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मिसाल कायम कर रहा शिक्षामित्र
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:54 PM IST
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मंडावली के गांव रामनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाता दिव्यांग शिक्षामित्र।
- फोटो : अमर उजाला
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मंडावली में अपने पांवों पर खड़ा नहीं हो सकता तो क्या हुआ, नौनिहालों को पढ़ाकर उन्हें प्रगति की राह पर आगे तो बढ़ा सकता हूं। यह कहना है कि प्राथमिक विद्यालय रामनगर में कार्यरत दिव्यांग शिक्षामित्र नितिन कुमार का।
क्षेत्र के गांव रामनगर में प्राथमिक विद्यालय स्थित है। यहां कक्षा एक से पांच तक कुल 73 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, मगर उन्हें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। बीते पांच माह से बच्चों को पढ़ाने, उन्हें मिड डे मील उपलब्ध कराने सहित अन्य एक्टिविटी की जिम्मेदारी निभा रहा है दिव्यांग शिक्षामित्र नितिन कुमार। नितिन दोनों पांवों से दिव्यांग है। वह दो बैसाखी से आता-जाता है। स्कूल में कोई शिक्षक तैनात न होने से सभी विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में बैठाकर उन्हें पढ़ाना भले ही शिक्षामित्र की मजबूरी बनी हो, मगर दिव्यांग शिक्षामित्र अपने दायित्वों को बखूबी निभाकर मिसाल कायम कर रहा है। उधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों नेमीशरण, अरविंद, सतीश, धनीराम, बाबूराम, बेगराज का कहना है कि शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं है। कई बार मांग उठाने के बावजूद स्कूल में शिक्षक की तैनाती नहीं की गई है।
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क्षेत्र के गांव रामनगर में प्राथमिक विद्यालय स्थित है। यहां कक्षा एक से पांच तक कुल 73 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, मगर उन्हें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। बीते पांच माह से बच्चों को पढ़ाने, उन्हें मिड डे मील उपलब्ध कराने सहित अन्य एक्टिविटी की जिम्मेदारी निभा रहा है दिव्यांग शिक्षामित्र नितिन कुमार। नितिन दोनों पांवों से दिव्यांग है। वह दो बैसाखी से आता-जाता है। स्कूल में कोई शिक्षक तैनात न होने से सभी विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में बैठाकर उन्हें पढ़ाना भले ही शिक्षामित्र की मजबूरी बनी हो, मगर दिव्यांग शिक्षामित्र अपने दायित्वों को बखूबी निभाकर मिसाल कायम कर रहा है। उधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों नेमीशरण, अरविंद, सतीश, धनीराम, बाबूराम, बेगराज का कहना है कि शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं है। कई बार मांग उठाने के बावजूद स्कूल में शिक्षक की तैनाती नहीं की गई है।
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