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Bijnor News: सूरज की तपिश से गन्ने की मिठास घटी, फीका पड़ा गुड़ का स्वाद
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पैजनिया/बिजनौर। सूरज की तपिश से आम आदमी नहीं, पावर कोल्हुओं पर पड़ा गन्ना भी झुलस रहा है। यहीं वजह है कि पावर कोल्हू पर आ रहे गन्ने में रिकवरी एक से 2 प्रतिशत घट गई है। इससे एक क्विंटल गन्ने के रस से 11 से 12 किलो गुड़ बन रहा है, जबकि कुछ दिन पहले तक करीब 13.5 किलो गुड़ बनता था। मंडी मेें गुड़ के दामों में गिरावट आ गई है।
जनपद में गन्ने का क्षेत्रफल करीब दो लाख 56 हजार हेक्टेयर में था। इसकी पेराई के लिए 10 चीनी मिलों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा 100 से ज्यादा जिले में पावर कोल्हुओं का संचालन होता है। वर्तमान में जिले की सभी चीनी मिलें बंद है। काफी किसानों ने गन्ना बुवाई के लिए एवं पशुचारे को खेतों में गन्ना छोड़ दिया था। अब गन्ना बुवाई के बाद शेष गन्ने को किसान पावर कोल्हुओं पर डाल रहे हैं। पैजनिया, गंज, नांगलसोती क्षेत्र में अधिक कोल्हू का संचालन हो रहा है। चीनी मिल बंद होने कोल्हुओं पर गन्ने की आवक बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि मिलें बंद होने के कारण उनके पास बचा बीज वाला गन्ना कोल्हुओं पर बेचने का ही विकल्प है। किसान हरपाल सिंह, रमन त्यागी और सुनील त्यागी ने बताया कि कोल्हू संचालक करीब 350 रुपये प्रति क्विंटल के बीच गन्ना खरीद रहे हैं। चीनी मिलों के सापेक्ष गन्ना मूल्य कम है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गर्मी से घट रही गन्ना रिकवरी
कोल्हू संचालकों का कहना है कि वे भी घाटे में काम कर रहे हैं। रियाज, इलियास, टिल्लू राजपूत ने बताया कि गर्मी, पुरवा हवा के कारण गन्ने की रिकवरी घट गई है। पहले एक क्विंटल गन्ने से 13.50 किलो तक गुड़ बनता था, जो अब घटकर 11 से 12 किलो रह गया है।
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गुड़ के दामों में गिरावट
कोल्हू संचालकों के अनुसार मंडी में गुड़ का भाव 4500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 3800-4000 रुपये तक पहुंच गया है। साथ ही खराब और सूखे गन्ने की मात्रा बढ़ने से लागत भी बढ़ रही है। कई कोल्हू संचालकों का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर कोल्हुओं का संचालन बंद कर दिया जाएगा।
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जनपद में गन्ने का क्षेत्रफल करीब दो लाख 56 हजार हेक्टेयर में था। इसकी पेराई के लिए 10 चीनी मिलों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा 100 से ज्यादा जिले में पावर कोल्हुओं का संचालन होता है। वर्तमान में जिले की सभी चीनी मिलें बंद है। काफी किसानों ने गन्ना बुवाई के लिए एवं पशुचारे को खेतों में गन्ना छोड़ दिया था। अब गन्ना बुवाई के बाद शेष गन्ने को किसान पावर कोल्हुओं पर डाल रहे हैं। पैजनिया, गंज, नांगलसोती क्षेत्र में अधिक कोल्हू का संचालन हो रहा है। चीनी मिल बंद होने कोल्हुओं पर गन्ने की आवक बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि मिलें बंद होने के कारण उनके पास बचा बीज वाला गन्ना कोल्हुओं पर बेचने का ही विकल्प है। किसान हरपाल सिंह, रमन त्यागी और सुनील त्यागी ने बताया कि कोल्हू संचालक करीब 350 रुपये प्रति क्विंटल के बीच गन्ना खरीद रहे हैं। चीनी मिलों के सापेक्ष गन्ना मूल्य कम है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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गर्मी से घट रही गन्ना रिकवरी
कोल्हू संचालकों का कहना है कि वे भी घाटे में काम कर रहे हैं। रियाज, इलियास, टिल्लू राजपूत ने बताया कि गर्मी, पुरवा हवा के कारण गन्ने की रिकवरी घट गई है। पहले एक क्विंटल गन्ने से 13.50 किलो तक गुड़ बनता था, जो अब घटकर 11 से 12 किलो रह गया है।
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गुड़ के दामों में गिरावट
कोल्हू संचालकों के अनुसार मंडी में गुड़ का भाव 4500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 3800-4000 रुपये तक पहुंच गया है। साथ ही खराब और सूखे गन्ने की मात्रा बढ़ने से लागत भी बढ़ रही है। कई कोल्हू संचालकों का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर कोल्हुओं का संचालन बंद कर दिया जाएगा।