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छत क्या गिरी, बिखर गए अरमान, रह गया बस खुला आसमान
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बेबसी के आंशू। बिजनौर के मोहल्ला खत्रियान में मकान की छत गिरने और बच्चे की मौत के बाद गमजदा सन्नो?
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। इकरार अहमद के मकान की गिरी, तो उसके मलबे में उनके कलेजे का टुकड़ा दब गया। इसके अलावा उनके न जाने कितने अरमान भी इस मलबे में दफन हो गए। अब खुले आसमान के नीचे मलबे पर बैठा यह परिवार आंसू बहाते हुए बेबस नजर आ रहा है। परिवार की हालत ऐसी है कि 25 गज जमीन में बने इस मकान की छत दोबारा बनवाना तो दूर इसके ऊपर तिरपाल तक ढकने के लिए पैसे नहीं है।
मोहल्ला खत्रियान निकट मक्का मस्जिद निवासी इकरार अहमद पुत्र इंतखाब सोमवार की दोपहर को अपने दो बच्चों सैफ, कैफ व बीवी सन्नो के साथ घर में था। इस दौरान मकान की छत भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में चारों दब गए। उपचार के दौरान कैफ (8 वर्ष) की मौत हो गई। दूसरे बच्चे सैफ की हालत भी गंभीर है। इकरार राज-मिस्त्री का काम करता है, लेकिन कुछ समय पहले उसके पैर में संक्रमण हो गई और आज वह चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं है। उसके साथ-साथ घर की छत पर भी मुफलिसी का बोझ इस कदर बढ़ा कि वह उसे झेल नहीं पाई और धराशायी हो गई। मंगलवार को छत के मलबे के पास इकरार की पत्नी सन्नो बदहवास हालत में यही कहती रही कि छत के साथ-साथ उसके कलेजे का टुकड़ा भी छिन गया। अब केवल उनके हिस्से में खुला आसमान ही बचा है।
दो साल पहले किया था पीएम आवास योजना में आवेदन
मंगलवार को अपने छत के मलबे पर बैठी सन्नो रो-रोकर कह रही थी कि हमने तो दो साल पहले पीएम आवास योजना के लिए आवेदन किया था। अभी तक उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया गया। यदि समय रहते मकान बन जाता तो न ही छत गिरती और न ही उसका बेटा उससे छिनता।
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मिलेगा योजना का लाभ : एडीएम
एडीएम प्रशासन विनय कुमार ने कहा कि इस मामले को दिखवाया जाएगा। पीड़ित जिन योजनाओं के पात्र हैं, उनका लाभ दिलाया जाएगा। संबंधित विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाएगी।
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मोहल्ला खत्रियान निकट मक्का मस्जिद निवासी इकरार अहमद पुत्र इंतखाब सोमवार की दोपहर को अपने दो बच्चों सैफ, कैफ व बीवी सन्नो के साथ घर में था। इस दौरान मकान की छत भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में चारों दब गए। उपचार के दौरान कैफ (8 वर्ष) की मौत हो गई। दूसरे बच्चे सैफ की हालत भी गंभीर है। इकरार राज-मिस्त्री का काम करता है, लेकिन कुछ समय पहले उसके पैर में संक्रमण हो गई और आज वह चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं है। उसके साथ-साथ घर की छत पर भी मुफलिसी का बोझ इस कदर बढ़ा कि वह उसे झेल नहीं पाई और धराशायी हो गई। मंगलवार को छत के मलबे के पास इकरार की पत्नी सन्नो बदहवास हालत में यही कहती रही कि छत के साथ-साथ उसके कलेजे का टुकड़ा भी छिन गया। अब केवल उनके हिस्से में खुला आसमान ही बचा है।
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दो साल पहले किया था पीएम आवास योजना में आवेदन
मंगलवार को अपने छत के मलबे पर बैठी सन्नो रो-रोकर कह रही थी कि हमने तो दो साल पहले पीएम आवास योजना के लिए आवेदन किया था। अभी तक उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया गया। यदि समय रहते मकान बन जाता तो न ही छत गिरती और न ही उसका बेटा उससे छिनता।
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मिलेगा योजना का लाभ : एडीएम
एडीएम प्रशासन विनय कुमार ने कहा कि इस मामले को दिखवाया जाएगा। पीड़ित जिन योजनाओं के पात्र हैं, उनका लाभ दिलाया जाएगा। संबंधित विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाएगी।