फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   तीन तलाक: शरीयत को ध्यान में रखकर बनाया जाए कानून

तीन तलाक: शरीयत को ध्यान में रखकर बनाया जाए कानून

Tue, 22 Aug 2017 11:47 PM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
तीन तलाक: शरीयत को ध्यान में रखकर बनाया जाए कानून

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। तीन तलाक पर मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुस्लिम धर्म के बुद्धिजीवी वर्ग और धर्म गुरुओं ने सम्मान किया है। इसके साथ यह भी कहा है कि अगर अगर इस पर कानून बनाया जाए तो तो वह शरीयत के मुताबिक होना चाहिए। मुस्लिम पर्सनल लॉ और संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। गुस्से या शराब के नशे में तीन तलाक को महिला वर्ग ने गलत बताया है।
-----------

शरीयत में हर हल मौजूद
शरीयत और कुरान शरीफ में हर समस्या का हल मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। अब सरकार को इस पर कानून बनाना है। सरकार को चाहिए कि पर्सनल लॉ का ध्यान रखा जाए।
विज्ञापन

-डॉ. संजीदा आलम
-------
धार्मिक स्वतंत्रता का ध्यान रखा जाए
संविधान ने सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। सरकार को चाहिए कि तीन तलाक पर कानून बनाते वक्त धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का ध्यान रखे।
विज्ञापन
विज्ञापन

-नुशरत जुबैर
--------
सभी धर्मों में अपनी-अपनी मान्यताएं
संविधान ने सभी धर्मों के लोगों के धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। संविधान और सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च हैं। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कानून बनाना है। इसमें सभी पक्षों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
-मुजम्मिल जहां
--------
पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान के साथ
भारत में मजहब के मुताबिक सभी को स्वतंत्रता प्राप्त है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान के साथ है। तीन तलाक पर कानून शरीयत और धार्मिक स्वतंत्रता को देखते हुए बनाना चाहिए। कोर्ट के फैसले पर कोई ऐतराज नहीं है।
-डॉ. राबिया शकील
-----
मुस्लिम धर्म गुरु की बात
सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। मुस्लिम धर्म में गुस्से में या शराब के नशे में तीन तलाक को जायज नहीं माना गया है। एक दम किसी महिला को तीन तलाक देना ठीक नहीं। अब तीन तलाक पर सरकार को कानून बनाना है। जरूरी है कि धार्मिक स्वतंत्रता के साथ शरीयत और पर्सनल लॉ को ध्यान में रखते हुए कानून बनाया जाना चाहिए।

- कारी शुएब साहब, धर्म गुरु
------
बुद्धिजीवी कोर्ट के फैसले के साथ
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उंगली नहीं उठाई जानी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है वह स्वागत के योग्य है। हिंदुस्तान में सभी धर्मों के लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। ऐसे में सरकार को तीन तलाक पर कानून बनाते वक्त शरीयत और पर्सनल लॉ का ध्यान रखना चाहिए। इस पर राजनीतिक नहीं होनी चाहिए।
-डॉ. नुसरत हुसैन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed