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Bijnor News: इंसानी गंध पर नहीं ऐतवार, शावकों को लेकर नहीं गई मादा गुलदार
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चांदपुर के लतीफपुर चुखेड़ी के जंगल में मिले गुलदार के शावक। स्रोत वन विभाग
बिजनौर। गुलदार के दो शावक इंसानी गंध के कारण अपनी मां से बिछड़ गए। जी हां चांदपुर रेंज के गांव लतीफपुर चुखैड़ी में 17 दिन से दो शावक मां का इंतजार कर रहे हैं। मादा गुलदार तीन बार पहुंची जरूर, लेकिन उन्हें साथ लेकर नहीं गई। वन विभाग का मानना है कि इंसानों के छूने से वह इन्हें छोड़कर चली गई। वहीं अब इन्हें चिड़ियाघर भेजने की तैयारी चल रही है।
चांदपुर वन रेंज के गांव लतीफपुर चुखैड़ी गांव के जंगल में ग्रामीणों को तीन मार्च को गुलदार के दो शावक मिले थे। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची तो देखा शावकों की उम्र अभी दस से 15 दिन ही थी। उन्हें वहीं रखवा दिया गया, लेकिन इससे पहले ग्रामीण शावकों को छू चुके थे। वहां निगरानी के लिए कैमरे भी लगवाए गए। शावकों की मां वहां तीन बार पहुंची, लेकिन सूंघकर वापिस चली गई। 17 दिन से दोनों शावक किटन मिल्क पर जिंदा है। अब कई दिन से गुलदार वहां आई ही नहीं। अब वन विभाग ने इन दोनों शावकों को चिड़ियाघर भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को पत्र लिखा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद इन दोनों शावकों को चिड़ियाघर भेजा जाएगा।
- गुलदार पहचानते हैं इंसानी गंध
जिले में यह पहली बार नहीं है, जब गुलदार के शावकों को उनकी मां नहीं लेकर गई। इससे पहले भी कई बार इंसानों द्वारा शावकों को छुआ गया तो मादा गुलदार उन्हें लेकर नहीं गई। वन अफसर ग्रामीणों से अपील कर रहे हैं कि यदि कहीं शावक मिले तो उन्हें न छुएं। इससे गुलदार के हिंसक होने का खतरा बढ़ जाता है।
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चांदपुर वन रेंज के गांव लतीफपुर चुखैड़ी गांव के जंगल में ग्रामीणों को तीन मार्च को गुलदार के दो शावक मिले थे। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची तो देखा शावकों की उम्र अभी दस से 15 दिन ही थी। उन्हें वहीं रखवा दिया गया, लेकिन इससे पहले ग्रामीण शावकों को छू चुके थे। वहां निगरानी के लिए कैमरे भी लगवाए गए। शावकों की मां वहां तीन बार पहुंची, लेकिन सूंघकर वापिस चली गई। 17 दिन से दोनों शावक किटन मिल्क पर जिंदा है। अब कई दिन से गुलदार वहां आई ही नहीं। अब वन विभाग ने इन दोनों शावकों को चिड़ियाघर भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
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डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को पत्र लिखा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद इन दोनों शावकों को चिड़ियाघर भेजा जाएगा।
- गुलदार पहचानते हैं इंसानी गंध
जिले में यह पहली बार नहीं है, जब गुलदार के शावकों को उनकी मां नहीं लेकर गई। इससे पहले भी कई बार इंसानों द्वारा शावकों को छुआ गया तो मादा गुलदार उन्हें लेकर नहीं गई। वन अफसर ग्रामीणों से अपील कर रहे हैं कि यदि कहीं शावक मिले तो उन्हें न छुएं। इससे गुलदार के हिंसक होने का खतरा बढ़ जाता है।
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