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गेहूं के आए ‘अच्छे दिन’... सरसों पर संकट के बादल
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उझानी (बदायूं)। तीन-चार दिन से लगातार आसमान में मंडरा रहे काले बादल कभी बारिश के रूप में आफत बने हैं तो कभी बूंदाबांदी के दौरान तेज हवा के झोंके सरसों की फसल को चपेट में ले रहे हैं। दिक्कत तो उन खेतों में ज्यादा है, जहां फसल पककर तैयार हो गई है। आंधी-बारिश ने एक तो पहले ही सरसों को करीब 20 फीसदी नुकसान पहुंचा दिया, उसके ऊपर शुक्रवार को फिर बारिश पड़ी तो फलियों के अंदर दाने सड़ने की आशंका भी बढ़ गई है लेकिन गेहूं किसानों के लिए खुशखबरी है। उनके लिए ये मौसम ‘अच्छे दिन’ लेकर आया है।
इन दिनों में जब भी बारिश होती है तो ओले गिरने की आंशका बढ़ जाती है। पहाड़ी इलाकों में ओलावृष्टि हो चुकी है। खेत-खलिहान के जानकारों की माने तो यही समय होता है जब ओलावृष्टि सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। खेतों में पककर तैयार फसल पर ओलों की हल्की सी बौछार भी बढ़ गई तो फलियां फूट जाएंगी और दाने बिखरकर जमीन पर नजर आएंगे। जल्दबाजी में फसल को काटा भी नहीं जा सकता। गहाई तो तभी होगी जब नमी का माहौल कम हो। कटी पड़ी फसल को बारिश नुकसान ही पहुंचाएगी।
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फायदे में सिर्फ गेहूं, आलू को भी नुकसान की आशंका
उझानी। शुक्रवार सुबह से लेकर दोपहर तक बारिश ने आलू के खेतों में प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। पानी हालांकि इतना ज्यादा नहीं है जो आलू को सड़ने के कगार पर पहुंचा सके लेकिन अगर एक-दो दिन में फिर बूंदाबांदी हुई तो फसल पर पीलापन छाते ही आलू की बढ़वार थम जाएगी। हां, बारिश से अगर किसी फसल को फायदा है तो वह गेहूं है। गेहूं के लिए बारिश ने संजीवनी का काम किया है।
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फिलहाल सरसों की फसल को लेकर नुकसान की आशंका बनी हुई है। आसमान में अभी भी बादल मंडरा रहे हैं, वह कब बरस जाएं, कहा नहीं जा सकता। फिर भी गेहूं की फसल के अच्छे दिन शुरू हो गए हैं।
- डॉ. एसबी सिंह, प्रभारी, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र
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इन दिनों में जब भी बारिश होती है तो ओले गिरने की आंशका बढ़ जाती है। पहाड़ी इलाकों में ओलावृष्टि हो चुकी है। खेत-खलिहान के जानकारों की माने तो यही समय होता है जब ओलावृष्टि सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। खेतों में पककर तैयार फसल पर ओलों की हल्की सी बौछार भी बढ़ गई तो फलियां फूट जाएंगी और दाने बिखरकर जमीन पर नजर आएंगे। जल्दबाजी में फसल को काटा भी नहीं जा सकता। गहाई तो तभी होगी जब नमी का माहौल कम हो। कटी पड़ी फसल को बारिश नुकसान ही पहुंचाएगी।
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फायदे में सिर्फ गेहूं, आलू को भी नुकसान की आशंका
उझानी। शुक्रवार सुबह से लेकर दोपहर तक बारिश ने आलू के खेतों में प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। पानी हालांकि इतना ज्यादा नहीं है जो आलू को सड़ने के कगार पर पहुंचा सके लेकिन अगर एक-दो दिन में फिर बूंदाबांदी हुई तो फसल पर पीलापन छाते ही आलू की बढ़वार थम जाएगी। हां, बारिश से अगर किसी फसल को फायदा है तो वह गेहूं है। गेहूं के लिए बारिश ने संजीवनी का काम किया है।
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फिलहाल सरसों की फसल को लेकर नुकसान की आशंका बनी हुई है। आसमान में अभी भी बादल मंडरा रहे हैं, वह कब बरस जाएं, कहा नहीं जा सकता। फिर भी गेहूं की फसल के अच्छे दिन शुरू हो गए हैं।
- डॉ. एसबी सिंह, प्रभारी, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र