सुलग रही बीजेपी, कई हैं मौके की तलाश में
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डा. मुरली मनोहर जोशी और लालजी टंडन जैसे वरिष्ठ नेताओं ने तो सार्वजनिक तौर पर नाराजगी प्रकट कर अपनी मन की बात सामने रख दी है। लेकिन भाजपा खासतौर पर उत्तर प्रदेश में अभी और भी कई ‘जोशी व टंडन’ हैं, जो मौके की तलाश में हैं।
इनकी एक ही आम शिकायत है कि प्रत्याशी चयन में इस बार उनकी भागीदारी क्यों नहीं है। आशंका है कि प्रत्याशियों की सूची जारी होने पर उत्तर प्रदेश में दबी चिंगारी कही तेजी से सुलगने न लगे।
उत्तराखंड में तो बगावती सुर सुनाई भी देने लगे हैं। बच्ची सिंह रावत के बाद अब मोहन सिंह गांववासी जैसे कई वरिष्ठ नेता टिकटों को लेकर विद्रोही तेवर दिखाने लगे हैं। उत्तर प्रदेश का मामला तो और भी जटिल है। इसलिए भाजपा नेतृत्व भी बगावत को लेकर आशंकित है।
टिकट को लेकर मारामारी
दरअसल, नरेंद्र मोदी की लहर में छोटे नेता भी प्रत्याशी बनना चाहते हैं। इसलिए टिकटों को लेकर ज्यादा मारामारी है। जबकि प्रत्याशी चयन को लेकर इस बार अब तक निचले स्तर के नेताओं-कार्यकर्ताओं से राय तक नहीं ली गई है।
मोदी के करीबी अमित शाह को प्रदेश की कमान सौंपने के बाद से ही सभी कुछ केंद्रीय स्तर से तय हो रहा है। प्रत्याशी चयन को लेकर पहले की परंपरा इस बार नहीं दोहराई गई। इस मामले में कार्यकर्ता और नेतृत्व का संपर्क लगभग कटा हुआ है।
बढ़ रही है बगावत
पहले संगठन मंत्री भी निचले स्तर के कार्यकर्ताओं से भी प्रत्याशियों को लेकर राय जान लेते थे। हालात यह है कि भाजपा में टिकटों को लेकर होने वाले विद्रोह या नाराजगी को दबाने को प्रदेशों के लिए नेताओं की टीम अब तक नहीं बन पाई है।
इधर, पार्टी नेतृत्व जिस तरह से भाजपा को कोसने वाले बाहरी लोगों को भी गले लगा रहा है, उससे भी नाराजगी बढ़ रही है।
भाजपा नेतृत्व भी मान रहा है कि जो वरिष्ठ नेता अब तक नाराज कार्यकर्ताओं को समझाया करते थे, अब वे खुद ही बगावती तेवर दिखा रहे हैं। इससे दूसरे नेताओं-कार्यकर्ताओं के भी बागी तेवर अपनाने की आशंका ज्यादा है।