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Bijnor News: गांव किवाड़ के हुनर की कायल है दुनिया

Mon, 19 Aug 2024 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Aug 2024 12:12 AM IST
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The cycle of education is breaking due to low attendance of students.
हमारा गांव
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- किवाड़ गांव के बुनकरों के हाथ से बना कपड़ा बन रहा फेब इंडिया की पहचान


- कुर्ते पायजामे, जैकेट, टीशर्ट, लोअर, दरी संग चादर की विश्व पटल तक बनी मांग


धर्मेन्द्र भुईयार
स्योहारा। किवाड़ गांव की गलियों से निकल रही वर्ल्ड फेम कपड़ों की खेप दुनियाभर में खास पहचान बनाए हुए है। फेब इंडिया तक आपूर्ति के बाद यहां बने कुर्ते पायजामे, जैकेट, टीशर्ट, लोअर, दरी, चादर की मांग विश्व पटल तक बनी है। अपने इसी हुनर के बूते अब स्योहारा और उसका छोटा सा गांव किवाड़ सात समंदर पार तक खास पहचान बना चुका है।



गांव के कच्चे-पक्के और तंग रास्तों से भी आर्थिक तरक्की की बड़ी उड़ान भरी जा सकती है। बानगी स्योहारा से 15 किमी दूर बसे छोटे से गांव किवाड़ में देखी जा सकती है। 2800 आबादी वाले इस गांव की पहचान आज देश से दूर विदेशों तक बनी है। यहां बने कपड़े की मांग हर स्तर पर लगातार जारी है। फेमस रेडीमेड ब्रांड फेब इंडिया के लिए भी इस गांव से कपड़े की आपूर्ति की जा रही है।
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बीते दो दशक से स्योहारा समेत क्षेत्र के ही रवाना, शिकारपुर, बुढ़नपुर, मेवानवादा आदि गांवों में फेब इंडिया के लिए कपड़ा तैयार किया जा रहा था। कोराना काल के बाद इनमें से अधिकतर गांवों में फेब इंडिया के लिए कपड़ों का उत्पादन बंद हो चुका है। मगर, किवाड़ के हुनरमंद आज भी छह अलग-अलग फेब इंडिया संस्थानों के लिए कपड़ा तैयार कर रहे हैं।
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यहां बने कुर्ता पायजामा के कपड़े संग चादर, मेजपोश, पर्दे आदि की आपूर्ति फेब इंडिया के मुख्यालय जयपुर तक की जाती है। फेब इंडिया मुख्यालय से इन कपड़ों को बिक्री के लिए देश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक भेजा जाता है। हर जगह से आने वाली इन कपड़ों की मांग फेब इंडिया प्रबंधन को भी किवाड़ के हुनरमंदों को लगातार अपने साथ जोड़े रखने के लिए मजबूर कर रही है।
गौरतलब है कि गांव किवाड़ में सदियों से मलमल के कपड़े का निर्माण भी किया जाता है, जिसकी आपूर्ति भी कांठ आदि दूर स्थानों तक की जाती है।



प्रतिमाह 30 से 40 लाख का होता है कारोबार

ग्राम किवाड़ ने फेब इंडिया के लिये कपड़ा तैयार करने वाले कारोबारी आफताब आलम व मोहम्मद हसीन बताते है कि कभी कम कभी ज्यादा आर्डर मिलने के बाद भी प्रतिमाह अकेले किवाड़ गांव से लगभग 30 से 40 लाख रुपए कीमत की आपूर्ति हो जाती है। उन्होंने बताया कि नहटौर नौगांवा आदि से धागा लाकर पानीपत में रंगाई के लिए भेजा जाता है। इसके बाद ही कपड़ा तैयार किया जाता है।



फेब इंडिया कपड़े के निर्माता मोहम्मद हसीन का कहना है कि पहले काम करने में लाभ होता था। मगर, अब टैक्स लगने के बाद कारोबार पर फर्क पड़ा है। पहले कपड़े व धागे पर टैक्स नहीं था। मगर, अब एक हजार रुपये से कम कीमत पर पांच प्रतिशत व एक हजार से ज्यादा कीमत पर 12 प्रतिशत का टैक्स लगता है।





पूर्वजों के हुनर को आगे बढ़ाया

आफताब आलम बताते है कि प्रसिद्ध कपड़ा कंपनी फेब इंडिया के साथ साथ खादी का भी काम होता है। पूर्वजों द्वारा शुरू किए गए कपड़ा कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए ही अनेक घरों में जैकेट, टी शर्त लोअर, दरी, चादर, शर्ट, मलमल आदि का काम आज भी किया जा रहा है। एक समय में क्षेत्र के अनेक गांव में फेब इंडिया के लिए बहुत अच्छी संख्या में कपड़ा बनता था।
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