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गन्ना विभाग ने शुरू की वसंत कालीन गन्ना नर्सरी बुवाई की तैयारी
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गन्ना विभाग ने शुरू की वसंत कालीन गन्ना नर्सरी बुवाई की तैयारी
बिजनौर/धामपुर । गन्ना विभाग के अधिकारियों ने फरवरी के प्रथम सप्ताह से शुरू होने वाली गन्ने की वसंत कालीन गन्ना बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है । गन्ना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को वसंत कालीन गन्ने की बुवाई के दौरान शोध केंद्रों से उन्नतशील प्रजाति के प्रमाणित बीजों को पहले आओ- पहले पाओ के आधार पर पंजीकरण कराने के बाद उपलब्ध कराया जाएगा । प्रत्येक किसान को अधिकतम करीब 25 क्विंटल गन्ने का बीज मिल सकेगा। धामपुर गन्ना विकास परिषद में शोध केंद्रों से अधिकतम 1200 क्विंटल बीज का आवंटन होना है।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षण अमित कुमार पांडे ने बताया कि जिन किसानों को शोध केंद्र के पौध नर्सरी के लिए गन्ने की आवश्यकता है, वह गन्ना समिति या गन्ना परिषद में प्रत्यावेदन देकर पंजीकरण अवश्य करा लें। जो किसान पंजीकरण नहीं कराएगा। उन्हें शोध केंद्र से आने वाला बीज पौध नर्सरी के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक ने बताया कि अब तक कोसा. 0238 की प्रजाति पैदावार के मामले में बहुत बढ़िया रही है, लेकिन अब गन्ने में रोग लगने की शिकायत आने लगी है। जिसके कारण पैदावार में कमी आ रही है। गन्ना विभाग द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि वह किसानों से 0238 प्रजाति के गन्ने की बुवाई को कम कर अन्य प्रजातियों के बीजों से बुआई कर बदलाव लाएं। जिससे रोग रहित गन्ने की पैदावार प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि 0238 प्रजाति के विकल्प के रूप में शोध केंद्रों से इस बार को. 0118 , को. 15023, कोसा 13235, कोएलके. 14220 प्रजाति का बीज शोध केंद्रों से आवंटित किया गया है। विभाग की ओर से आवंटित बीज किसानों को प्रत्यावेदन के आधार पर पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर उपलब्ध कराया जाएगा।
शोधन करके बुवाई करें
गन्ने की बुुवाई करने से पहले बीज के टुकड़ों को काट कर मोयासी दवाई को पानी में घोल कर शोधन कर लें। गन्ना समिति द्वारा किसानों को 50% के अनुदान पर इस दवाई को उपलब्ध कराया जा रहा है । 250 ग्राम के पैकेट में उपलब्ध दवाई को पानी में मिलाकर गन्ने के बीच के टुकड़ों को ड्रिप करने से बीज रोग रहित हो जाता है। जिससे गन्ने का उत्पादन बेहतर होगा। बताया गया है कि जो किसान शोध केंद्र के बीजों से पौध नर्सरी को तैयार करेंगे। उन्हें गन्ना विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा।
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अमित कुमार पांडेय, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, धामपुर
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बिजनौर/धामपुर । गन्ना विभाग के अधिकारियों ने फरवरी के प्रथम सप्ताह से शुरू होने वाली गन्ने की वसंत कालीन गन्ना बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है । गन्ना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को वसंत कालीन गन्ने की बुवाई के दौरान शोध केंद्रों से उन्नतशील प्रजाति के प्रमाणित बीजों को पहले आओ- पहले पाओ के आधार पर पंजीकरण कराने के बाद उपलब्ध कराया जाएगा । प्रत्येक किसान को अधिकतम करीब 25 क्विंटल गन्ने का बीज मिल सकेगा। धामपुर गन्ना विकास परिषद में शोध केंद्रों से अधिकतम 1200 क्विंटल बीज का आवंटन होना है।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षण अमित कुमार पांडे ने बताया कि जिन किसानों को शोध केंद्र के पौध नर्सरी के लिए गन्ने की आवश्यकता है, वह गन्ना समिति या गन्ना परिषद में प्रत्यावेदन देकर पंजीकरण अवश्य करा लें। जो किसान पंजीकरण नहीं कराएगा। उन्हें शोध केंद्र से आने वाला बीज पौध नर्सरी के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक ने बताया कि अब तक कोसा. 0238 की प्रजाति पैदावार के मामले में बहुत बढ़िया रही है, लेकिन अब गन्ने में रोग लगने की शिकायत आने लगी है। जिसके कारण पैदावार में कमी आ रही है। गन्ना विभाग द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि वह किसानों से 0238 प्रजाति के गन्ने की बुवाई को कम कर अन्य प्रजातियों के बीजों से बुआई कर बदलाव लाएं। जिससे रोग रहित गन्ने की पैदावार प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि 0238 प्रजाति के विकल्प के रूप में शोध केंद्रों से इस बार को. 0118 , को. 15023, कोसा 13235, कोएलके. 14220 प्रजाति का बीज शोध केंद्रों से आवंटित किया गया है। विभाग की ओर से आवंटित बीज किसानों को प्रत्यावेदन के आधार पर पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर उपलब्ध कराया जाएगा।
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शोधन करके बुवाई करें
गन्ने की बुुवाई करने से पहले बीज के टुकड़ों को काट कर मोयासी दवाई को पानी में घोल कर शोधन कर लें। गन्ना समिति द्वारा किसानों को 50% के अनुदान पर इस दवाई को उपलब्ध कराया जा रहा है । 250 ग्राम के पैकेट में उपलब्ध दवाई को पानी में मिलाकर गन्ने के बीच के टुकड़ों को ड्रिप करने से बीज रोग रहित हो जाता है। जिससे गन्ने का उत्पादन बेहतर होगा। बताया गया है कि जो किसान शोध केंद्र के बीजों से पौध नर्सरी को तैयार करेंगे। उन्हें गन्ना विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा।
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अमित कुमार पांडेय, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, धामपुर