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Bijnor News: 288 टन वजन सहन नहीं सकी शटरिंग, एक घंटे में ही गिरा पिलर कैप

Tue, 12 Dec 2023 12:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Dec 2023 12:12 PM IST
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Shuttering could not bear the weight of 288 tonnes, pillar cap fell within an hour
- ब्रिज इंजीनियरों ने मौके पर पहुंचकर की जांच, आज दिल्ली से पहुंचेगी जांच टीम
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- कंसलटेंट एजेंसी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही नेशनल हाईवे अथॉरिटी
- रात के अंधेरे में किया गया था ओवर ब्रिज के पिलर कैप का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
जलालाबाद। ओवर ब्रिज के पिलर कैप के निर्माण को लेकर लगी शटरिंग 288 टन का वजन सहन नहीं कर सकी। नतीजा ये हुआ कि पिलर कैप भरभरा कर धराशायी हो गया। हालांकि अब जांच एजेंसी मामले की पड़ताल में लगी है। मगर शटरिंग के नीचे कच्ची जमीन होने और पक्के आधार नहीं बनाए जाने की बात सामने आ रही है। खैर, जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।
सोमवार को नेशनल हाईवे प्राधिकरण के अधिकारी और कंसलटेंट एजेंसी के ब्रिज इंजीनियर जांच के लिए जलालाबाद पहुंचे। इन्होंने हरिद्वार काशीपुर नेशनल हाईवे के बाईपास में बनाए जा रहे ओवरब्रिज के पियर कैप के गिरने के कारणों की पड़ताल की। हालांकि जांच टीम में शामिल अभियंता कुछ भी बताने से बचते नजर आए। बता दें कि रविवार की सुबह करीब छह बजे ओवरब्रिज का पिलर कैप भरभराकर नीचे गिर गया था। बताया जा रहा है कि पिलर कैप में 15 टन लोहा लगाया था जबकि कंक्रीट सीमेंट आदि के मिश्रण का वजन 273 टन था। करीब 288 टन वजन को शटरिंग सहन नहीं कर सकी। शटरिंग जमीन में धंसी और पिलर कैप नीचे आ गिरा।
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रात में किया गया था निर्माण
पिलर कैप के निर्माण का समय भी सवाल खड़े कर रहा है। बताया गया कि शनिवार की देर शाम आठ बजे के बाद इस पिलर कैप का निर्माण चालू हुआ था, जोकि रविवार की सुबह चार से पांच बजे तक चला। निर्माण होने के एक घंटा बाद ही यह पिलर कैप नीचे आ गिरा। अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि आखिर रात में ही क्यों निर्माण हुआ।
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- पिलर के नुकसान का भी होगा आकलन
पिलर के ऊपर कैप का निर्माण किया गया। अब कैप धराशायी हुआ तो पिलर को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। उक्त पिलर आड़ा तिरछा या दरार तो नहीं आई, ब्रिज इंजीनियरों की टीम इसकी भी जांच करेगी।

- जमीन में धंस चुकी थी शटरिंग
ब्रिज एक्सपर्ट इंजीनियरों की मानें तो शटरिंग की नीचे की जमीन को पक्का किया जाता है। वहां पर सीमेंट की पीसीसी भी बनाई जाती है। उधर सूत्रों का दावा है कि जलालाबाद में पिलर के कैप की शटरिंग के नीचे जमीन कमजोर थी, जिसमें शटरिंग धंस गई।



- वर्जन:: कंसलटेंट एजेंसी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही पिलर कैप गिरने के कारणों की जानकारी मिल सकेगी। - राजकुमार, परियोजना निदेशक एनएचएआई
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