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गन्ने में मिठास नहीं, घाटे में चल रहे कोल्हू
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गन्ने में मिठास नहीं, घाटे में चल रहे कोल्हू
बिजनौर। गुड़ के दाम अच्छे होने की वजह से जिले में कोल्हू तो चल गए, लेकिन गन्ना अभी मीठा नहीं है। इसकी रिकवरी भी सात से आठ प्रतिशत ही आ रही है। जबकि पके गन्ने से रिकवरी 12 से 13 प्रतिशत आती है। बरसात का मौसम देर तक होने से गन्ना अभी तक पूरी तरह पका नहीं है। मुनाफे की आस में कोल्हू मालिकों ने कच्चे गन्ने की ही पेराई शुरू कर दी। जल्दी कोल्हू चलाना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
पिछले साल कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में जनता ने गुड़ का इस्तेमाल जमकर किया था। तब गुड़ के दाम बढ़ गए थे। मुनाफे के लिए पिछले साल सितंबर में ही कोल्हू चल गए थे और गन्ने की पेराई शुरू हो गई थी। कोल्हू जल्दी चलने की वजह से तब गन्ने से अच्छी रिकवरी नहीं आई थी। पिछले साल की जल्दबाजी से सबक लेते हुए कोल्हू मालिकों ने इस बार कोल्हुओं का संचालन करीब 15 दिन देरी से शुरू किया, लेकिन अब भी पिछले साल वाली ही स्थिति है। खेतों में खड़ा गन्ना अब भी कच्चा है। इस गन्ने की रिकवरी सात से आठ प्रतिशत ही आ रही है।
जबकि तैयार फसल से रिकवरी 12 से 13 प्रतिशत तक आती है। इस समय गुड़ के दाम 35 से 36 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं और गन्ना 260 से 280 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। गुड़ के दाम बहुत अच्छे हैं, लेकिन कम गुड़ बनने से कोल्हू संचालकों को अभी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार कोल्हू मालिक इस नुकसान से बचने के लिए गन्ने के रस में चीनी मिलाते हैं।
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पानी ज्यादा है और मिठास कम
गन्ने में दो तत्व ग्लूकोज और सुक्रोज होते हैं। ग्लूकोज पानी होता है और सुक्रोज उसकी मिठास। जब ज्यादा समय तक बारिश होती है तब पौधे धूप या जमीन से अपनी पूरी खुराक नहीं ले पाते हैं। ऐसे में वे सुक्रोज यानि मिठास को ही अपना आहार बनाते हैं। पिछले महीने भी काफी बारिश हुई है। पौधों द्वारा सुक्रोज यानि मिठास को खुराक बनाने से रिकवरी बहुत प्रभावित हुई है। गन्ने में अभी मिठास कम है और पानी ज्यादा। कोल्हू संचालक सनवर के अनुसार रिकवरी अभी आठ से नौ प्रतिशत ही आ रही है। गुड़ के दाम तो अच्छे हैं, लेकिन रिकवरी कम आने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एक क्विंटल गन्ने से बनता है 12 किलो गुड़
गन्ने की फसल सामान्य होने पर एक क्विंटल गन्ने में 11 से 12 किलो तक गुड़ बनाया जा सकता है। लेकिन अभी गन्ने में सुक्रोज कम होने से गुड़ कम बन रहा है। कोल्हू व क्रेशरों में चीनी मिलों के मुकाबले गन्ने से रस कम निकलता है, लेकिन जो भी रस निकलता है, उसे पूरे को पकाया जाता है। इस वजह से रस कम होने के बाद भी गुड़ का उत्पादन चीनी के लगभग बराबर ही हो जाता है।
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बिजनौर। गुड़ के दाम अच्छे होने की वजह से जिले में कोल्हू तो चल गए, लेकिन गन्ना अभी मीठा नहीं है। इसकी रिकवरी भी सात से आठ प्रतिशत ही आ रही है। जबकि पके गन्ने से रिकवरी 12 से 13 प्रतिशत आती है। बरसात का मौसम देर तक होने से गन्ना अभी तक पूरी तरह पका नहीं है। मुनाफे की आस में कोल्हू मालिकों ने कच्चे गन्ने की ही पेराई शुरू कर दी। जल्दी कोल्हू चलाना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
पिछले साल कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में जनता ने गुड़ का इस्तेमाल जमकर किया था। तब गुड़ के दाम बढ़ गए थे। मुनाफे के लिए पिछले साल सितंबर में ही कोल्हू चल गए थे और गन्ने की पेराई शुरू हो गई थी। कोल्हू जल्दी चलने की वजह से तब गन्ने से अच्छी रिकवरी नहीं आई थी। पिछले साल की जल्दबाजी से सबक लेते हुए कोल्हू मालिकों ने इस बार कोल्हुओं का संचालन करीब 15 दिन देरी से शुरू किया, लेकिन अब भी पिछले साल वाली ही स्थिति है। खेतों में खड़ा गन्ना अब भी कच्चा है। इस गन्ने की रिकवरी सात से आठ प्रतिशत ही आ रही है।
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जबकि तैयार फसल से रिकवरी 12 से 13 प्रतिशत तक आती है। इस समय गुड़ के दाम 35 से 36 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं और गन्ना 260 से 280 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। गुड़ के दाम बहुत अच्छे हैं, लेकिन कम गुड़ बनने से कोल्हू संचालकों को अभी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार कोल्हू मालिक इस नुकसान से बचने के लिए गन्ने के रस में चीनी मिलाते हैं।
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पानी ज्यादा है और मिठास कम
गन्ने में दो तत्व ग्लूकोज और सुक्रोज होते हैं। ग्लूकोज पानी होता है और सुक्रोज उसकी मिठास। जब ज्यादा समय तक बारिश होती है तब पौधे धूप या जमीन से अपनी पूरी खुराक नहीं ले पाते हैं। ऐसे में वे सुक्रोज यानि मिठास को ही अपना आहार बनाते हैं। पिछले महीने भी काफी बारिश हुई है। पौधों द्वारा सुक्रोज यानि मिठास को खुराक बनाने से रिकवरी बहुत प्रभावित हुई है। गन्ने में अभी मिठास कम है और पानी ज्यादा। कोल्हू संचालक सनवर के अनुसार रिकवरी अभी आठ से नौ प्रतिशत ही आ रही है। गुड़ के दाम तो अच्छे हैं, लेकिन रिकवरी कम आने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एक क्विंटल गन्ने से बनता है 12 किलो गुड़
गन्ने की फसल सामान्य होने पर एक क्विंटल गन्ने में 11 से 12 किलो तक गुड़ बनाया जा सकता है। लेकिन अभी गन्ने में सुक्रोज कम होने से गुड़ कम बन रहा है। कोल्हू व क्रेशरों में चीनी मिलों के मुकाबले गन्ने से रस कम निकलता है, लेकिन जो भी रस निकलता है, उसे पूरे को पकाया जाता है। इस वजह से रस कम होने के बाद भी गुड़ का उत्पादन चीनी के लगभग बराबर ही हो जाता है।