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भूमाफिया ने ठेके पर दे दी मालन की जमीन
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बिजनौर में किरतपुर के पास मालन नदी की जमीन बोई गई गन्ने की फसल।
- फोटो : BIJNOR
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भूमाफिया ने ठेके पर दे दी मालन की जमीन
बिजनौर। भूमाफिया ने मालन की जमीन पर अतिक्रमण ही नहीं किया बल्कि ठेके पर देने की प्रथा भी चला दी। यह बात भले ही अटपटी लगे, लेकिन धरातल पर हकीकत बन चुकी है। दरअसल, जो लोग मालन की रेत में पलेज या सब्जी बोते हैं, उनसे प्रति बीघा तीन हजार रुपये से लेकर छह हजार रुपये तक वसूली की जाती है। ठेके पर देने वाले असल मालिक हैं या नहीं, यह बात सब्जी बोने वाले जानते ही नहीं हैं।
डीएम ने तीन दिन पहले ही मालन नदी की 196 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराया है, जिस पर फसल बोई हुई थी। इससे साबित होता है कि मालन की जमीन पर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। अमर उजाला की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पड़ताल की तो कब्जे के खेल का भी पता चला। मालन नदी की जमीन में खीरा-ककड़ी और सब्जी की खेती करने वाले दंपती ने बताया कि उन्होंने एक व्यक्ति से यह जमीन ठेके पर ली है। प्रति बीघा पलेज लगाने वालों से तीन हजार रुपये से लेकर छह हजार रुपये तक वसूली की जाती है। गंगा की प्रमुख सहायक नदी मालन का अपना अलग इतिहास रहा है। नजीबाबाद तहसील के 30 गांवों से होकर गुजरने वाली मालन अब संकरी हो चुकी है। कहीं सिर्फ नाला दिखाई देती है।
मालन नदी हल्दूखाता से बिजनौर में प्रवेश करती है। राजस्व अभिलेखों में मालन की चौड़ाई 50 से 70 मीटर तक है। अधिकांश जगहों पर मालन अतिक्रमण का शिकार हो गई है। कुछ जगहों पर किसानों ने अपने खेतों का दायरा बढ़ाकर नदी की जमीन को मिला लिया है। कुछ जगहों पर माफिया ने अपनी जमीन बताते हुए नदी की जमीन को ठेके पर दे दिया है। कुछ जगहों पर गन्ने की खेती की जा रही है। जहां रेतीली जमीन है, वहां पलेज लगी हुई है।
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बिजनौर। भूमाफिया ने मालन की जमीन पर अतिक्रमण ही नहीं किया बल्कि ठेके पर देने की प्रथा भी चला दी। यह बात भले ही अटपटी लगे, लेकिन धरातल पर हकीकत बन चुकी है। दरअसल, जो लोग मालन की रेत में पलेज या सब्जी बोते हैं, उनसे प्रति बीघा तीन हजार रुपये से लेकर छह हजार रुपये तक वसूली की जाती है। ठेके पर देने वाले असल मालिक हैं या नहीं, यह बात सब्जी बोने वाले जानते ही नहीं हैं।
डीएम ने तीन दिन पहले ही मालन नदी की 196 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराया है, जिस पर फसल बोई हुई थी। इससे साबित होता है कि मालन की जमीन पर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। अमर उजाला की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पड़ताल की तो कब्जे के खेल का भी पता चला। मालन नदी की जमीन में खीरा-ककड़ी और सब्जी की खेती करने वाले दंपती ने बताया कि उन्होंने एक व्यक्ति से यह जमीन ठेके पर ली है। प्रति बीघा पलेज लगाने वालों से तीन हजार रुपये से लेकर छह हजार रुपये तक वसूली की जाती है। गंगा की प्रमुख सहायक नदी मालन का अपना अलग इतिहास रहा है। नजीबाबाद तहसील के 30 गांवों से होकर गुजरने वाली मालन अब संकरी हो चुकी है। कहीं सिर्फ नाला दिखाई देती है।
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मालन नदी हल्दूखाता से बिजनौर में प्रवेश करती है। राजस्व अभिलेखों में मालन की चौड़ाई 50 से 70 मीटर तक है। अधिकांश जगहों पर मालन अतिक्रमण का शिकार हो गई है। कुछ जगहों पर किसानों ने अपने खेतों का दायरा बढ़ाकर नदी की जमीन को मिला लिया है। कुछ जगहों पर माफिया ने अपनी जमीन बताते हुए नदी की जमीन को ठेके पर दे दिया है। कुछ जगहों पर गन्ने की खेती की जा रही है। जहां रेतीली जमीन है, वहां पलेज लगी हुई है।

बिजनौर में किरतपुर-बुडगरा के बीच सूखी मालन नदी।- फोटो : BIJNOR
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