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जमीन बचाने के लिए त्योहार पर भी चला काम
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जमीन बचाने के लिए त्योहार पर भी चला काम
बिजनौर/नहटौर। करोड़ों रुपये की 2700 गज बेशकीमती जमीन को बचाने की खातिर जिला पंचायत ने त्योहार की परवाह भी नहीं की। यानि दीपावली पर अवकाश के बावजूद भी दीवार निर्माण का काम चालू रखा। अब दीवार निर्माण पूरा करते हुए भूस्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया है। यह कवायद कब्जा बरकार रखने के लिए की गई।
झालू चौराहे के पास स्थित भूमि पर जिला पंचायत ने अतिक्रमण को पूरी तरह से हटवाते हुए चाहरदीवारी करा दी है। दीपावली के दिन भी कार्य बदस्तूर जारी रहा। उक्त भूमि पर जिला पंचायत ने अपना भूस्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया हैं। सोमवार को दीपावली का अवकाश था, लोग त्योहार मनाने में मशगूल रहे, लेकिन जिला पंचायत को दीवार निर्माण पूरा होने की चिंता सता रही थी। जिसके चलते सोमवार को दोपहर बाद तक निर्माण किया गया। 120 मीटर लंबी दीवार पूरी कर ली गई। मंगलवार को इस दीवार की ऊंचाई को बढ़ाया गया।
बता दें कि नहटौर में झालू चौराहे के पास जिला पंचायत की करीब 2700 गज जमीन का मामला सुर्खियों में हैं। उक्त भूमि को कब्जाने के लिए राजेंद्र सिंह से चार लोगों ने बैनामा करा लिया था। जिला पंचायत की भूमि का बैनामा होने पर विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर भूमि को सुरक्षित करने के लिए चाहरदीवारी करनी शुरू कर दी गई। जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी साकेंद्र प्रताप सिंह व कई जिला पंचायत सदस्य भी मौके पर पहुंचें थे। जिला पंचायत के अधिकारी उक्त भूमि पर दीवार बनाने के लिए जुटे रहें। एएमए श्याम बहादुर शर्मा सहित कई जेई ने उक्त कार्य की बागडोर अपने हाथ में संभाली।
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दीवार को बनाने के लिए करीब 60 मजदूरों ने दिन रात काम किया। सतर्कता इस तरह से रही कि चाहरदीवारी बनाने के लिए रात दिन काम हुआ। दीपावली के दिन भी काम होता रहा। एक हिस्से पर अतिक्रमण को भी पूरी तरह से हटा दिया गया। दो तरफ से दीवार का कार्य किया गया। दीवार का काम अंतिम दौर में चल रहा है। जिला पंचायत ने उक्त भूमि के दो स्थानों पर अपना भूस्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया हैं। लोगों का कहना है कि अगर जिला पंचायत पहले से सतर्क रहती तो शायद यह नौबत नहीं आती।
स्टे आर्डर के डर से चल रहा रात दिन काम
कथित रूप से जिला पंचायत की जमीन का बैनामा हो चुका है। ऐसे में जिला पंचायत को डर है कि विपक्षी जिला पंचायत के खिलाफ कोर्ट जाकर स्टे आर्डर ला सकते हैं। ऐसे में जिला पंचायत जमीन पर कब्जा रोकने के लिए स्टे आर्डर आने से पहले ही जमीन की चाहरदीवारी कर अब पूरी तरह इस पर अपना स्वामित्व दर्शाना चाहता है। ताकि यदि स्टे आर्डर भी आ जाए तो यथा स्थिति की हालत में कब्जा जिला पंचायत का ही बना रहे।
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बिजनौर/नहटौर। करोड़ों रुपये की 2700 गज बेशकीमती जमीन को बचाने की खातिर जिला पंचायत ने त्योहार की परवाह भी नहीं की। यानि दीपावली पर अवकाश के बावजूद भी दीवार निर्माण का काम चालू रखा। अब दीवार निर्माण पूरा करते हुए भूस्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया है। यह कवायद कब्जा बरकार रखने के लिए की गई।
झालू चौराहे के पास स्थित भूमि पर जिला पंचायत ने अतिक्रमण को पूरी तरह से हटवाते हुए चाहरदीवारी करा दी है। दीपावली के दिन भी कार्य बदस्तूर जारी रहा। उक्त भूमि पर जिला पंचायत ने अपना भूस्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया हैं। सोमवार को दीपावली का अवकाश था, लोग त्योहार मनाने में मशगूल रहे, लेकिन जिला पंचायत को दीवार निर्माण पूरा होने की चिंता सता रही थी। जिसके चलते सोमवार को दोपहर बाद तक निर्माण किया गया। 120 मीटर लंबी दीवार पूरी कर ली गई। मंगलवार को इस दीवार की ऊंचाई को बढ़ाया गया।
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बता दें कि नहटौर में झालू चौराहे के पास जिला पंचायत की करीब 2700 गज जमीन का मामला सुर्खियों में हैं। उक्त भूमि को कब्जाने के लिए राजेंद्र सिंह से चार लोगों ने बैनामा करा लिया था। जिला पंचायत की भूमि का बैनामा होने पर विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर भूमि को सुरक्षित करने के लिए चाहरदीवारी करनी शुरू कर दी गई। जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी साकेंद्र प्रताप सिंह व कई जिला पंचायत सदस्य भी मौके पर पहुंचें थे। जिला पंचायत के अधिकारी उक्त भूमि पर दीवार बनाने के लिए जुटे रहें। एएमए श्याम बहादुर शर्मा सहित कई जेई ने उक्त कार्य की बागडोर अपने हाथ में संभाली।
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दीवार को बनाने के लिए करीब 60 मजदूरों ने दिन रात काम किया। सतर्कता इस तरह से रही कि चाहरदीवारी बनाने के लिए रात दिन काम हुआ। दीपावली के दिन भी काम होता रहा। एक हिस्से पर अतिक्रमण को भी पूरी तरह से हटा दिया गया। दो तरफ से दीवार का कार्य किया गया। दीवार का काम अंतिम दौर में चल रहा है। जिला पंचायत ने उक्त भूमि के दो स्थानों पर अपना भूस्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया हैं। लोगों का कहना है कि अगर जिला पंचायत पहले से सतर्क रहती तो शायद यह नौबत नहीं आती।
स्टे आर्डर के डर से चल रहा रात दिन काम
कथित रूप से जिला पंचायत की जमीन का बैनामा हो चुका है। ऐसे में जिला पंचायत को डर है कि विपक्षी जिला पंचायत के खिलाफ कोर्ट जाकर स्टे आर्डर ला सकते हैं। ऐसे में जिला पंचायत जमीन पर कब्जा रोकने के लिए स्टे आर्डर आने से पहले ही जमीन की चाहरदीवारी कर अब पूरी तरह इस पर अपना स्वामित्व दर्शाना चाहता है। ताकि यदि स्टे आर्डर भी आ जाए तो यथा स्थिति की हालत में कब्जा जिला पंचायत का ही बना रहे।