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लावारिस में हुआ अंतिम संस्कार, अब तर्पण का इंतजार

Mon, 27 Sep 2021 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 11:27 PM IST
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The last rites took place in the unclaimed, now waiting for tarpan
लावारिस में हुआ अंतिम संस्कार, अब तर्पण का इंतजार
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अचल चौधरी
बिजनौर। एक ओर पितृ पक्ष में अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण कर रहे हैं। वहीं, लावारिस में जला दिए गए अज्ञात शवों के परिवार वालों को अपनों की मौत का भी पता ही नहीं होगा। बीते पांच साल में पुलिस 93 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी है।
अपनों से दूर मौत की नींद सो चुके यह कौन लोग थे, कोई नहीं जानता। हो सकता है परिजन अभी भी उनकी राह देख रहे हों। जबकि पुलिस उनका अंतिम संस्कार कर चुकी होती है। ऐसे में अज्ञात लोगों का तर्पण भी नहीं हो पाता। पोस्टमार्टम के बाद 72 घंटे तक परिजनों के इंतजार के बाद पुलिस अंतिम संस्कार कर देती है।
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मिले लावारिस शव
साल लावारिस शव
2017 19
2018 9
2019 28
2020 22
2021 14
यहां मिले अज्ञात के शव
17 अक्टूबर 20- नजीबाबाद में गांव इस्सेपुर के पास नहर में मिला शव
28 नवंबर 20- नजीबाबाद में कोटद्वार रोड पर समीपुर के पास
16 जनवरी 21- मोहम्मदपुर देवमल में बाकरपुर रोड पर रजवाहे की पटरी के पास
22 जून 21- बालावाली में रेलवे ट्रैक
18 मार्च 21- धामपुर में पेट्रोल पंप के पास
6 जुलाई 21- जलालपुर काजी क्षेत्र में गंगा में शव मिला
23 जुलाई 21- धामपुर के जैतरा में धामपुर से नूरपुर रोड पर
23 मई 21- शिवाला कला में सेह नहर पुल के नीचे
23 मई 21- मौज्जमपुर नारायण रेलवे स्टेशन पर
6 अगस्त 21- हरिद्वार से आने वाली नहर में
10 अगस्त 21- किरतपुर में हुसैनपुर सुल्तान के निकट रेलवे लाइन पर
12 अगस्त 21- नांगल थाना क्षेत्र के गंगा के टापू पर
11 अगस्त 21- रामलीला मैदान से जिला अस्पताल में भर्ती के दौरान
क्या कहते हैं ब्राह्मण
श्राद्ध पितरों के तर्पण का पर्व है। तर्पण से पितरों की तृप्ति होती है। अब सवाल है कि आखिर अज्ञात का तर्पण कौन करे। ऐसे में उस स्थान के राजा को तर्पण का अधिकार होता है। अब राजा है नहीं, लेकिन आज के दौर में जनप्रतिनिधि को ही राजा समझा जा सकता है। ऐसे में जनप्रतिनिधि किसी पुरोहित से लावारिस लोगों का तर्पण करा सकते हैं - पंडित आशीष शर्मा
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