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Bijnor News: बिजनौर - अनपढ़ शाम में अभिनय कर फलक पर चमक गए सितारे

Mon, 27 Mar 2023 12:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 27 Mar 2023 12:07 AM IST
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The stars shone on the board by acting in an illiterate evening
धामपुर में एक अनपढ़ शाम कार्यक्रम का मंचन करते कलाकार। (फाइल फोटो)
विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष
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- पूर्व वरिष्ठ पत्रकार सत्यराज ने की थी नाटक की शुरूआत
- एक हजार से अधिक बार हो चुका है एक अनपढ़ शाम का मंचन
- धामपुर की सरजमीं पर आज भी जिंदा है रंगमंच का शौक
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। विश्व रंगमंच दिवस 27 मार्च को मनाया जा रहा है। इंटरनेट की चमक के आगे रंगमंच की चमक फीकी पड़ गई। मगर एक दौर था, जब युवा रंगमंच में काम कर फलक पर चमक गए। रंगमंच से जुड़ा एक नाटक एक अनपढ़ शाम धामपुर की सरजमीं से जुड़ा है। जिसमें अभिनय कर कई सितारे फलक पर चमक गए।

रंगमंच का शौक लोगों के लिए मनोरंजन की नई उम्मीद बना। जिसमें काम कर बच्चों और युवाओं ने खुद की प्रतिभा को निखारा। धामपुर की सरजमीं से निकले नाटक एक अनपढ़ शाम की शुरुआत करीब दो दशक पहले पूर्व वरिष्ठ पत्रकार सत्यराज ने की थी। इस नाटक में 15 कलाकार तक काम करते थे। जिसमें पंकज लोचन, उधम, पवन संगम, सुरेश ताइ, इंतेजार शेख बुंदू, अकरम, बब्लू, साजिदा सहित कई ने काम किया। एक अनपढ़ शाम का एक हजार से अधिक बार मंचन हुआ था। नाटक के लेखक सत्यराज, निर्देशक भानु प्रताप सिंह, निर्माता नीरजा सिंह थीं।
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सत्यराज का कहना है कि जब टीवी का नया दौर शुरू ही हुआ था। नाटक करते समय देखने वाले लोगों की भीड़ लग जाती थी। इस नाटक का एक कार्यक्रम तिहाड़ जेल में किया गया था। इसका उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को दूर करना था। टीबी, दूरदर्शन के दौर में ही रंगमंच की शुरुआत हुई।
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अब रंगमंच अकादमी चला रहे पंकज लोचन
धामपुर के मोहल्ला काहरान निवासी पंकज लोचन पुत्र स्वर्गीय जानकी प्रसाद रंगमंच का जाना पहचाना नाम है। पंकज ने नाटक एक अनपढ़ शाम में भी काम किया। साल 2017 में पंकज ने अपनी प्रतिभा से एनएसडी पैनल को प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने देशभर में रंगमंच किया। पंकज ने श्रीराम उनका नाटक स्पर्श को लोगों ने काफी पसंद किया था। वर्तमान में वह अपनी रंगमंच अकादमी चला रहे हैं।
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