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अपने हुए पराए, गैरों ने निभाया साथ
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अपने हुए पराए, गैरों ने निभाया साथ
बिजनौर। अपने पराए हो गए और गैरों ने संग आकर साथ निभा दिया। जी हां, जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में कुछ ऐसा ही हुआ। विरोधी पक्ष के सदस्यों ने अंतिम समय समर्थन दे दिया, जबकि पक्ष वाले सात सदस्य गायब हो गए। बैठक में कोरम पूरा करना ही शक्ति प्रदर्शन बन गया। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, विपक्ष के सदस्यों को साथ लाकर कोरम पूरा करने में सफल रहे। बैठक करते हुए जिला पंचायत बोर्ड ने जिला विकास योजना का अनुमोदन किया।
सोमवार को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक हुई। यह बैठक दूसरी बार हुई जो कि सफल भी रही है। बता दें कि दस जून को भी जिला पंचायत की बैठक हुई थी, जिसमें सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने की वजह से स्थगित कर दिया गया था। अब दूसरी बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा नेताओं का खेमा जिला पंचायत अध्यक्ष के विरोध में उतर आया है। जोकि सदस्यों को अपने पक्ष में जुटा हुआ है। इसी वजह से पहली बैठक से तमाम सदस्य गायब रहे थे। ऐसे में बैठक का कोरम पूरा करना काफी मुश्किल लग रहा था।
जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह के पक्ष वाले कुछ सदस्य बागी हो गए। सात सदस्य जोकि भाजपाई है, वे भी सोमवार को हुई बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष के समर्थन में विरोधी गुट में रहने वाले सदस्य आए और बैठक में शामिल हुए। भाकियू के भी सदस्यों ने बैठक में पहुंचकर कोरम को पूरा कराया। बोर्ड की बैठक में जिला विकास योजना 2022-23 का जिला पंचायत बोर्ड ने अनुमोदन किया। इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक में कहा कि जो उनके पक्ष में आए हैं, उनके कार्य वरीयता से कराए जाएंगे।
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कभी विरोधी गुट में रहने वाले मोहम्मद रफी ने कहा कि जब अध्यक्ष का चुनाव हुआ तो हम किसी मजबूरी या कारणवश दूर हो गए। लेकिन अध्यक्ष तो आप पूरे बोर्ड के हैं, अब हमें साथ आने का मौका मिला है। जिला पंचायत सदस्य डॉ रफत ने कहा कि मैं तो नींव का पत्थर हूं, लोग कुछ भी कहते रहें, मैं साथ था, साथ हूं और साथ रहूंगा। पिछली बैठक में बीमारी के चलते नहीं आ पाया और लोगों ने यह कह दिया कि मैने निष्ठा बदल ली है।
32 सदस्य हुए शामिल
सोमवार को हुई बैठक में जिला पंचायत के 32 सदस्य शामिल हुए। हालांकि 11 सदस्य भाजपा के हैं, जिनमें सात बैठक में नहीं पहुंचे। जिला पंचायत में कुल 57 सदस्य है। बैठक में दस ब्लॉक प्रमुख भी शामिल हुए, जबकि अफजलगढ़ ब्लॉक प्रमुख ने बैठक से दूरी बना ली।
जिला पंचायत की राजनीति को मिल रही हवा
भले ही जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा के हैं, लेकिन राजनीति को हवा मिल रही है। अविश्वास प्रस्ताव की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही है। बताया जा रहा है कि बोर्ड की बैठक में पक्ष के कुछ सदस्यों का नहीं पहुंचना भी इसका संकेत है। हालांकि विरोधी गुट के कुछ सदस्य समर्थन में आ गए हैं।
कोरम पूरा करना भी जरूरी नहीं था
यूं तो यह शक्ति प्रदर्शन के लिए इस बैठक में कोरम पूरा किया गया, लेकिन नियम यह भी है कि कोरम पूरा करना जरूरी नहीं था। उप्र जिला पंचायत (कार्यवाहियों का संचालन) नियमावली 1962 में गणपूर्ति के उपनियम तीन में उल्लेख है कि यदि कोई बैठक गणपूर्ति न होने के कारण स्थगित कर दी जाए या फिर से स्थगित कर दी जाए तो प्रास्थगित कार्य के निस्तारण के लिए निमित स्थगित या फिर से स्थगित बैठक के लिए गणपूर्ति की आवश्यकता नहीं होगी।
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बिजनौर। अपने पराए हो गए और गैरों ने संग आकर साथ निभा दिया। जी हां, जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में कुछ ऐसा ही हुआ। विरोधी पक्ष के सदस्यों ने अंतिम समय समर्थन दे दिया, जबकि पक्ष वाले सात सदस्य गायब हो गए। बैठक में कोरम पूरा करना ही शक्ति प्रदर्शन बन गया। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, विपक्ष के सदस्यों को साथ लाकर कोरम पूरा करने में सफल रहे। बैठक करते हुए जिला पंचायत बोर्ड ने जिला विकास योजना का अनुमोदन किया।
सोमवार को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक हुई। यह बैठक दूसरी बार हुई जो कि सफल भी रही है। बता दें कि दस जून को भी जिला पंचायत की बैठक हुई थी, जिसमें सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने की वजह से स्थगित कर दिया गया था। अब दूसरी बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा नेताओं का खेमा जिला पंचायत अध्यक्ष के विरोध में उतर आया है। जोकि सदस्यों को अपने पक्ष में जुटा हुआ है। इसी वजह से पहली बैठक से तमाम सदस्य गायब रहे थे। ऐसे में बैठक का कोरम पूरा करना काफी मुश्किल लग रहा था।
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जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह के पक्ष वाले कुछ सदस्य बागी हो गए। सात सदस्य जोकि भाजपाई है, वे भी सोमवार को हुई बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष के समर्थन में विरोधी गुट में रहने वाले सदस्य आए और बैठक में शामिल हुए। भाकियू के भी सदस्यों ने बैठक में पहुंचकर कोरम को पूरा कराया। बोर्ड की बैठक में जिला विकास योजना 2022-23 का जिला पंचायत बोर्ड ने अनुमोदन किया। इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक में कहा कि जो उनके पक्ष में आए हैं, उनके कार्य वरीयता से कराए जाएंगे।
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कभी विरोधी गुट में रहने वाले मोहम्मद रफी ने कहा कि जब अध्यक्ष का चुनाव हुआ तो हम किसी मजबूरी या कारणवश दूर हो गए। लेकिन अध्यक्ष तो आप पूरे बोर्ड के हैं, अब हमें साथ आने का मौका मिला है। जिला पंचायत सदस्य डॉ रफत ने कहा कि मैं तो नींव का पत्थर हूं, लोग कुछ भी कहते रहें, मैं साथ था, साथ हूं और साथ रहूंगा। पिछली बैठक में बीमारी के चलते नहीं आ पाया और लोगों ने यह कह दिया कि मैने निष्ठा बदल ली है।
32 सदस्य हुए शामिल
सोमवार को हुई बैठक में जिला पंचायत के 32 सदस्य शामिल हुए। हालांकि 11 सदस्य भाजपा के हैं, जिनमें सात बैठक में नहीं पहुंचे। जिला पंचायत में कुल 57 सदस्य है। बैठक में दस ब्लॉक प्रमुख भी शामिल हुए, जबकि अफजलगढ़ ब्लॉक प्रमुख ने बैठक से दूरी बना ली।
जिला पंचायत की राजनीति को मिल रही हवा
भले ही जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा के हैं, लेकिन राजनीति को हवा मिल रही है। अविश्वास प्रस्ताव की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही है। बताया जा रहा है कि बोर्ड की बैठक में पक्ष के कुछ सदस्यों का नहीं पहुंचना भी इसका संकेत है। हालांकि विरोधी गुट के कुछ सदस्य समर्थन में आ गए हैं।
कोरम पूरा करना भी जरूरी नहीं था
यूं तो यह शक्ति प्रदर्शन के लिए इस बैठक में कोरम पूरा किया गया, लेकिन नियम यह भी है कि कोरम पूरा करना जरूरी नहीं था। उप्र जिला पंचायत (कार्यवाहियों का संचालन) नियमावली 1962 में गणपूर्ति के उपनियम तीन में उल्लेख है कि यदि कोई बैठक गणपूर्ति न होने के कारण स्थगित कर दी जाए या फिर से स्थगित कर दी जाए तो प्रास्थगित कार्य के निस्तारण के लिए निमित स्थगित या फिर से स्थगित बैठक के लिए गणपूर्ति की आवश्यकता नहीं होगी।