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Bijnor News: 400 साल पुराना है झारखंडी शिवालय का इतिहास, अटूट है आस्था

Mon, 29 Jul 2024 02:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:02 AM IST
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The history of Jharkhandi Shivalaya is 400 years old, faith is unbreakable
संवाद न्यूज एजेंसी
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झालू। झारखंडी शिवालय का इतिहास सदियों पुराना है। सच्चे मन और आस्था के संग मांगी गई भक्तों की मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए आस्था का सैलाब उमड़ता है। आस पास ही नहीं बल्कि दूर दराज से भी भगवान भोलेनाथ के दर पर भक्त मत्था टेकने पहुंचते हैं।



खारी-धर्मपुरा के पास झारखंडी मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। झारखंडी मंदिर समिति के उपाध्यक्ष और पूर्व प्रधान सूरज सिंह बताते हैं कि मंदिर करीब चार सौ साल पुराना है। बताते हैं कि महर्षि लोगों की जमींदारी के समय मंदिर वाली जगह पर झाड़ हुआ करते थे। जमीन को खेती के लायक बनाने को महर्षि के जिलेदार ने मजदूरों को सफाई पर लगाया। सफाई के दौरान जमीन में एक शिवलिंग नुमा पत्थर दिखाई दिया। मजदूरों ने काफी गहराई तक खोदाई की, लेकिन पत्थर का अंत दिखाई नहीं दिया। मजदूर का फावड़ा पत्थर पर लग गया।
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फावड़े लगते ही पत्थर से दूध जैसे द्रव्य की धार निकली। लोग इसे चमत्कार मानने लगे। इसी बीच दूर-दूर तक लोग पूजा-अर्चना करने लगे। चढ़ावा चढ़ने लगा। तब महर्षि ने श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए इस स्थान पर मंदिर निर्माण कराना शुरू कर दिया।
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बुजुर्ग संतोष कुमार गोयल, गिरिराज सिंह, भूपेंद्र सिंह राय साहब आदि बताते हैं कि तब से आज तक शिवलिंग का आकार और लंबाई प्रति वर्ष बढ़ती रहती है। वर्तमान में शिवलिंग की लंबाई तीन फुट और मोटाई 1.5 फुट है। खोदाई के दौरान शिवलिंग पर पड़े फावड़े का निशान आज भी मौजूद है।





महाशिवरात्रि पर होता है मेले का आयोजन



प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि एवं सावन माह में श्रद्धालु मंदिर में जल चढ़ाने आते हैं। महाशिवरात्रि पर मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर सिंह के निर्देशन में मंदिर की देखभाल समिति करती है। मंदिर परिसर में शिव परिवार, राम दरबार, कृष्ण सुदामा, क्षीर सागर, मां सरस्वती, श्रवण कुमार, दधीचि, हनुमान, शनिदेव, मां संतोषी, यमराज आदि भगवान जी की मूर्तियां स्थापित हैं।
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