{"_id":"5b4e211b4f1c1b45748b56e3","slug":"171531846939-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयुर्वेदिक अस्पताल में लिखी जाती हैं बाहर की दवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयुर्वेदिक अस्पताल में लिखी जाती हैं बाहर की दवाएं
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयुर्वेदिक अस्पताल में लिखी जाती हैं बाहर की दवाएं
एमआर को मिलती है तरजीह, मरीजों को देखने की नहीं होती डॉक्टर को फुर्सत
जमकर हुआ हंगामा, किसी तरह मरीज और तीमारदारों को किया गया शांत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। शासन भले ही कितने आदेश करे, लेकिन क्या मजाल है जो डॉक्टर उस पर अमल करें। आदत से मजबूर डॉक्टरों को मरीजों की नहीं बल्कि अपनी चिंता रहती है। यही कारण है कि एमआर को तरजीह मिलती है और बाहर की दवाएं भी लिखी जाती हैं। इसी मुद्दे को लेकर यहां जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। बाद में किसी तरह हंगामा करने वालों को शांत किया गया।
यह वाकया करीब 12.30 बजे का है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों की संख्या अच्छी खासी थी। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सभी मरीजों के पर्चे अपने पास जमा कर लिए और उन्हें बाहर बैठने को कह दिया। इसी बीच एक एमआर पहुंचा। डॉक्टर एमआर से बातचीत में व्यस्त हो गए। जो भी मरीज आया उससे पर्चा लेकर अपने पास रखते गए। इस पर मरीज और उनके तीमारदार उखड़ गए और हंगामा करने लगे। युवा मंच संगठन के पदाधिकारियों को जब जानकारी हुई तो वे भी वहां पहुंच गए। संरक्षक ध्रुवदेव गुप्ता ने डॉक्टर से जब बात की तो वह इधर-उधर देखने लगे। ध्रुवदेव ने कहा कि उनके समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर एमआर का अस्पताल में क्या काम। यह सरासर शासन के आदेश के विपरीत है। काफी देर हंगामा होने पर अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह युवा मंच के पदाधिकारियों और मरीज, तीमारदारों को समझाकर शांत कराया। मरीजों और तीमारदारों का आरोप था कि यहां हमेशा ऐसे ही एमआर को न सिर्फ तरजीह दी जाती है बल्कि दवाएं भी बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
विज्ञापन
एमआर को मिलती है तरजीह, मरीजों को देखने की नहीं होती डॉक्टर को फुर्सत
जमकर हुआ हंगामा, किसी तरह मरीज और तीमारदारों को किया गया शांत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। शासन भले ही कितने आदेश करे, लेकिन क्या मजाल है जो डॉक्टर उस पर अमल करें। आदत से मजबूर डॉक्टरों को मरीजों की नहीं बल्कि अपनी चिंता रहती है। यही कारण है कि एमआर को तरजीह मिलती है और बाहर की दवाएं भी लिखी जाती हैं। इसी मुद्दे को लेकर यहां जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। बाद में किसी तरह हंगामा करने वालों को शांत किया गया।
यह वाकया करीब 12.30 बजे का है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों की संख्या अच्छी खासी थी। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सभी मरीजों के पर्चे अपने पास जमा कर लिए और उन्हें बाहर बैठने को कह दिया। इसी बीच एक एमआर पहुंचा। डॉक्टर एमआर से बातचीत में व्यस्त हो गए। जो भी मरीज आया उससे पर्चा लेकर अपने पास रखते गए। इस पर मरीज और उनके तीमारदार उखड़ गए और हंगामा करने लगे। युवा मंच संगठन के पदाधिकारियों को जब जानकारी हुई तो वे भी वहां पहुंच गए। संरक्षक ध्रुवदेव गुप्ता ने डॉक्टर से जब बात की तो वह इधर-उधर देखने लगे। ध्रुवदेव ने कहा कि उनके समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर एमआर का अस्पताल में क्या काम। यह सरासर शासन के आदेश के विपरीत है। काफी देर हंगामा होने पर अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह युवा मंच के पदाधिकारियों और मरीज, तीमारदारों को समझाकर शांत कराया। मरीजों और तीमारदारों का आरोप था कि यहां हमेशा ऐसे ही एमआर को न सिर्फ तरजीह दी जाती है बल्कि दवाएं भी बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
विज्ञापन