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Bijnor News: जम्मूतवी-कोलकाता रेल ट्रैक को गंगा की धारा से बचाने के लिए जुटा अमला
Mon, 25 Aug 2025 12:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Mon, 25 Aug 2025 12:21 AM IST
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चंदक क्षेत्र में गंगा कटान से रेलवे ट्रैक को बचाने के लिए डाले गए गार्डर। संवाद
बिजनौर। बालावाली रेलवे स्टेशन और बालावाली पुल के पास गंगा की धारा सैकड़ों बीघा जमीन को काट चुकी है। आम के बाग में खड़े दरख्त भी धारा में बह गए। अब बाग को पूरी तरह से खत्म करने के बाद गंगा का पानी जम्मूतवी-कोलकाता रेल ट्रैक तक आ पहुंचा है। कटान से ट्रैक को बचाने के लिए रेलवे का अमला जुटा हुआ है। ट्रैक को सुरक्षित रखने के लिए स्लीपर और पत्थर डाले जा रहे हैं।
गंगा नदी पिछले कई दिनों के बालावाली गंगा घाट पर रेल लाइन की और बढ़ रही है। गंगा का पानी ट्रैक के पास बने स्टड से टकराकर लौट रहा है। ऐसे में रविवार को रेल विभाग ने युद्ध स्तर पर रेल लाइन के पास सीमेंट के स्लीपर डाले। साथ ही स्लीपर के ऊपर मशीनों से मिट्टी डालते हुए तटबंध का रूप दिया जा रहा है। जंगल के जिन रास्तों से होकर पानी के रेल लाइन की और बढ़ने की संभावना है, उन रास्तों पर भी स्लीपर डालकर पानी रोकने के प्रयास किया जा रहा है।
पांच दिन में मिट गया पचास बीघा बाग का वजूद
रेल लाइन और बालावाली रेल के गाइड बंध के पास पचास बीघा जमीन में आम का बाग हुआ करता था। जिसमें सैकड़ों पेड़ थे। ये पेड़ पांच दिनों में ही गंगा के कटान से धारा में गिर गए और बहते चले गए। इतना ही नहीं बाग की पूरी जमीन में अब गंगा का पानी बह रहा है। लोगों का कहना है कि अगर बाग नहीं होता तो काफी पहले ट्रैक तक पानी पहुंच जाता। उधर पानीपत से नजीबाबाद तक आने वाली इंडियन ऑयल की पाइप लाइन भी शुक्रवार को टूट चुकी है। ऐसे में नजीबाबाद डिपो को तेल की आपूर्ति बंद है।
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एक साल पहले लगाया नलकूप, अब गंगा में समा चुकी है जमीन
चंदक। लालपुर सोजीमल निवासी फारुक ने अपनी आठ बीघा जमीन की सिंचाई करने के लिए पिछले साल ही नलकूप लगाया था। मगर अब गंगा की धारा में फारुक की जमीन समा गई है। ऐसे में पिछले साल लगाया हुआ नलकूप भी बेकार हो गया क्योंकि अब सिंचाई करने के लिए जमीन नहीं बची है। रविवार को पूरा परिवार अपने खेत की बर्बादी देखने के लिए मौके पर पहुंचा। खेत के एक हिस्से में फसल को भी काटने लगा। जिसे अनुमान है कि खेत तो बचेगा ही नहीं, ऐसे में कच्ची गन्ने की फसल को काटकर चारे के रूप में इस्तेमाल कर लिया जाए। बता दें कि बालावाली के पास लालपुर सोजीमल, बेहड़ा और गौंसपुर के किसानों की हजारों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। इसके साथ ही छह से ज्यादा नलकूप भी गंगा में समा गए।
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गंगा नदी पिछले कई दिनों के बालावाली गंगा घाट पर रेल लाइन की और बढ़ रही है। गंगा का पानी ट्रैक के पास बने स्टड से टकराकर लौट रहा है। ऐसे में रविवार को रेल विभाग ने युद्ध स्तर पर रेल लाइन के पास सीमेंट के स्लीपर डाले। साथ ही स्लीपर के ऊपर मशीनों से मिट्टी डालते हुए तटबंध का रूप दिया जा रहा है। जंगल के जिन रास्तों से होकर पानी के रेल लाइन की और बढ़ने की संभावना है, उन रास्तों पर भी स्लीपर डालकर पानी रोकने के प्रयास किया जा रहा है।
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पांच दिन में मिट गया पचास बीघा बाग का वजूद
रेल लाइन और बालावाली रेल के गाइड बंध के पास पचास बीघा जमीन में आम का बाग हुआ करता था। जिसमें सैकड़ों पेड़ थे। ये पेड़ पांच दिनों में ही गंगा के कटान से धारा में गिर गए और बहते चले गए। इतना ही नहीं बाग की पूरी जमीन में अब गंगा का पानी बह रहा है। लोगों का कहना है कि अगर बाग नहीं होता तो काफी पहले ट्रैक तक पानी पहुंच जाता। उधर पानीपत से नजीबाबाद तक आने वाली इंडियन ऑयल की पाइप लाइन भी शुक्रवार को टूट चुकी है। ऐसे में नजीबाबाद डिपो को तेल की आपूर्ति बंद है।
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एक साल पहले लगाया नलकूप, अब गंगा में समा चुकी है जमीन
चंदक। लालपुर सोजीमल निवासी फारुक ने अपनी आठ बीघा जमीन की सिंचाई करने के लिए पिछले साल ही नलकूप लगाया था। मगर अब गंगा की धारा में फारुक की जमीन समा गई है। ऐसे में पिछले साल लगाया हुआ नलकूप भी बेकार हो गया क्योंकि अब सिंचाई करने के लिए जमीन नहीं बची है। रविवार को पूरा परिवार अपने खेत की बर्बादी देखने के लिए मौके पर पहुंचा। खेत के एक हिस्से में फसल को भी काटने लगा। जिसे अनुमान है कि खेत तो बचेगा ही नहीं, ऐसे में कच्ची गन्ने की फसल को काटकर चारे के रूप में इस्तेमाल कर लिया जाए। बता दें कि बालावाली के पास लालपुर सोजीमल, बेहड़ा और गौंसपुर के किसानों की हजारों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। इसके साथ ही छह से ज्यादा नलकूप भी गंगा में समा गए।

चंदक क्षेत्र में गंगा कटान से रेलवे ट्रैक को बचाने के लिए डाले गए गार्डर। संवाद