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‘मोदी v/s आडवाणी’ से मिशन यूपी पर असर पड़ना तय
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
Updated Sun, 09 Jun 2013 02:03 AM IST
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हिंदुत्व के फायरब्रांड नेताओं का गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से किनारा करने से मिशन 2014 में हिंदुत्व और विकास के सहारे चुनावी वैतरणी में उतरने की भाजपा की रणनीति पर पलीता लग सकता है।
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खासतौर से ‘मोदी बनाम आडवाणी’ की लड़ाई का खामियाजा पार्टी को राजनीतिक रूप से सबसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में भुगतना पड़ सकता है।
इसके अलावा मोदी के सवाल पर पूरी तरह से दो खेमों में बंट चुकी भाजपा को अन्य राज्यों में भी एकजुटता की कमी का नुकसान उठाना पड़ेगा।
मोदी की ताजपोशी की संभावना से न केवल हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेता नाराज हैं, बल्कि राज्यों और केंद्रीय स्तर के आडवाणी समर्थक नेताओं के विद्रोही तेवर निकट भविष्य में देखने को मिल सकते हैं।
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जहां तक उत्तर प्रदेश की बात थी तो पार्टी ने इस सूबे में अपनी हालत में सुधार के लिए विशुद्ध रूप से हिंदुत्व कार्ड खेलने का मन बनाया था।
इसके लिए मोदी को चेहरा बनाने तथा उनकी सहायता के लिए उमा भारती, योगी आदित्यनाथ, वरुण गांधी और अमित शाह जैसे हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेताओं की टीम तैयार की गई थी।
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इनमें मोदी का दाहिना हाथ माने जाने वाले शाह को राज्य का प्रभार देकर पार्टी नेतृत्व ने अपने इरादे भी साफ कर दिए थे। मगर ‘मोदी बनाम आडवाणी’ की जंग ने स्थिति पलट दी है।
एकमात्र शाह को छोड़ कर बाकी तीन प्रमुख हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेताओं ने मोदी से दूरी बढ़ा ली है। उल्लेखनीय है कि गोवा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से दूरी बनाने वालों में उमा, योगी और वरुण भी शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य में वरुण सहित अन्य नेताओं का प्रभाव बढ़ाने से विनय कटियार, कलराज मिश्र, लालजी टंडन जैसे आधा दर्जन नेता पहले से ही खार खाए बैठे हैं।
पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि ‘मोदी बनाम आडवाणी’ की लड़ाई का प्रतिकूल असर उन राज्यों पर भी पड़ेगा, जहां आडवाणी समर्थक नेताओं की पौबारह है।
मसलन गोवा से दूरी दिखाने वालों में कभी मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की बढ़ चढ़ कर मांग करने वालों में शामिल वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा भी शामिल हैं।
सिन्हा ने यह कह कर कि उन्हें ‘नमो-निया’ नहीं हुआ है और वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं, एक तरह से आलाकमान को कार्रवाई की खुली चुनौती भी दे डाली।
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मोदी से अदावत किसी से छिपी नहीं है।