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गुगरेला की चपेट में गन्ना, किसान चिंतित

Tue, 07 Jul 2020 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2020 11:24 PM IST
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Sugarcane in grip of Gugarella, farmers worried
गुगरेला की चपेट में गन्ना, किसान चिंतित
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हल्दौर। क्षेत्र में गन्ने की गुगरेला यानि व्हाइट ग्रब (टॉप बोरर) की चपेट में आनी शुरू हो गई है। काफी छोटे आकार का यह कीट पौधों की चोटी को खाकर नष्ट कर देता है। प्रभावित फसल से सिरके जैसी गंध आती है। किसानों को गन्ने की फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
क्षेत्र में गन्ने की फसल प्रमुखता के साथ उगाई जाती है। पैजनिया, मुकरपुर, खासपुरा, गांवड़ी, नसीरपुर, हल्दौर, नांगलजट शरीफपुर मकरंदपुर आदि गांवों में कई किसानों की गन्ने की फसल में गुगरेला लगना शुरू हो गया है। कीट गन्ने के पौधे की चोटी में प्रवेश कर गोभ को नष्ट कर देता है। इससे फसल की चोटी सूख जाती है। इसके चलते प्रभावित फसल की बढ़ोत्तरी रुक जाती है। कीट से प्रभावित पौधे की चोटी को ऊपर की तरफ खींचने पर आसानी से निकल जाती है। इससे सिरके की तरह की दुर्गंध आती है। चोटी बेधक कीट का प्रकोप बहुत ही तेजी से फैलता है। समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो फसल की उत्पादन क्षमता को 25 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। किशनू सिंह, मदन पाल सिंह, मनोज त्यागी, अतुल त्यागी, प्रमोद कुमार चौहान, राजवीर सिंह आदि किसान फसल में लगे इस रोग से चिंतित हैं।
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इस तरह करें कीट की रोकथाम
कृषि रक्षा इकाई प्रभारी राकेश राणा ने बताया कि इस कीट से प्रभावित खेत से खरपतवार को निकाल देना चाहिए। जैविक नियंत्रण के लिए फसल में ट्राइकोग्रामा कार्ड दो किलो प्रति एकड़ के हिसाब से लगाना मुफीद रहता है। इस कार्ड को शाम के समय लगाया जाना चाहिए और इसके बाद किसी भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कीटनाशक का प्रयोग करने से कार्ड में मौजूद मित्र कीटों को नुकसान होता है। यदि किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहता है तो थायामिथाक्सम एक किलो प्रति एकड़ बिखेरकर हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड या फ्यूराडान की छह से आठ किलो प्रति एकड़ की दर से डालने से भी टॉप बोरर पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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