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Bijnor News: फटे गद्दे और चादर, सप्ताह में तीन दिन मिलते हैं डॉक्टर

Fri, 02 Jan 2026 12:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:53 AM IST
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Torn mattresses and sheets, doctors are available three days a week
कादराबाद। पीएचसी का भवन जर्जर हालत में है। अस्पताल में मरीजों के लिए डाले गए बेड दयनीय हालत में हैं। बेडशीट व उसके ऊपर बिछाने वाली ड्रा शीट तक फटी तथा वर्षों पुरानी है। साफ सफाई भी दुरुस्त नहीं है। पीएचसी में करीब 50 से अधिक रोगियों की ओपीडी है लेकिन यहां चिकित्सक की तैनाती नहीं है। बार-बार मांग के बाद सप्ताह में तीन दिन के लिए चिकित्सक को अटैच किया गया है। अधिकतर पीएचसी फार्मासिस्ट के हवाले रहती है।
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गांव स्थित पीएचसी में मात्र चार बेड की सुविधा है। चहारदीवारी टूटी हुई है और साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। अस्पताल परिसर में पाली जा रही गाय का गोबर व पुआल का कूड़ा भी परिसर में ही पड़ा रहता है। पीएचसी की इमारत की जर्जर हो चुकी। इमारत में जगह-जगह दरवाजे व खिड़कियां टूटी हैं। दीवारों पर पेड़ खड़े हैं, जिनकी जड़े कमरों के अंदर तक देखी जा सकती हैं। जर्जर भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। कमरों में बेड के अलावा चारपाइयां भी पड़ी हुईं हैं।
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इसी कक्ष में प्रसव कराए जाते हैं। प्रति माह करीब 50 से 80 प्रसव यहां होते हैं। प्रसव कराने के लिए दो एएनएम की तैनाती है। प्रसव कक्ष में साफ-सफाई नहीं होने से जच्चा बच्चा को संक्रमण का खतरा रहता है। आपातकालीन रोगियों के लिए कोई जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। रोगियों को बिना देखे ही आनन-फानन में बाहर ले जाने के लिए कह दिया जाता है। सोमवार को अस्पताल पहुंची टीम को तमाम कमियां नजर आईं थी। मरीजों के उपचार के लिए सप्ताह में बुधवार, बृहस्पतिवार व शुक्रवार को ही चिकित्सक मिलते हैं जबकि 12 भूतपर्व सैनिक काॅलोनियों सहित अन्य कई गांवों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन चिकित्सक न मिलने के कारण मरीजों को निजी अस्पताल अथवा अफजलगढ़ जाकर उपचार कराना पड़ रहा है।
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परिसर में दो हैंडपंप ठप पड़े हैं। पीएचसी में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। केंद्र पर डॉट्स टीबी लैब संचालित है जिसमें केवल एक कर्मी मौजूद है। इसकी जिम्मेदारी भिक्कावाला सहित आसपास के गांव तक के मरीज के घर तक से बलगम सैंपल लाने की भी है। अस्पताल उपचार के लिए आए अलका, बलबीर तथा सरोजदेवी ने बताया कि चिकित्सक आते हैं तो उनसे उपचार करा लेते हैं, अन्यथा फार्मासिस्ट से ही दवा लेनी पड़ती है। अधिक गंभीर हालात में निजी अस्पताल या बाहर जाना पड़ता है।

पीएचसी प्रभारी कासमपुर गढ़ी सर्वेश निराला का कहना है कि पीएचसी का भवन निष्प्रयोज्य घोषित है। नए भवन के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। साथ ही बताया कि चिकित्सक की तैनाती अन्य दिनों के लिए और बढ़ा दी जाएगी।
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