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Bijnor News: सलाना मजलिसों का विदाई मजलिस से हुआ समापन
Tue, 30 May 2023 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 30 May 2023 01:09 AM IST
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मौलाना कसीम ने कहा - हजरत इमाम हुसैन ने जुल्म सहकर दीन और इस्लाम को बचाया
फोटो-29एनजेडबी01ए, 01बी, 01सी
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। जोगीरम्पुरी दरगाह के शमसुल हसन हॉल से विदाई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कसीम अब्बास ने जायरीनों से वाकयाते कर्बला से सबक लेने, दीन और ईमान को जिंदगी का मकसद बनाने की सलाह दी। विदाई मजलिस से पूर्व अंजुमनों से मर्सिया और नोहा ख्वानी की और मातमी जुलूस निकाले।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इरम अली जैदी, सचिव मो. अब्बास के नेतृत्व में रविवार की देर रात विदाई मजलिस को मौलाना कसीम अब्बास ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि कर्बला के शहीदों ने जुल्म सितम सहकर दीन और इस्लाम को बचाया। शमसुल हसन हॉल में मौलाना कसीम अब्बास ने हजरत इमाम हुसैन और साथियों की कुर्बानियों से सबक लेने की सलाह दी। उन्हाेंने कहा कि वाकयाते कर्बला ने दुनिया को यह पैगाम दिया है कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इस्लाम और दीन को बचाने के लिए जुल्म सहे, लेकिन उन्होंने किसी पराधीनता स्वीकार नहीं की।
मौलाना कसीम अब्बास में कहा कि दरगाह जोगीरम्पुरी की मातमी मजलिसों या कोई भी बड़े आयोजन सर्वधर्म संभाव और प्रशासन की मदद के बिना कामयाब नहीं होते। नसीमुल बाकरी के संचालन में आयोजित विदाई मजलिस से पूर्व कई अंजुमनों ने देर शाम तक नोहा और मर्सिया ख्वानी के जरिए कर्बला के शहीदों को नम आंखों से याद किया। दरगाह कमेटी के सचिव मो. अब्बास ने भी जायरीनों का मजलिसों में शिरकत करने के लिए शुक्रिया किया।
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महफिले मसालमें गूंजी मौला-ए-कायनात की सीरत
महफिल-ए-मसालमा के साथ जोगीरम्पुरी की चार रोजा सलाना मजलिसों का समापन हुआ। कलाम के जरिए मसालमे में शिरकत करने वाले शायरों ने मौला-ए-कायनात की सीरत और किरदार वयां किया।
दरगाह कमेटी के सचिव मो. अब्बास की अध्यक्षता में आयोजित महफिल-ए-मसालमा में कलीम अजगर ने दुनिया तलाश कर चुकी है हर बात का जवाब, लेकिन अली की जात अभी तक सवाल है.., कलाम पेश किया। गुलशन बिजनौरी का कलाम मुश्किल ने हल होकर बताया के अली हैं, अहसास ने अहसास दिलाया के अली हैं.., सादिक सिरसवी का कलाम अब्बास उस तरफ हैं इस तरफ अली, मायूस होकर कोई सवाली न जाएगा.., कलाम सुनकर लोगों ने दाद दी। डॉ. गुलशन बिजनौरी और शहंशाह बिजनौरी के संचालन में आयोजित मसालमे में हैदर किरतपुरी, अली शब्बर नौगानवी, जफर नसीराबादी, मीर सादिक, नसीम बाकरी, मो. शाहरुख, जामिन नौगानवी, मेहदी मेरठी, रजब अली मौलाई सहित अनेक शायरों ने अपने कलाम पेश किए।
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फोटो-29एनजेडबी01ए, 01बी, 01सी
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। जोगीरम्पुरी दरगाह के शमसुल हसन हॉल से विदाई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कसीम अब्बास ने जायरीनों से वाकयाते कर्बला से सबक लेने, दीन और ईमान को जिंदगी का मकसद बनाने की सलाह दी। विदाई मजलिस से पूर्व अंजुमनों से मर्सिया और नोहा ख्वानी की और मातमी जुलूस निकाले।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इरम अली जैदी, सचिव मो. अब्बास के नेतृत्व में रविवार की देर रात विदाई मजलिस को मौलाना कसीम अब्बास ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि कर्बला के शहीदों ने जुल्म सितम सहकर दीन और इस्लाम को बचाया। शमसुल हसन हॉल में मौलाना कसीम अब्बास ने हजरत इमाम हुसैन और साथियों की कुर्बानियों से सबक लेने की सलाह दी। उन्हाेंने कहा कि वाकयाते कर्बला ने दुनिया को यह पैगाम दिया है कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इस्लाम और दीन को बचाने के लिए जुल्म सहे, लेकिन उन्होंने किसी पराधीनता स्वीकार नहीं की।
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मौलाना कसीम अब्बास में कहा कि दरगाह जोगीरम्पुरी की मातमी मजलिसों या कोई भी बड़े आयोजन सर्वधर्म संभाव और प्रशासन की मदद के बिना कामयाब नहीं होते। नसीमुल बाकरी के संचालन में आयोजित विदाई मजलिस से पूर्व कई अंजुमनों ने देर शाम तक नोहा और मर्सिया ख्वानी के जरिए कर्बला के शहीदों को नम आंखों से याद किया। दरगाह कमेटी के सचिव मो. अब्बास ने भी जायरीनों का मजलिसों में शिरकत करने के लिए शुक्रिया किया।
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महफिले मसालमें गूंजी मौला-ए-कायनात की सीरत
महफिल-ए-मसालमा के साथ जोगीरम्पुरी की चार रोजा सलाना मजलिसों का समापन हुआ। कलाम के जरिए मसालमे में शिरकत करने वाले शायरों ने मौला-ए-कायनात की सीरत और किरदार वयां किया।
दरगाह कमेटी के सचिव मो. अब्बास की अध्यक्षता में आयोजित महफिल-ए-मसालमा में कलीम अजगर ने दुनिया तलाश कर चुकी है हर बात का जवाब, लेकिन अली की जात अभी तक सवाल है.., कलाम पेश किया। गुलशन बिजनौरी का कलाम मुश्किल ने हल होकर बताया के अली हैं, अहसास ने अहसास दिलाया के अली हैं.., सादिक सिरसवी का कलाम अब्बास उस तरफ हैं इस तरफ अली, मायूस होकर कोई सवाली न जाएगा.., कलाम सुनकर लोगों ने दाद दी। डॉ. गुलशन बिजनौरी और शहंशाह बिजनौरी के संचालन में आयोजित मसालमे में हैदर किरतपुरी, अली शब्बर नौगानवी, जफर नसीराबादी, मीर सादिक, नसीम बाकरी, मो. शाहरुख, जामिन नौगानवी, मेहदी मेरठी, रजब अली मौलाई सहित अनेक शायरों ने अपने कलाम पेश किए।