गुजरते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही तो ब्राडगेज लाइन के अस्तित्व में आने के बाद से ही बंद है। पहले बसोमा तक वाहन जाते थे लेकिन फाटक बंद हो जाने के बाद इसका इस्तेमाल मार्निंग वॉक के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में होने लग गया। सड़क के पैबंद ई-रिक्शा और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से उखड़ गए, यह पीडब्ल्यूडी के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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