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Bijnor News: धामपुर - रेड रॉट बीमारी की चपेट में गन्ने की फसल
Tue, 22 Aug 2023 11:31 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 22 Aug 2023 11:31 PM IST
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- अधिक समय तक खेतों में पानी भरा रहने से बीमारी की चपेट में आ रहे खेत
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। अधिक दिनों तक खेतों में नदियों का पानी जमा होने से गन्ने की फसल को रेड रॉट बीमारी लग गई है। फसल के रोगग्रस्त होने से पौधे सूखने लगे हैं। क्षेत्र में अब तक 10 प्रतिशत से ज्यादा गन्ने की फसल को बीमारी ने नष्ट कर दिया है। इस बीमारी से बचाव के लिए विशेषज्ञ ब्लीचिंग पावडर के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं।
धामपुर चीनी मिल के गन्ना जीएम ओमवीर सिंह ने बताया कि रेड रॉट बीमारी को गन्ने की फसल के लिए खतरनाक माना जाता है। इसमें गन्ने का पौधा सूख जाता है। गन्ने के तने में सिरके जैसी दुर्गंध आने लगती है। गन्ने की प्रकृति लाल रंग की हो जाती है। यह बीमारी खादर क्षेत्र में तेजी से फैल रही है। मिल की ओर से अब तक जो सर्वे कराया, उसमें 300 हेक्टेयर से अधिक खेतों में यह बीमारी देखी जा चुकी है। अब तक लगभग 10 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने की संभावना है।
यदि इस बीमारी को खत्म करने का प्रबंध नहीं होता तो यह पूरे खेत की फसल को सुखाकर नष्ट कर देती है। चीनी मिल की लगभग 50 टीमें इस कार्य में लगी हैं। जिन गांवों, खेतों में यह बीमारी होती है, मिल की टीम किसानों के साथ संबंधित खेत पर जाकर अपने सामने रोगग्रस्त गन्ने के पौधे को उखड़वाकर उसकी जड़ में ब्लीचिंग पाउडर डलवा रही हैं। अब तक करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधों को उखाड़कर ब्लीचिंग पाउडर डाला जा चुका है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। अधिक दिनों तक खेतों में नदियों का पानी जमा होने से गन्ने की फसल को रेड रॉट बीमारी लग गई है। फसल के रोगग्रस्त होने से पौधे सूखने लगे हैं। क्षेत्र में अब तक 10 प्रतिशत से ज्यादा गन्ने की फसल को बीमारी ने नष्ट कर दिया है। इस बीमारी से बचाव के लिए विशेषज्ञ ब्लीचिंग पावडर के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं।
धामपुर चीनी मिल के गन्ना जीएम ओमवीर सिंह ने बताया कि रेड रॉट बीमारी को गन्ने की फसल के लिए खतरनाक माना जाता है। इसमें गन्ने का पौधा सूख जाता है। गन्ने के तने में सिरके जैसी दुर्गंध आने लगती है। गन्ने की प्रकृति लाल रंग की हो जाती है। यह बीमारी खादर क्षेत्र में तेजी से फैल रही है। मिल की ओर से अब तक जो सर्वे कराया, उसमें 300 हेक्टेयर से अधिक खेतों में यह बीमारी देखी जा चुकी है। अब तक लगभग 10 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने की संभावना है।
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यदि इस बीमारी को खत्म करने का प्रबंध नहीं होता तो यह पूरे खेत की फसल को सुखाकर नष्ट कर देती है। चीनी मिल की लगभग 50 टीमें इस कार्य में लगी हैं। जिन गांवों, खेतों में यह बीमारी होती है, मिल की टीम किसानों के साथ संबंधित खेत पर जाकर अपने सामने रोगग्रस्त गन्ने के पौधे को उखड़वाकर उसकी जड़ में ब्लीचिंग पाउडर डलवा रही हैं। अब तक करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधों को उखाड़कर ब्लीचिंग पाउडर डाला जा चुका है।
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