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आगरा पहुंचे टिड्डी दल से गन्ना विभाग की नींद उड़ी
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आगरा पहुंचे टिड्डी दल से गन्ना विभाग की नींद उड़ाई
धामपुर। चीनी मिल के अधिकारियों ने गन्ने की फसल को टिड्डी दल से बचाने के लिए किसानों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है। किसानों को बताया जा रहा है कि पाकिस्तान से चल कर टिड्डी दल ने आगरा में आमद कर ली है। यह दल रात में जहां रुक जाता है, उस क्षेत्र में गन्ने की फसल को पूरी तरह से चट कर जाता है। इस दल से निजात पाने को किसानों को एक साथ रात्रि के समय जब यह दल विश्राम करें। तभी कीटनाशक रसायनों जैसे क्लोरोपाईरीफास 50 ई.सी 625 एम. एल प्रति एकड़ 200 ली. पानी में घोल बना छिड़काव करें। एक दो किसान के ऐसा करने से कुछ नहीं होगा।
गन्ना जीएम आजाद सिंह ने चिंता जताई कि देश में मानव जाति के लिए कोरोना वायरस खतरा बना है। ठीक वैसे ही गन्ने की फसल के लिए टिड्डी दल संकट बना है। टिड्डियों के इस दल की आगरा में आमद हो चुकी है। आगरा का गन्ना विभाग इस दल के खात्मे को व्यापक स्तर पर प्रयास कर रहा है। यह दल हवा के सहारे से तेजी से भागता है। दिन भर भागता है और रात होने पर वहीं पर विश्राम करने को रुक जाता है।
टिडृडी दल हमेशा बलुई मिट्टी में अंडे देता है। ऐसे में किसानो को खेतों में पानी भर जुताई कर देने इसके हमले से बचा जा सकता है। यह टिड्डी दल शाम 6 से 8 बजे के आस पास जमीन अथवा पेड़ व पौधों पर बैठ जाता है। फिर सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरता है। इस अवधि के बीच इनके ऊपर कीटनाशक दवाई का छिड़काव करके टिड्डी दल को मारा जा सकता है। कीटनाशक रसायनों जैसे क्लोरोपाईरीफास 50 ई.सी 625 एम. एल प्रति एकड़ 200 ली पानी मे घोल बनाकर छिड़काव करें या साइपरमैथरीन 25 ई. सी 100 एम एल प्रति एकड़ के हिसाब से 200 ली पानी में घोल बनाकर टिड्डी दल पर छिड़काव करे । टिड्डी दल (स्वबनेज) से गन्ने की फसल को बचाने का एक और तरीका है। किसान खेतों में एक साथ मिलकर आग जलाकर पटाखे फोड़े या फिर थाली, ढोल नगाडे़ बजाकर तेज आवाज करें व धुआं करें। जिससे टिड्डी दल हमला नहीं करेगा।
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धामपुर। चीनी मिल के अधिकारियों ने गन्ने की फसल को टिड्डी दल से बचाने के लिए किसानों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है। किसानों को बताया जा रहा है कि पाकिस्तान से चल कर टिड्डी दल ने आगरा में आमद कर ली है। यह दल रात में जहां रुक जाता है, उस क्षेत्र में गन्ने की फसल को पूरी तरह से चट कर जाता है। इस दल से निजात पाने को किसानों को एक साथ रात्रि के समय जब यह दल विश्राम करें। तभी कीटनाशक रसायनों जैसे क्लोरोपाईरीफास 50 ई.सी 625 एम. एल प्रति एकड़ 200 ली. पानी में घोल बना छिड़काव करें। एक दो किसान के ऐसा करने से कुछ नहीं होगा।
गन्ना जीएम आजाद सिंह ने चिंता जताई कि देश में मानव जाति के लिए कोरोना वायरस खतरा बना है। ठीक वैसे ही गन्ने की फसल के लिए टिड्डी दल संकट बना है। टिड्डियों के इस दल की आगरा में आमद हो चुकी है। आगरा का गन्ना विभाग इस दल के खात्मे को व्यापक स्तर पर प्रयास कर रहा है। यह दल हवा के सहारे से तेजी से भागता है। दिन भर भागता है और रात होने पर वहीं पर विश्राम करने को रुक जाता है।
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टिडृडी दल हमेशा बलुई मिट्टी में अंडे देता है। ऐसे में किसानो को खेतों में पानी भर जुताई कर देने इसके हमले से बचा जा सकता है। यह टिड्डी दल शाम 6 से 8 बजे के आस पास जमीन अथवा पेड़ व पौधों पर बैठ जाता है। फिर सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरता है। इस अवधि के बीच इनके ऊपर कीटनाशक दवाई का छिड़काव करके टिड्डी दल को मारा जा सकता है। कीटनाशक रसायनों जैसे क्लोरोपाईरीफास 50 ई.सी 625 एम. एल प्रति एकड़ 200 ली पानी मे घोल बनाकर छिड़काव करें या साइपरमैथरीन 25 ई. सी 100 एम एल प्रति एकड़ के हिसाब से 200 ली पानी में घोल बनाकर टिड्डी दल पर छिड़काव करे । टिड्डी दल (स्वबनेज) से गन्ने की फसल को बचाने का एक और तरीका है। किसान खेतों में एक साथ मिलकर आग जलाकर पटाखे फोड़े या फिर थाली, ढोल नगाडे़ बजाकर तेज आवाज करें व धुआं करें। जिससे टिड्डी दल हमला नहीं करेगा।
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