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अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
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नजीबाबाद के जैन मंदिर में पूजन करते श्रद्घालु।
- फोटो : NAZIBABAD
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अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व पर दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया गया। अजय जैन ने कहा कि अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। मनुष्य द्वारा ग्रहस्थ जीवन में रहकर भी ब्रह्मचर्य का पालन किया जा सकता है।
श्री दिगंबर जैन पंचायती और सरजयती मंदिरों में दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन प्रात: श्रीजी का सामूहिक अभिषेक किया गया। जितेंद्र जैन ने कहा कि जो मनुष्य मन से राग छोड़कर अपने से छोटी स्त्री को पुत्रीवत, बराबर को बहिन की तरह और अपने से बड़ी को माता की तरह देखता है वह ब्रह्मचारी होता है। इसी के साथ श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में रविवार को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया गया और तीर्थंकर भगवान अनंत नाथ जी की विशेष पूजा भी की गई। दोपहर को जैन समाज के श्रद्धालुओं ने चतुर्दशी का व्रत रखा और अनंत चतुर्दशी की कथा सुनी। रात्रि में महावीर पालना कार्यक्रम हुआ, जिसमें बच्चों को सम्मानित किया गया।
पूजन में पारसनाथ जैन, नमन, जिनेश्वर प्रसाद, राजीव, दीपक, राहुल, पुनीत, अनुभव, समला, संध्या, रैना, अलका, पूनम, सुनीता, रुक्मणि, समीक्षा, साल्वी, सरोज, छवि, स्नेहलता, अवधेश, सुषमा, संतोष, अरनव, सुशीला, नीरज, चुमकी सहित कई जैन श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व पर दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया गया। अजय जैन ने कहा कि अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। मनुष्य द्वारा ग्रहस्थ जीवन में रहकर भी ब्रह्मचर्य का पालन किया जा सकता है।
श्री दिगंबर जैन पंचायती और सरजयती मंदिरों में दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन प्रात: श्रीजी का सामूहिक अभिषेक किया गया। जितेंद्र जैन ने कहा कि जो मनुष्य मन से राग छोड़कर अपने से छोटी स्त्री को पुत्रीवत, बराबर को बहिन की तरह और अपने से बड़ी को माता की तरह देखता है वह ब्रह्मचारी होता है। इसी के साथ श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में रविवार को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया गया और तीर्थंकर भगवान अनंत नाथ जी की विशेष पूजा भी की गई। दोपहर को जैन समाज के श्रद्धालुओं ने चतुर्दशी का व्रत रखा और अनंत चतुर्दशी की कथा सुनी। रात्रि में महावीर पालना कार्यक्रम हुआ, जिसमें बच्चों को सम्मानित किया गया।
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पूजन में पारसनाथ जैन, नमन, जिनेश्वर प्रसाद, राजीव, दीपक, राहुल, पुनीत, अनुभव, समला, संध्या, रैना, अलका, पूनम, सुनीता, रुक्मणि, समीक्षा, साल्वी, सरोज, छवि, स्नेहलता, अवधेश, सुषमा, संतोष, अरनव, सुशीला, नीरज, चुमकी सहित कई जैन श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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