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Bijnor News: अस्पताल में सर्पदंश का इलाज, फिर भी झाड़-फूंक पर विश्वास
Mon, 26 Jun 2023 11:46 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Mon, 26 Jun 2023 11:46 PM IST
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सीएमओ डॉ विजय कुमार गोयल।
- मेडिकल अस्पताल में पिछले एक साल में 30 लोगों को ही लगी एंटी स्नेक वेनम
- 185 वायल एंटी स्नेक वेनम की मेडिकल अस्पताल में उपलब्ध
फोटो..
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सर्पदंश से मौत के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। पिछले पांच दिनों में सर्पदंश से छह लाेगों की मौत हो गई है। सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश से बचाव के लिए एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। मगर क्या फायदा, जब लोग समय से उपचार कराने के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। अस्पताल से ज्यादा लोगों को झाड़-फूंक पर विश्वास है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में सर्पदंश के केवल 30 मरीज ही मेडिकल अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे।
गर्मियों के दिनों में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। गर्मी की वजह से जीव भूमि के अंदर निकलकर बाहर आ जाते हैं। ऐसे में जंगल में काम करने वाले किसानों का पैर सांप पर रखा जाता है। जिससे सांप व्यक्ति को काट लेता है। आए दिन सर्पदंश के मामले सामने आ रहे हैं। मगर लोग इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पताल ले जाने के वजाय सर्पदंश के मरीजों को झाड़-फूंक कराने के लिए ले जाते हैं।
अंधविश्वास की वजह से उनकी मृत्यु हो रही है। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। मेडिकल अस्पताल में वर्तमान में एंटी स्नेक वेनम की 185 वायल उपलब्ध हैं। अगर सर्पदंश का मरीज समय से आता है तो उसे उपचार कर बचाया जा सकता है।
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केस नंबर एक-
रेहड़ क्षेत्र के दो गांवों में 22 जून को दोे लोपों की सर्पदंश से मौत हो गई। क्षेत्र के गांव हरिकिशनपुर निवासी राजकुमार (22) पुत्र रुपकिशोर कमरे के फर्श पर सोते समय सर्पदंश से मौत हाे गई। वहीं 22 जून को ही गांव मोहिद्दीनपुर निवासी कोमल सिंह (42) पुत्र राजेंद्र सिंह को गन्ने की फसल की सिंचाई करते समय सर्पदंश से मौत हो गई।
केस नंबर दो-
मंडावर क्षेत्र के गांव डैवलगढ़ निवासी सोनू (40) पुत्र शौसिंह की सर्पदंश से 22 जून को मौत हो गई। वहीं गांव कुंवरपुर चतरभोज उर्फ कोहरपुर निवासी हरिराम (45) पुत्र लल्लू सिंह को घर में नल पर पानी भरते समय सांप ने काटा। जिससे उसकी मौत हो गई। 23 जून की देर रात्रि कस्बा चंदक निवासी मिथुन की पांच वर्षीय बालिका प्लाक्षी की जहरीले कीड़े के काटने से मौत हो गई।
केस नंबर तीन-
नूरपुर क्षेत्र के गांव अस्करीपुर निवासी नरेश शर्मा (45) की रविवार देर रात सर्पदंश से मौत हो गई। नरेश की पत्नी अंजू अपने तीन बच्चों के साथ अपने मायके शाहपुर सुक्खा किरतपुर गई थी। नरेश घर में अकेला था।
रात में नरेश ने अपने चचेरे भाई जयकुमार को फोन पर तबियत खराब होने की बात करते हुए चिकित्सक को बुलाने के लिए कहा। जब जयकुमार डॉक्टर को बुलाकर लाया, तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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अस्पताल- एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता
अफजलगढ़ सीएचसी- 10 वायल
कासपुरगढ़ी पीएचसी - 45
धामपुर सीएचसी- 47
नगीना सीएचसी- 30
हल्दौर सीएचसी- 80
नूरपुर सीएचसी- 50
स्योहारा सीएचसी- 13
राजा का ताजपुर पीएचसी- 00
नोट: संख्या वायल में है।
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वर्जन::
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। अगर सर्पदंश का मरीज स्वास्थ्य केंद्र पर समय से पहुंचता है तो उसका इलाज किया जाएगा। क्योंकि एक मरीज को एंटी स्नेक वेनम की करीब 10 वायल लगाई जाती हैं। वैक्सीन से सर्पदंश के मरीजों का बचाव संभव है - डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर
मेडिकल अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वर्तमान में एंटी स्नेक वेनम की 185 वायल हैं। हालांकि सर्पदंश के कम ही मरीज अस्पताल आते हैं। जो मरीज आते हैं, उन्हें एंटी स्नेक वेनम लगाई जाती है। सर्पदंश के मरीज इलाज के लिए झाड़-फूंक का सहारा नहीं लेकर अस्पताल में आकर इलाज कराएं - डॉ. मनोज सैन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल अस्पताल
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- 185 वायल एंटी स्नेक वेनम की मेडिकल अस्पताल में उपलब्ध
फोटो..
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सर्पदंश से मौत के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। पिछले पांच दिनों में सर्पदंश से छह लाेगों की मौत हो गई है। सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश से बचाव के लिए एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। मगर क्या फायदा, जब लोग समय से उपचार कराने के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। अस्पताल से ज्यादा लोगों को झाड़-फूंक पर विश्वास है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में सर्पदंश के केवल 30 मरीज ही मेडिकल अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे।
गर्मियों के दिनों में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। गर्मी की वजह से जीव भूमि के अंदर निकलकर बाहर आ जाते हैं। ऐसे में जंगल में काम करने वाले किसानों का पैर सांप पर रखा जाता है। जिससे सांप व्यक्ति को काट लेता है। आए दिन सर्पदंश के मामले सामने आ रहे हैं। मगर लोग इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पताल ले जाने के वजाय सर्पदंश के मरीजों को झाड़-फूंक कराने के लिए ले जाते हैं।
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अंधविश्वास की वजह से उनकी मृत्यु हो रही है। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। मेडिकल अस्पताल में वर्तमान में एंटी स्नेक वेनम की 185 वायल उपलब्ध हैं। अगर सर्पदंश का मरीज समय से आता है तो उसे उपचार कर बचाया जा सकता है।
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केस नंबर एक-
रेहड़ क्षेत्र के दो गांवों में 22 जून को दोे लोपों की सर्पदंश से मौत हो गई। क्षेत्र के गांव हरिकिशनपुर निवासी राजकुमार (22) पुत्र रुपकिशोर कमरे के फर्श पर सोते समय सर्पदंश से मौत हाे गई। वहीं 22 जून को ही गांव मोहिद्दीनपुर निवासी कोमल सिंह (42) पुत्र राजेंद्र सिंह को गन्ने की फसल की सिंचाई करते समय सर्पदंश से मौत हो गई।
केस नंबर दो-
मंडावर क्षेत्र के गांव डैवलगढ़ निवासी सोनू (40) पुत्र शौसिंह की सर्पदंश से 22 जून को मौत हो गई। वहीं गांव कुंवरपुर चतरभोज उर्फ कोहरपुर निवासी हरिराम (45) पुत्र लल्लू सिंह को घर में नल पर पानी भरते समय सांप ने काटा। जिससे उसकी मौत हो गई। 23 जून की देर रात्रि कस्बा चंदक निवासी मिथुन की पांच वर्षीय बालिका प्लाक्षी की जहरीले कीड़े के काटने से मौत हो गई।
केस नंबर तीन-
नूरपुर क्षेत्र के गांव अस्करीपुर निवासी नरेश शर्मा (45) की रविवार देर रात सर्पदंश से मौत हो गई। नरेश की पत्नी अंजू अपने तीन बच्चों के साथ अपने मायके शाहपुर सुक्खा किरतपुर गई थी। नरेश घर में अकेला था।
रात में नरेश ने अपने चचेरे भाई जयकुमार को फोन पर तबियत खराब होने की बात करते हुए चिकित्सक को बुलाने के लिए कहा। जब जयकुमार डॉक्टर को बुलाकर लाया, तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल- एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता
अफजलगढ़ सीएचसी- 10 वायल
कासपुरगढ़ी पीएचसी - 45
धामपुर सीएचसी- 47
नगीना सीएचसी- 30
हल्दौर सीएचसी- 80
नूरपुर सीएचसी- 50
स्योहारा सीएचसी- 13
राजा का ताजपुर पीएचसी- 00
नोट: संख्या वायल में है।
वर्जन::
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। अगर सर्पदंश का मरीज स्वास्थ्य केंद्र पर समय से पहुंचता है तो उसका इलाज किया जाएगा। क्योंकि एक मरीज को एंटी स्नेक वेनम की करीब 10 वायल लगाई जाती हैं। वैक्सीन से सर्पदंश के मरीजों का बचाव संभव है - डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर
मेडिकल अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वर्तमान में एंटी स्नेक वेनम की 185 वायल हैं। हालांकि सर्पदंश के कम ही मरीज अस्पताल आते हैं। जो मरीज आते हैं, उन्हें एंटी स्नेक वेनम लगाई जाती है। सर्पदंश के मरीज इलाज के लिए झाड़-फूंक का सहारा नहीं लेकर अस्पताल में आकर इलाज कराएं - डॉ. मनोज सैन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल अस्पताल