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डेढ़ माह पहले मां से जुदा वंश पहुंचा अपने घर
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:59 PM IST
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बदायू। डेढ़ माह पहले अपने घर वालों से जुदा आठ साल का वंश बुधवार को अपनी मां के पास बरेली पहुंच गया। वह थाना सुभाषनगर क्षेत्र का रहने वाला है। बालक के बताए गए पते पर बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी उसे बरेली ले गए। बेटे को देख मां ने उसे गले से लगा लिया। उसके खुशी के आंसू रुक नहीं रहे थे।
करीब डेढ़ माह पहले वंश नामक बालक घर वालों से जुदा होकर यहां पहुंच गया था। हालांकि बालक का कहना था कि उसे एक व्यक्ति लेकर आया था जो रेलवे स्टेशन पर छोड़ गया। बाल कल्याण समिति ने उसे देखरेख के लिए चंदौसी रोड स्थित बाल सुधार गृह में भिजवा दिया था। बाल सुधार गृह के बाल अधिकारी गोपाल वार्ष्णेय ने बताया कि बालक वंश के बताए गए पते पर उसे वह बुधवार की सुबह वह बरेली ले गए। सबसे पहले उन्होंने चौपला पर वंश के माता-पिता के बारे में कई लोगों से जानकारी ली मगर कुछ पता नहीं चला। बाद में थाना सुभाषनगर क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर हाथी खाना गए। जहां लोगों ने वंश को पहचान लिया। लोगों ने बताया कि इसकी मां अलका बेहद गरीब है और वह ट्रेनों में फल आदि बेचकर गुजारा करती है।
बाल अधिकारी गोपाल वार्ष्णेय ने बताया कि उन्होंने अलका के मोबाइल पर फोन किया तो पता चला कि वह फल बेचती हुई मुरादाबाद पहुंच गई है। दोपहर को वह बरेली लौटी। बेटे को देख उन्होंने गले से लगा लिया और खुशी से आंखे भर आईं। गोपाल ने बताया कि वंश के पिता रंजीत यादव दिल्ली में पल्लेदारी करते हैं, बरेली में इसकी मां अलका का मायका है। वंश को दिल्ली से ही कोई व्यक्ति ले आया था, जिसकी वजह से वह बरेली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखता है। ननिहाल के बारे में कुछ क्लू दिए जाने पर वह बालक को लेकर बरेली गए थे। मां अलका ने बाल सुधार कल्याण समिति के पदाधिकारियों का आभार जताया। इधर, यह भी बता दें कि पिछले दिनों अमर उजाला ने भी वंश के दिल्ली से लापता होकर यहां पहुंचने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाल कल्याण समिति और वंश की मां ने अमर उजाला का भी धन्यवाद दिया।
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करीब डेढ़ माह पहले वंश नामक बालक घर वालों से जुदा होकर यहां पहुंच गया था। हालांकि बालक का कहना था कि उसे एक व्यक्ति लेकर आया था जो रेलवे स्टेशन पर छोड़ गया। बाल कल्याण समिति ने उसे देखरेख के लिए चंदौसी रोड स्थित बाल सुधार गृह में भिजवा दिया था। बाल सुधार गृह के बाल अधिकारी गोपाल वार्ष्णेय ने बताया कि बालक वंश के बताए गए पते पर उसे वह बुधवार की सुबह वह बरेली ले गए। सबसे पहले उन्होंने चौपला पर वंश के माता-पिता के बारे में कई लोगों से जानकारी ली मगर कुछ पता नहीं चला। बाद में थाना सुभाषनगर क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर हाथी खाना गए। जहां लोगों ने वंश को पहचान लिया। लोगों ने बताया कि इसकी मां अलका बेहद गरीब है और वह ट्रेनों में फल आदि बेचकर गुजारा करती है।
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बाल अधिकारी गोपाल वार्ष्णेय ने बताया कि उन्होंने अलका के मोबाइल पर फोन किया तो पता चला कि वह फल बेचती हुई मुरादाबाद पहुंच गई है। दोपहर को वह बरेली लौटी। बेटे को देख उन्होंने गले से लगा लिया और खुशी से आंखे भर आईं। गोपाल ने बताया कि वंश के पिता रंजीत यादव दिल्ली में पल्लेदारी करते हैं, बरेली में इसकी मां अलका का मायका है। वंश को दिल्ली से ही कोई व्यक्ति ले आया था, जिसकी वजह से वह बरेली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखता है। ननिहाल के बारे में कुछ क्लू दिए जाने पर वह बालक को लेकर बरेली गए थे। मां अलका ने बाल सुधार कल्याण समिति के पदाधिकारियों का आभार जताया। इधर, यह भी बता दें कि पिछले दिनों अमर उजाला ने भी वंश के दिल्ली से लापता होकर यहां पहुंचने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाल कल्याण समिति और वंश की मां ने अमर उजाला का भी धन्यवाद दिया।
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