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Bijnor News: कारगिल के रणबांकुरों की आंखों में आज भी जिंदा है विजय की कहानी

Sun, 26 Jul 2026 01:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:24 AM IST
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The story of victory is still alive in the eyes of Kargil warriors.
सुनील कुमार
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अफजलगढ़। कारगिल विजय दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान की याद है जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन को धूल चटाकर तिरंगा फहराया। 26 जुलाई को पूरा देश विजय दिवस मनाएगा तो अफजलगढ़ क्षेत्र की 12 पूर्व सैनिक कॉलोनियों में भी कारगिल के रणबांकुरों की यादें ताजा होंगी। यहां रहने वाले कई पूर्व सैनिक आज भी 1999 के उन कठिन दिनों को याद कर भावुक हो उठते हैं, जब लगातार करीब 60 दिन तक चले युद्ध में उन्होंने जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा की।
अफजलगढ़ के पत्थरवाला फार्म निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन रघुवीर सिंह बिष्ठ बताते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान वह गुरेज सेक्टर में कमांडर थे। उनकी टुकड़ी के 20 जवानों में से 12 सीधे उनके साथ मोर्चे पर थे। घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ने देना ही लक्ष्य था। दुर्गम पहाड़ियों में लगातार 11 दिन तक बिना भोजन के डटे रहना पड़ा, लेकिन हौसला कभी नहीं टूटा। उनका कहना है कि सेना का प्रशिक्षण ही जवानों को हर परिस्थिति में लड़ने का साहस देता है।
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विजयनगर निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार पूरन सिंह असवाल उस समय आठ पर्वतीय सिग्नल रेजीमेंट में तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी श्रीनगर, द्रास और बटालिक सेक्टर में सैन्य कमांडरों के बीच संचार व्यवस्था बनाए रखने की थी। दुर्गम पहाड़ियों में रेडियो और लाइन संचार सुचारु रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पूरी टीम ने युद्ध के दौरान संचार व्यवस्था बाधित नहीं होने दी। इस योगदान के लिए उन्हें बाद में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
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गांव प्रेमपुरी रसूलाबाद निवासी पूर्व सैनिक प्रभाकरण 1998 में सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे और भर्ती के एक वर्ष बाद ही उन्हें कारगिल युद्ध में टाइगर हिल अभियान का हिस्सा बनने का अवसर मिला। करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर दुश्मन की तलाश में आगे बढ़ते समय कई बार भूखे रहना पड़ा। दुश्मन की गोलाबारी के बीच चार से पांच घंटे तक चले संघर्ष में उनके पैर में गोली लगी, लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा। आज भी उनके भीतर सीमा पर जाकर देश सेवा करने का वही जज्बा दिखाई देता है।
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