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महाकुंभ: काली कमलिया पर चढ़ो न दूजो रंग
इलाहाबाद/अनिल सिद्धार्थ
Updated Wed, 02 Jan 2013 11:14 AM IST
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‘पता क्या खाक बताएं, निशां, बेनिशां अपना
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जहां चादर बिछा बैठे, समझो मकां अपना’
पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत डॉ. बिंदु महराज ‘बिंदु’ सचमुच अपना मकां तलाशने के लिए संगम की रेती पर चादर बिछा बैठे हैं। महाकुंभ में साधुओं की अपनी अलग वेशभूषा, दर्शन और विचार के बीच काली कमली वाले बिंदु बाबा सभी के आकर्षण का केंद्र बने हैं।
काला लबादा और काली अचकन पहनने वाले डॉ. बिंदु के गुरु महंत महेश्वरदास ने चालीस साल पहले जिन जटाओं को गूंथने का सलीका सिखाया था, वह आज साढ़े सात फीट लंबी हो चुकी हैं। ग्रह और रत्नों के मुताबिक उन्होंने दसों अंगुलियों में सोने, चांदी और त्रिधातु में मढ़ी भारी भरकम अंगूठियां और गले में हाथी दांत, शेर के नाखून, मोतियों, रुद्राक्ष वाली अलग-अलग आधा दर्जन मालाएं पहन रखी हैं।
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बिंदु चार दशक पहले इलाहाबाद के एक छोटे से गांव से अचानक गुम हुए थे। मन की शांति की खोज में जाने कहां-कहां की खाक छानी। साधना की सीढ़ियां चढ़ते हुए वह बड़ा उदासीन की जमात में शामिल हुए और फिर कई जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए हैदराबाद की मुख्य गद्दी के महंत बने। इस बीच उन्होंने वाराणसी और अहमदनगर से आयुर्वेद में एमडी की उपाधि भी हासिल की।
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हाथ में दो फीट का रत्न जड़ित कपालदंड और माथे पर तांत्रिक तिलक लगाए बाबा बिंदु कहते हैं, 'रत्न और मालाओं को धारण करने का उद्देश्य जनकल्याण से धनात्मक ऊर्जा लेना और ऋणात्मक ऊर्जा निकालना है। मैंने साधना के श्वेत, पीत और लाल वस्त्रों की मर्यादा के साथ संन्यास के सभी स्तरों को पार करके ही काली कमलिया पहनी है, अब तो इस पर चढ़ो न दूजो रंग।’
अलग-अलग अंगूठियां
दाएं हाथ की अंगुलियों में सोने, चांदी में मढ़ा म्यांमार का 35 कैरेट का माणिक, 350 कैरेट का नेपाली मूंगा, 65 कैरेट का गोमेद, 40 कैरेट का पुखराज, 45 कैरेट की तीन मोतियों की अंगूठियां। बाएं हाथ में 40 कैरेट का पन्ना, 12-12 कैरेट के दो माणिक के बीच 15 कैरेट का मूंगा, 80 कैरेट का कश्मीरी नीलम, लहसुनिया, कपालयंत्र की अंगूठियां
गले में मालाएं
:- रुद्राक्ष, शेर दांत की मालाएं
:- चांदी से जड़ित मोतियों की माला
:- एक से 21 मुखी 108 रुद्राक्षों की माला
:- लामा पद्धति के यंत्र सहित स्फटिक की माला
:- हाथी दांत, शेर के नाखून वाली महाशंख की मुंडमाल
:- गौरीशंकर, गणपति सहित चौदह मुखी रुद्राक्ष तक की माला
:- सिंह, बराह, मगर दांत सहित 54 पंचमुखी रुद्राक्षों का कंठा