{"_id":"669d6b6bc9446175470c6e14","slug":"the-heroes-of-kakori-incident-had-spent-their-exile-in-paijniya-bijnor-news-c-27-1-smrt1007-127287-2024-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: काकोरी कांड के नायकों ने पैजनियां में काटा था अज्ञातवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: काकोरी कांड के नायकों ने पैजनियां में काटा था अज्ञातवास
विज्ञापन
हल्दौर क्षेत्र के गांव पैजनियां में स्थित क्रांति स्मारक। संवाद
हमारा गांव
-काकोरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का खजाना लूटने के बाद पैजनियां में आकर ठहरे थे क्रांतिकारी
-पैजनियां में संजों कर रखी गई हैं आजादी के दीवानों की याद, बना है शहीद स्मारक
विनय शर्मा
पैजनियां। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर बिजनौर-मुरादाबाद हाईवे पर गांव है पैजनिया। वर्तमान में पैजनियां पक्की सड़क से जुड़ा है, मगर आजादी से पहले कच्चा मार्ग हुआ करता था। सड़क से जुड़ा नहीं होने के कारण काकोरी कांड के नायकों ने इस गांव में अज्ञातवास काटा। करीब छह महीने तक क्रांतिकारी इस गांव के पास एक बाग में ठहरे थे। आजादी के दीवानों की यादों को संजोने के लिए अब शहीद स्मारक बना हुआ है।
साल 1925 में नौ अगस्त को काकोरी रेलवे स्टेशन पर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों का खजाना लूट लिया था। काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार क्रांतिकारियों को तलाश रही थी। ऐसे में उनके मददगार बने स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी। गणेश शंकर विद्यार्थी के मित्र ग्राम पैजनियां निवासी चौधरी गंगा सहाय हुआ करते थे। काकोरी कांड में शामिल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लहड़ी, अवनीकांत मुखर्जी और महाराष्ट्र के अप्पराव की तलाश में ब्रिटिश सरकार ने दिन रात एक कर रखा था।
उस दौरान ये सभी क्रांतिकारी गणेश शंकर विद्यार्थी का पत्र लेकर शरण के लिए पैजनिया गांव में उनके मित्र चौधरी गंगा सहाय के पास पहुंचे। चौधरी गंगा सहाय ने पैजनिया-नहटौर मार्ग पर स्थित अपने आम के बाग में सभी क्रांतिकारियों के रुकने की व्यवस्था की। इन सभी क्रांतिकारियों ने छह महीने का वक्त पैजनियां में गुजारा।
विज्ञापन
यहां से निकलने के बाद अप्पाराव के अतिरिक्त सभी क्रांतिकारियों को ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार लिया था। जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने अलग अलग जेल में फांसी दे दी थी। चौधरी गंगा सहाय के पुत्रों शिवचरण सिंह त्यागी और सुरेंद्र सिंह ने आजादी के बाद क्रांतिकारियों की उक्त शरणस्थली की करीब 13 बीघा जमीन को जिला परिषद को स्कूल और शहीद स्मारक के लिए दान कर दिया गया था।
30 वर्ष पूर्व कराया गया था स्मारक का निर्माण
चौधरी गंगा सहाय के परिजनों डॉ. भोलानाथ त्यागी और सुरेंद्र त्यागी के प्रयासों से करीब 30 वर्ष पूर्व जनपद के तत्कालीन जिलाधिकारी धीरेंद्र बहुगुणा द्वारा बाग की जमीन पर क्रांति स्मारक का निर्माण कराया गया। इससे पैजनिया को पूरे प्रदेश में एक नई पहचान मिली। सभी राष्ट्रीय पर्वों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी गंगा सहाय के परिजन एवं जनपद के जनप्रतिनिधि एवं बड़े अधिकारी यहां ध्वजारोहण कर शहीदों को नमन करने आते है।
विज्ञापन
-काकोरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का खजाना लूटने के बाद पैजनियां में आकर ठहरे थे क्रांतिकारी
-पैजनियां में संजों कर रखी गई हैं आजादी के दीवानों की याद, बना है शहीद स्मारक
विनय शर्मा
पैजनियां। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर बिजनौर-मुरादाबाद हाईवे पर गांव है पैजनिया। वर्तमान में पैजनियां पक्की सड़क से जुड़ा है, मगर आजादी से पहले कच्चा मार्ग हुआ करता था। सड़क से जुड़ा नहीं होने के कारण काकोरी कांड के नायकों ने इस गांव में अज्ञातवास काटा। करीब छह महीने तक क्रांतिकारी इस गांव के पास एक बाग में ठहरे थे। आजादी के दीवानों की यादों को संजोने के लिए अब शहीद स्मारक बना हुआ है।
साल 1925 में नौ अगस्त को काकोरी रेलवे स्टेशन पर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों का खजाना लूट लिया था। काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार क्रांतिकारियों को तलाश रही थी। ऐसे में उनके मददगार बने स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी। गणेश शंकर विद्यार्थी के मित्र ग्राम पैजनियां निवासी चौधरी गंगा सहाय हुआ करते थे। काकोरी कांड में शामिल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लहड़ी, अवनीकांत मुखर्जी और महाराष्ट्र के अप्पराव की तलाश में ब्रिटिश सरकार ने दिन रात एक कर रखा था।
विज्ञापन
उस दौरान ये सभी क्रांतिकारी गणेश शंकर विद्यार्थी का पत्र लेकर शरण के लिए पैजनिया गांव में उनके मित्र चौधरी गंगा सहाय के पास पहुंचे। चौधरी गंगा सहाय ने पैजनिया-नहटौर मार्ग पर स्थित अपने आम के बाग में सभी क्रांतिकारियों के रुकने की व्यवस्था की। इन सभी क्रांतिकारियों ने छह महीने का वक्त पैजनियां में गुजारा।
विज्ञापन
यहां से निकलने के बाद अप्पाराव के अतिरिक्त सभी क्रांतिकारियों को ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार लिया था। जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने अलग अलग जेल में फांसी दे दी थी। चौधरी गंगा सहाय के पुत्रों शिवचरण सिंह त्यागी और सुरेंद्र सिंह ने आजादी के बाद क्रांतिकारियों की उक्त शरणस्थली की करीब 13 बीघा जमीन को जिला परिषद को स्कूल और शहीद स्मारक के लिए दान कर दिया गया था।
30 वर्ष पूर्व कराया गया था स्मारक का निर्माण
चौधरी गंगा सहाय के परिजनों डॉ. भोलानाथ त्यागी और सुरेंद्र त्यागी के प्रयासों से करीब 30 वर्ष पूर्व जनपद के तत्कालीन जिलाधिकारी धीरेंद्र बहुगुणा द्वारा बाग की जमीन पर क्रांति स्मारक का निर्माण कराया गया। इससे पैजनिया को पूरे प्रदेश में एक नई पहचान मिली। सभी राष्ट्रीय पर्वों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी गंगा सहाय के परिजन एवं जनपद के जनप्रतिनिधि एवं बड़े अधिकारी यहां ध्वजारोहण कर शहीदों को नमन करने आते है।